दिग्विजय सिंह ने हमेशा हिंदुओं को बदनाम किया: भाजपा विधायक राम कदम का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा विधायक राम कदम ने 5 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा हिंदू धर्म को बदनाम करने का प्रयास किया है। राम कदम ने ठाकरे बंधुओं के 'गर्जना' विरोध प्रदर्शन, एमपीएससी छात्रों के आंदोलन और उत्तर प्रदेश में दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित पदयात्रा — तीनों मुद्दों पर एक साथ प्रतिक्रिया दी।
दिग्विजय सिंह पर सीधा आरोप
राम कदम ने कहा, 'यह वही दिग्विजय सिंह हैं, जिन्होंने हमेशा हिंदू को बदनाम करने का प्रयास किया। हमारे पवित्र भगवा को आतंकवाद के साथ जोड़ने वाले यही दिग्विजय सिंह हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय मूर्ति के स्वरूप पर सवाल उठाने वाले और राम मंदिर निर्माण के पक्ष में न्यायिक फैसले में अड़चन चाहने वाले भी यही नेता थे। राम कदम के अनुसार, 'ऐसे हिंदू-विरोधी विचार कांग्रेस नेताओं के थे, अभी भी हैं।'
ठाकरे बंधुओं के 'गर्जना' मोर्चे पर कटाक्ष
भाजपा विधायक ने उद्धव ठाकरे और उनके भाइयों के 'गर्जना' विरोध प्रदर्शन को 'फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता' बताते हुए कहा कि मंच पर नेता एक-दूसरे से बड़ा झूठ बोलने की होड़ में थे। उन्होंने याद दिलाया कि नवंबर 2025 में इन्हीं दलों ने सड़क पर उतरकर मतदाता सूची में फर्जी नाम हटाने की माँग की थी — और आज वही काम चुनाव आयोग कर रहा है। राम कदम ने कहा कि जिस ईवीएम को लेकर अब विरोध हो रहा है, वह कांग्रेस के कार्यकाल में ही आई थी, और उद्धव ठाकरे उसी ईवीएम पर 30 वर्षों तक महानगरपालिका के चुनाव जीतते रहे।
एमपीएससी आंदोलन पर भाजपा का रुख
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के छात्र पुणे और नागपुर सहित राज्य के कई हिस्सों में पेपर लीक, भर्ती में देरी और परीक्षा पैटर्न में बदलाव के विरोध में सत्याग्रह कर रहे हैं। राम कदम ने कहा कि छात्रों की सभी माँगें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वीकार कर ली हैं। हालाँकि, उन्होंने आरोप लगाया कि शरद पवार गुट के नेता जानबूझकर अपने कार्यकर्ताओं को छात्रों की आड़ में घुसाकर राजनीतिक स्वार्थ साध रहे हैं।
विधिक सीमा का तर्क
राम कदम ने स्पष्ट किया कि छात्र जिस माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, उसका अधिकार महाराष्ट्र सरकार के पास नहीं, बल्कि राष्ट्रपति के पास है। इसलिए राज्य सरकार उस माँग को सीधे नहीं मान सकती। उन्होंने इस आंदोलन को 'छात्रों का नहीं, शरद पवार गुट का' करार दिया। यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र में विपक्ष सरकार पर कई मोर्चों से दबाव बना रहा है और राज्य में राजनीतिक माहौल गर्म है।