एबीवीपी की 'अराजकता रोको' रैली: भोपाल के अटल पथ पर छात्रों का जमावड़ा, कांग्रेस पर अस्थिरता फैलाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 24 अक्टूबर को भोपाल के अटल पथ पर 'अराजकता रोको, लोकतंत्र अपनाओ' नारे के साथ बड़ी छात्र रैली निकाली। इस प्रदर्शन में संगठन ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाकर देश में अस्थिरता का माहौल बनाने का आरोप लगाया। दिल्ली से भोपाल तक एक साथ हुए इस आयोजन को संगठन ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए युवाओं की एकजुटता का प्रतीक बताया।
मुख्य घटनाक्रम
एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने अटल पथ, भोपाल पर जुटकर नारेबाज़ी की और कांग्रेस की कथित राजनीतिक रणनीति के विरुद्ध अपना विरोध दर्ज कराया। रैली में छात्र-छात्राओं के साथ-साथ जिला अधिवक्ता संघ भोपाल के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। यह आयोजन उसी दिन दिल्ली में हुए बड़े राष्ट्रीय विरोध प्रदर्शन के समानांतर किया गया।
एबीवीपी नेताओं की प्रतिक्रिया
एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, 'देश का युवा लोकतंत्र को बचाने और अपनाने के पक्ष में है, न कि मुद्दे आधारित आंदोलन खड़े करके अराजकता फैलाने में।' उन्होंने आरोप लगाया कि देश के लोकतंत्र में अविश्वास पैदा करने के लिए कथित तौर पर षड्यंत्र किया जा रहा है और देश का युवा इसे समझ रहा है।
एक अन्य एबीवीपी कार्यकर्ता ने कहा कि युवाओं को इकट्ठा करके उनकी मानसिकता बदलने और देश में 'अराजकता जैसा माहौल' पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि 'भारत को बांग्लादेश बना देंगे' जैसी टिप्पणियाँ बार-बार सुनी जा रही हैं, जो पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। उनके अनुसार, सत्ता परिवर्तन केवल चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।
छात्राओं की आवाज़
रैली में शामिल छात्रा शुभासिनी सिंह ने कहा कि पीढ़ियों के बीच बढ़ती सोच की खाई को पाटने के लिए इस तरह के आयोजन ज़रूरी हैं। उन्होंने कहा कि आज लड़कियाँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और समाज को इसे स्वीकार करना होगा। 'भारत को बांग्लादेश बनाने' की टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि इतनी विविधता के बावजूद एकजुट रहना भारत की ताक़त है और यह कभी नहीं बदलेगी।
अधिवक्ता संघ का समर्थन
जिला अधिवक्ता संघ भोपाल के अध्यक्ष देवेंद्र रावत ने रैली को अपना समर्थन देते हुए कहा कि देश कानून और संसद की नीति के अनुसार चलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व विदेशी धन — कथित तौर पर जॉर्ज सोरोस से — लेकर देश का वातावरण खराब कर रहे हैं। रावत ने कहा कि हज़ार-दो हज़ार लोगों के सड़क पर उतरने से सत्ता परिवर्तन संभव नहीं है; यह केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होता है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देश में कई विश्वविद्यालयों और शहरों में छात्र आंदोलनों की लहर देखी जा रही है। एबीवीपी, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा छात्र संगठन है, ने इन प्रदर्शनों को विपक्ष की राजनीति से प्रेरित बताया है। गौरतलब है कि इस तरह की राष्ट्रव्यापी रैलियाँ एबीवीपी की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जिसमें वह खुद को लोकतांत्रिक मूल्यों के रक्षक के रूप में प्रस्तुत करता है। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक बहस और तेज़ होने की संभावना है।