रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह का लद्दाख दौरा: पूर्वी सीमा पर सैन्य तैयारियों की समीक्षा, जवानों का बढ़ाया मनोबल
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 5 से 7 जून 2026 के बीच पूर्वी लद्दाख के अग्रिम मोर्चों का तीन दिवसीय दौरा किया, जिसमें उन्होंने लेह सेक्टर, बेस कैंप और उत्तरी ग्लेशियर क्षेत्र सहित अत्यधिक ऊंचाई वाले संवेदनशील इलाकों का सीधे जायजा लिया। इस यात्रा में सैन्य तैयारियों, सीमा अवसंरचना और रसद व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की गई।
मुख्य घटनाक्रम
रक्षा सचिव ने मुख्यालय 14 कोर के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और परिचालन तैयारियों का विस्तृत आकलन किया गया। बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में विकसित की जा रही आधारभूत संरचनाओं, सैन्य रसद नेटवर्क और दीर्घकालिक परिचालन स्थिरता से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
अधिकारियों ने रक्षा सचिव को क्षेत्र में जारी विकास कार्यों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और बर्फीले ग्लेशियर क्षेत्रों में तैनात सैनिकों से उन्होंने सीधे संवाद किया तथा उनकी परिचालन तत्परता का मूल्यांकन किया।
जवानों का मनोबल और सराहना
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने अग्रिम मोर्चों पर तैनात जवानों की प्रतिबद्धता, साहस और पेशेवर दक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में इन जवानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कर्तव्य निभा रहे सैनिकों के अदम्य साहस और समर्पण की उन्होंने विशेष प्रशंसा की।
गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख भारत की सबसे संवेदनशील और रणनीतिक सीमाओं में से एक है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब इस क्षेत्र में सीमा अवसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सुरक्षा नियमावली और नीतिगत पहल
इस दौरे से पूर्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने रक्षा मंत्रालय के सुरक्षा निर्देशों की एक नई नियमावली भी जारी की थी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह नियमावली सुरक्षा दिशा-निर्देशों का विस्तृत दस्तावेज है। उन्होंने सुरक्षा कर्मियों और अधिकारियों से इसके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का आग्रह किया था।
रणनीतिक महत्व
यह तीन दिवसीय यात्रा न केवल सैन्य तैयारियों की समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण रही, बल्कि अग्रिम मोर्चों पर तैनात जवानों का मनोबल बढ़ाने का भी एक अहम अवसर साबित हुई। यह ऐसी परंपरा का हिस्सा है जिसमें वरिष्ठ नागरिक रक्षा अधिकारी सीधे सीमावर्ती क्षेत्रों में जाकर जमीनी हालात का जायजा लेते हैं।
आने वाले समय में सीमा अवसंरचना और परिचालन तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में इस समीक्षा के निष्कर्ष नीति-निर्माण में सहायक होंगे।