16 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

21 दिन की फरलो खत्म: राम रहीम शाम 4:55 बजे सुनारिया जेल लौटे, 2026 में तीसरी बार मिली थी अस्थायी रिहाई

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
21 दिन की फरलो खत्म: राम रहीम शाम 4:55 बजे सुनारिया जेल लौटे, 2026 में तीसरी बार मिली थी अस्थायी रिहाई

सारांश

21 दिन की फरलो खत्म होते ही राम रहीम बुधवार शाम गुप्त सुरक्षा घेरे में सुनारिया जेल लौट गए। 2026 में यह तीसरी अस्थायी रिहाई थी और कुल 17वीं — जो अकाल तख्त से लेकर पीड़ित परिवारों तक सबके निशाने पर है।

मुख्य बातें

गुरमीत राम रहीम सिंह की 21 दिन की फरलो 16 सितंबर 2026 को समाप्त हुई; वह शाम 4:55 बजे सुनारिया जेल लौटे।
फरलो 25 अगस्त 2026 को दी गई थी; इस दौरान वह सिरसा के डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहे।
वर्ष 2026 में यह उनकी तीसरी अस्थायी रिहाई थी — जनवरी में 40 दिन और मई में 30 दिन की पैरोल पहले मिल चुकी है।
2017 से अब तक राम रहीम को कुल 17 बार पैरोल या फरलो दी जा चुकी है।
अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने फरलो पर आपत्ति जताते हुए बंदी सिख कैदियों की रिहाई का मुद्दा उठाया।
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के पुत्र अंशुल छत्रपति ने कहा कि बार-बार रिहाई से पीड़ित परिवारों में असुरक्षा बढ़ती है।

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की 21 दिन की फरलो बुधवार, 16 सितंबर 2026 को समाप्त होने के बाद वह शाम करीब 4:55 बजे रोहतक स्थित सुनारिया जेल वापस लौट गए। सुरक्षा व्यवस्था के तहत उनकी वापसी का समय और यात्रा कार्यक्रम पहले से सार्वजनिक नहीं किया गया था। 2017 से जेल में बंद राम रहीम को अब तक कुल 17 बार पैरोल या फरलो दी जा चुकी है।

फरलो का विवरण और अवधि

राम रहीम को 25 अगस्त 2026 को 21 दिनों की फरलो दी गई थी। इस दौरान वह सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहे। फरलो की अवधि में डेरा परिसर में अनुयायियों की आवाजाही और गतिविधियाँ जारी रहीं। यह वर्ष 2026 में उनकी तीसरी अस्थायी रिहाई थी — इससे पहले उन्हें जनवरी में 40 दिनों की पैरोल और मई में 30 दिनों की पैरोल मिल चुकी है।

सुरक्षा व्यवस्था और वापसी का तरीका

पुलिस और प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम के दौरान कड़ी सुरक्षा बनाए रखी। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचाव के उद्देश्य से राम रहीम को सुरक्षा घेरे में गुप्त रूप से सुनारिया जेल पहुँचाया गया। अधिकारियों ने पहले से कोई सार्वजनिक जानकारी साझा नहीं की।

सजा और आपराधिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि राम रहीम दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 20 वर्ष की सज़ा और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्रकैद की सज़ा भुगत रहे हैं। वह 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं। अब तक की 17 अस्थायी रिहाइयाँ विपक्ष के साथ-साथ कई संगठनों की आलोचना का केंद्र बनती रही हैं।

विरोध और आलोचना

सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त ने इस फरलो पर कड़ी आपत्ति जताई। अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने सवाल किया कि लंबे समय से जेलों में बंद सिख कैदियों की रिहाई अभी तक लंबित है, जबकि राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो दी जा रही है। वहीं, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के पुत्र अंशुल छत्रपति ने भी इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि बार-बार अस्थायी रिहाई मिलने से पीड़ित परिवारों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है।

राजनीतिक विवाद

विपक्षी दलों ने राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो दिए जाने को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि प्रत्येक रिहाई के समय और प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता का अभाव रहता है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पीड़ित और सामाजिक संगठन न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर जोर देते रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और न्यायिक दबाव बढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह विवाद हर रिहाई के साथ और गहरा होता जाएगा।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम रहीम की फरलो कब और कितने दिन की थी?
राम रहीम को 25 अगस्त 2026 को 21 दिनों की फरलो दी गई थी, जो 16 सितंबर 2026 को समाप्त हुई। फरलो के दौरान वह सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहे।
राम रहीम को अब तक कितनी बार पैरोल या फरलो मिली है?
2017 से जेल में बंद राम रहीम को अब तक कुल 17 बार पैरोल या फरलो मिल चुकी है। वर्ष 2026 में यह उनकी तीसरी अस्थायी रिहाई थी — जनवरी में 40 दिन और मई में 30 दिन की पैरोल पहले दी जा चुकी है।
राम रहीम किस मामले में सज़ा काट रहे हैं?
राम रहीम दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 20 वर्ष की सज़ा और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्रकैद की सज़ा भुगत रहे हैं। वह 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं।
अकाल तख्त ने राम रहीम की फरलो पर क्यों आपत्ति जताई?
अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने सवाल उठाया कि लंबे समय से जेलों में बंद सिख कैदियों की रिहाई लंबित है, जबकि राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो का लाभ मिल रहा है। उन्होंने बंदी सिख कैदियों की रिहाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
पीड़ित परिवारों की राम रहीम की बार-बार रिहाई पर क्या प्रतिक्रिया है?
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के पुत्र अंशुल छत्रपति ने कहा कि बार-बार अस्थायी रिहाई मिलने से पीड़ित परिवारों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उन्होंने इस निर्णय का विरोध किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 36 मिनट पहले
  2. 9 घंटे पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले