राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: चंपत राय व अनिल मिश्रा को गवाह बनाने पर दिनेंद्र दास बोले — सरकार का फैसला स्वीकार
सारांश
मुख्य बातें
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास ने 27 सितंबर 2026 को अयोध्या में स्पष्ट किया कि मंदिर में रीति-रिवाज और दान की व्यवस्था सुचारू रूप से जारी है, और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों चंपत राय तथा अनिल मिश्रा को सरकारी गवाह बनाए जाने के मामले में ट्रस्ट सरकार के निर्णय को स्वीकार करेगा। यह बयान राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर उठे विवाद के बीच आया है।
दिनेंद्र दास का बयान
दिनेंद्र दास ने कहा, 'अयोध्या के संत और महंत संतुष्ट हैं। श्रद्धालु रामलला के दर्शन करने आते हैं और खुद दान करते हैं।' चंपत राय व अनिल मिश्रा को सरकारी गवाह बनाए जाने के सवाल पर उन्होंने एक अनूठी व्याख्या दी। उन्होंने कहा कि रामलला स्वयं भगवान थे, लेकिन जब समाज की ओर से कुछ कमी की बात उठाई गई तो उन्हें भी मानना पड़ा और वनवास में जाना पड़ा। दास के अनुसार, उसी तरह जब समाज ने सवाल उठाया तो सरकार को निर्णय लेना पड़ा।
बिहार मंत्री रामकृपाल यादव की प्रतिक्रिया
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा, 'चंपत राय और अनिल मिश्रा इस स्थान की देखरेख कर रहे थे। जांच समिति ने उन्हें बेकसूर पाया।' यादव ने आगे कहा कि जब यह मामला गंभीर हुआ और पूरे देश में चर्चा हुई, तब यह एक संवेदनशील मुद्दा बन गया। उनके अनुसार, जो लोग बेदाग रहे उन पर झूठे आरोप लगाए गए थे, किंतु अंततः उन्हें न्याय मिला है।
भाजपा नेता राम कदम का तर्क
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता राम कदम ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप पर नहीं, बल्कि न्यायिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत तथ्यों के आधार पर काम करती हैं। उन्होंने कहा, 'जो भी तथ्य सामने आए हैं, सभी चार्जशीट में दर्ज हैं। यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, इस पर सियासत कैसे की जा सकती है।' कदम ने जोड़ा कि जिन लोगों ने यह 'घिनौना काम' किया है, उनमें से किसी को माफ नहीं किया जाएगा और इस पर पूरा देश एकमत है।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला तब सामने आया जब अयोध्या स्थित मंदिर में दानपेटियों से धन की गड़बड़ी की शिकायतें उठीं। इस मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा — जो ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारी रहे हैं — को सरकारी गवाह बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में व्यापक बहस छेड़ दी। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या और दान की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आगे की दिशा
कानूनी प्रक्रिया के तहत इस मामले की जांच जारी है और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। ट्रस्ट के सदस्यों के बयान से संकेत मिलता है कि मंदिर प्रशासन सरकारी और न्यायिक प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग की स्थिति में है। इस मामले का अंतिम निस्तारण न केवल ट्रस्ट की विश्वसनीयता बल्कि धार्मिक स्थलों पर वित्तीय पारदर्शिता के व्यापक प्रश्न पर भी असर डालेगा।