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राजौरी बाढ़: फसल नुकसान सर्वे शुरू, PMFBY के तहत किसानों को मिलेगा मुआवजा

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राजौरी बाढ़: फसल नुकसान सर्वे शुरू, PMFBY के तहत किसानों को मिलेगा मुआवजा

सारांश

राजौरी में 19 जुलाई की अचानक बाढ़ ने सैकड़ों कनाल खेती की जमीन तबाह कर दी। धान-मक्के की फसलें गाद में दब गईं। अब कृषि विभाग PMFBY के तहत मुआवजे के लिए सर्वे कर रहा है — लेकिन असली सवाल यह है कि राहत कितनी जल्दी और कितनी पूरी मिलेगी।

मुख्य बातें

राजौरी जिले में 19 जुलाई 2026 को आई अचानक बाढ़ ने सैकड़ों कनाल उपजाऊ कृषि भूमि को नष्ट किया।
धान और मक्के की खड़ी फसलें गाद-कीचड़ में दब गईं; कई खेत मिट्टी कटाव से खेती के अयोग्य हो गए।
मुख्य कृषि अधिकारी राजेश वर्मा की टीम ने सबसे प्रभावित 'अथी' गांव समेत जिलेभर में सर्वे शुरू किया।
PMFBY के तहत बीमाकृत किसानों को योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार मुआवजा मिलेगा; बिना बीमा वाले किसानों का विवरण अलग से भेजा जाएगा।
डिप्टी कमिश्नर अभिषेक शर्मा के निर्देश पर विभागीय टीमें तत्काल प्रभावित गांवों में पहुंचीं।
नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन और केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में 19 जुलाई 2026 को आई अचानक बाढ़ और लगातार भारी बारिश ने सैकड़ों कनाल उपजाऊ कृषि भूमि को तबाह कर दिया है। इसके बाद कृषि विभाग ने जिले के सभी बाढ़ प्रभावित गांवों में फसल नुकसान का व्यापक सर्वे शुरू कर दिया है, ताकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और अन्य सरकारी राहत प्रावधानों के तहत किसानों को समय पर मुआवजा दिलाया जा सके।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्य कृषि अधिकारी (CAO) राजेश वर्मा ने अपनी टीम के साथ सबसे अधिक प्रभावित 'अथी' गांव का स्थलीय निरीक्षण किया। उफनती नदियों और नालों के तेज बहाव ने धान और मक्के की खड़ी फसलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। कई खेतों में मिट्टी कटाव इतना गहरा है कि वे अब खेती के योग्य नहीं बचे हैं। गाद और कीचड़ की मोटी परत के नीचे दबी फसलों ने किसान परिवारों के सामने गंभीर आजीविका संकट खड़ा कर दिया है।

CAO राजेश वर्मा ने कहा, 'इस महीने की 19 तारीख को यहां अचानक बाढ़ आई थी। नदी के किनारे की वह सारी खेती वाली जमीन, जहां धान और मक्के की फसलें उगाई गई थीं, या तो बह गई है या मलबे से ढक गई है। खड़ी फसलें जमा हुई गाद और कीचड़ के नीचे दब गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।'

सर्वे की प्रक्रिया और दायरा

कृषि विभाग की टीमें राजौरी के सभी बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंच चुकी हैं। अधिकारियों के अनुसार सर्वे पारदर्शी और वैज्ञानिक पद्धति से किया जा रहा है। PMFBY के तहत बीमाकृत किसानों के मुआवजे के दावों पर योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार कार्रवाई होगी। जिन किसानों का बीमा नहीं है, उनका विवरण भी अलग से संकलित कर सरकार को भेजा जाएगा, ताकि अन्य उपलब्ध राहत प्रावधानों के तहत उन्हें वित्तीय सहायता पर विचार किया जा सके। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रभावित किसान को सर्वे से बाहर नहीं रखा जाएगा।

किसानों की आवाज़

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने किसानों से सीधे संवाद किया और नुकसान का ब्यौरा दर्ज किया। एक किसान ने कहा, 'हमें भारी नुकसान हुआ है... सब कुछ बर्बाद हो गया है, और हमारी खेती की जमीन भी बह गई है। कृषि विभाग के अधिकारी आए और उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे मुआवजा या मदद दिलाने में जरूर सहयोग करेंगे।' किसानों ने बताया कि एक रात में उनकी साल भर की मेहनत पानी में बह गई और उन्हें तत्काल वित्तीय सहायता की दरकार है ताकि वे दोबारा खेती शुरू कर सकें।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

किसानों ने डिप्टी कमिश्नर अभिषेक शर्मा का आभार जताया कि उन्होंने तत्परता से विभागीय टीमों को प्रभावित गांवों में भेजा। नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन और केंद्र सरकार को भेजी जाएगी, जिससे राहत प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। यह घटना ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर में मानसून सत्र के दौरान कई जिलों में अचानक बाढ़ की घटनाएं बढ़ी हैं।

आगे की राह

किसानों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार और जिला प्रशासन समय पर मुआवजा, पुनर्वास सहायता और निरंतर मदद सुनिश्चित करेंगे, ताकि क्षतिग्रस्त कृषि भूमि को बहाल किया जा सके और वे अगले फसल चक्र के लिए तैयार हो सकें। सर्वे पूरा होने के बाद मुआवजे की राशि और लाभार्थियों की संख्या स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जम्मू-कश्मीर में बाढ़ के बाद मुआवजे की प्रक्रिया ऐतिहासिक रूप से धीमी रही है — कई बार किसान अगले फसल चक्र तक राहत का इंतजार करते रहते हैं। PMFBY की पहुंच सीमित है क्योंकि बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसान अभी भी इसके दायरे से बाहर हैं। बिना बीमा वाले किसानों के लिए 'विवरण भेजने' और वास्तविक भुगतान के बीच की खाई ही असली परीक्षा है। प्रशासनिक तत्परता की सराहना होनी चाहिए, पर जवाबदेही तभी पूरी होगी जब मुआवजा समयबद्ध और पर्याप्त हो।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजौरी में बाढ़ से कितनी फसल बर्बाद हुई?
19 जुलाई 2026 को आई अचानक बाढ़ ने राजौरी जिले में सैकड़ों कनाल उपजाऊ कृषि भूमि नष्ट कर दी। धान और मक्के की खड़ी फसलें गाद-कीचड़ में दब गईं और कई खेत मिट्टी कटाव के कारण खेती के योग्य नहीं बचे।
PMFBY के तहत राजौरी के किसानों को मुआवजा कैसे मिलेगा?
कृषि विभाग की टीमें जिलेभर में फसल नुकसान का सर्वे कर रही हैं। PMFBY के तहत बीमाकृत किसानों के दावों पर योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार कार्रवाई होगी। जिन किसानों का बीमा नहीं है, उनका विवरण अलग से सरकार को भेजा जाएगा ताकि अन्य राहत प्रावधानों पर विचार किया जा सके।
राजौरी में कृषि सर्वे की जिम्मेदारी किसने ली?
मुख्य कृषि अधिकारी राजेश वर्मा के नेतृत्व में कृषि विभाग की टीमें सर्वे कर रही हैं। डिप्टी कमिश्नर अभिषेक शर्मा के निर्देश पर टीमें तत्काल प्रभावित गांवों में भेजी गईं।
क्या बिना बीमा वाले किसानों को भी राहत मिलेगी?
हां, कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना बीमा वाले किसानों का विवरण भी अलग से संकलित कर सरकार को भेजा जाएगा। इसके बाद सरकार अन्य उपलब्ध राहत प्रावधानों के तहत उन्हें वित्तीय सहायता देने पर विचार करेगी।
राजौरी के किसानों को मुआवजा कब तक मिलने की उम्मीद है?
सर्वे पूरा होने के बाद नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन और केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। मुआवजे की सटीक समयसीमा अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन अधिकारियों ने राहत प्रक्रिया में तेजी लाने का भरोसा दिलाया है।
राष्ट्र प्रेस
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