राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पैकेटबंद जूस की भ्रामक ब्रांडिंग का मुद्दा उठाया
सारांश
Key Takeaways
- भ्रामक ब्रांडिंग उपभोक्ताओं को गलत सूचना देती है।
- सरकार को भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए कदम उठाने चाहिए।
- बच्चों को स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों की जानकारी होनी चाहिए।
नई दिल्ली, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट डालकर कहा, "क्या आपको लगता है कि आप फलों का रस पी रहे हैं? एक बार फिर से सोचिए। बड़े-बड़े खाद्य ब्रांड चमकदार 'ताजे फलों' की तस्वीरों वाले पैकेट में मीठा पानी बेच रहे हैं, जबकि पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में सच्चाई छिपी हुई है, जिस पर लिखा है 'तस्वीरें केवल मार्केटिंग के लिए हैं'।"
उन्होंने यह भी कहा कि आज मैंने संसद में इस मुद्दे को उठाया है, क्योंकि यह भ्रामक ब्रांडिंग और झूठे विज्ञापन लाखों लोगों, विशेषकर बच्चों को, मधुमेह और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की ओर धकेल रहे हैं। अब समय आ गया है कि आपके जूस के डिब्बे के पीछे की सच्चाई को उजागर किया जाए।
राघव चड्ढा ने यह भी बताया कि भारत का उपभोक्ता बाजार एक गंभीर बीमारी का शिकार है, जिसे गुमराह करने वाली ब्रांडिंग और झूठे विज्ञापनों के नाम से जाना जाता है। जब हम फ्रूट जूस की बोतल खरीदते हैं, तो उसके फ्रंट पर ताजे फलों का बड़ा चित्र होता है, लेकिन पीछे छोटे अक्षरों में लिखा होता है कि यह तस्वीर केवल मार्केटिंग के लिए है। हमारे देश का युवा इन पेय पदार्थों को यह सोचकर पीता है कि ये स्वास्थ्यवर्धक और पौष्टिक हैं, लेकिन उसे यह नहीं पता कि वह चीनी का घोल पी रहा है, जिससे मधुमेह और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां होती हैं।
उन्होंने सवाल उठाया, "आपके माध्यम से मेरा सवाल यह है कि सरकार भ्रामक छवियों पर प्रतिबंध सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठा रही है?" उन्होंने आगे कहा, "हम यह कैसे सुनिश्चित कर रहे हैं कि पैकेट पर सबसे आगे अधिक चीनी की जानकारी दी जाए और अंत में हम यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि यह स्पष्ट रूप से पता चले कि यह उत्पाद फ्रूट जूस है या चीनी और प्रिजर्वेटिव युक्त पेय है?"