भोपाल में भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च 4 नवंबर को, राजनाथ सिंह करेंगे अगुवाई
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 4 नवंबर 2026 को भोपाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को यह जानकारी दी। यह पदयात्रा भाजपा के उस राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है, जो कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग और मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) की आलोचना के जवाब में शुरू किया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
यह पदयात्रा भोपाल के टीटी नगर इलाके में स्थित 'अटल पथ' पर बुधवार सुबह 10:00 बजे आयोजित होगी। कार्यक्रम स्थल पर ट्रैफिक और पार्किंग के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बड़ी संख्या में जुटने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रक्षा मंत्री के दौरे का स्वागत करते हुए कहा, 'रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 4 नवंबर को भोपाल आ रहे हैं। वह 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान के तहत होने वाली पदयात्रा में हमारे साथ शामिल होंगे और इसका नेतृत्व करेंगे। मैं उनका स्वागत और अभिनंदन करता हूं।'
अभियान की पृष्ठभूमि
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने यह अभियान कांग्रेस के उस रुख के विरोध में छेड़ा है, जिसमें पार्टी ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। भाजपा का तर्क है कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में इस अभियान की शुरुआत 30 अक्टूबर को इंदौर से हुई थी, इसके बाद 2 नवंबर को जबलपुर में पदयात्रा निकाली गई। भोपाल का कार्यक्रम राज्य में इस अभियान का तीसरा और सबसे बड़ा आयोजन होगा, क्योंकि इसमें पहली बार केंद्रीय कैबिनेट के एक वरिष्ठतम सदस्य की सीधी भागीदारी होगी।
तैयारियाँ और संगठन
राज्य भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भोपाल पदयात्रा की विस्तृत रणनीति तैयार की है। राज्य के विभिन्न ज़िलों से पार्टी कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए समन्वय किया जा रहा है। राज्य नेतृत्व का लक्ष्य है कि भोपाल मार्च इंदौर और जबलपुर के आयोजनों से बड़ा और प्रभावशाली हो।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर तीखी नोकझोंक जारी है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के मार्च भाजपा की चुनावी ज़मीन को मज़बूत करने की कोशिश है, जबकि पार्टी इसे संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का अभियान बताती है।
मध्य प्रदेश में भाजपा के इस अभियान की आगामी कड़ियाँ और राज्यों में भी विस्तार होने की संभावना है, जो आने वाले समय में दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक संघर्ष की तस्वीर और स्पष्ट करेंगी।