राम मंदिर चढ़ावा चोरी: रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव की 14 घंटे की पुलिस रिमांड मंजूर
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में मंगलवार, 14 जुलाई को स्थानीय अदालत ने दो आरोपियों — रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव — की 14 घंटे की पुलिस रिमांड मंजूर कर ली। मामले के विवेचक आशुतोष तिवारी ने अदालत से सात दिन की हिरासत की माँग की थी, किंतु न्यायालय ने सीमित अवधि की कस्टडी की अनुमति दी। अदालती आदेश के अनुसार पुलिस शुक्रवार सुबह दोनों आरोपियों से पूछताछ शुरू कर सकती है।
मामले का घटनाक्रम
इससे पहले अयोध्या पुलिस इस मामले में गिरफ्तार चार अन्य आरोपियों — अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे — से रिमांड पर पूछताछ कर चुकी है। उस पूछताछ के दौरान जाँच एजेंसियों को कई अहम सुराग हाथ लगे थे।
पूछताछ के दौरान चोरी की रकम से खरीदे गए दो चार पहिया वाहन, सोने के आभूषण, नकद राशि और निवेश संबंधी दस्तावेज बरामद किए गए। इन बरामदगियों के आधार पर जाँच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
पुलिस की आगामी रणनीति
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव से पूछताछ में तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा — चोरी की रकम के उपयोग का ब्यौरा, अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका, और पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली। जाँच एजेंसियों को उम्मीद है कि इस रिमांड से मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा होगा।
सर्वोच्च न्यायालय की सक्रियता
इस बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की न्यायालय-निगरानी में जाँच की माँग वाली याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई की। अदालत ने ट्रस्ट के साथ-साथ केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश एसआईटी को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
ये याचिकाएँ राजद सांसद सुधाकर सिंह, अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी, वकील अजय कुमार राय, दिनेश कुमार यादव और हिन्दू धर्म परिषद ने दायर की हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
आगे क्या होगा
रिमांड की सीमित अवधि को देखते हुए पुलिस पर दबाव है कि वह 14 घंटे के भीतर अधिकतम जानकारी जुटाए। सर्वोच्च न्यायालय की सक्रियता और एसआईटी को दिए गए निर्देश यह संकेत देते हैं कि यह मामला अब केवल स्थानीय पुलिस जाँच तक सीमित नहीं रहेगा — उच्चतम स्तर पर न्यायिक निगरानी इस प्रकरण को नई दिशा दे सकती है।