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21 दिन की फरलो खत्म: राम रहीम सुनारिया जेल लौटे, 2026 में तीसरी बार मिली थी अस्थायी रिहाई

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21 दिन की फरलो खत्म: राम रहीम सुनारिया जेल लौटे, 2026 में तीसरी बार मिली थी अस्थायी रिहाई

सारांश

21 दिन की फरलो खत्म होते ही गुरमीत राम रहीम सिंह 16 सितंबर को सुनारिया जेल लौट गए। 2017 से सजा काट रहे राम रहीम को यह 17वीं अस्थायी रिहाई थी। अकाल तख्त और पीड़ित परिवार लगातार इन फरलो पर सवाल उठाते रहे हैं।

मुख्य बातें

गुरमीत राम रहीम सिंह की 21 दिन की फरलो 16 सितंबर को समाप्त हुई; शाम 4:55 बजे सुनारिया जेल लौटे।
फरलो के दौरान वह सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहे।
2026 में यह उनकी तीसरी अस्थायी रिहाई थी — जनवरी में 40 दिन की पैरोल, मई में 30 दिन की पैरोल, और अब 21 दिन की फरलो।
2017 से अब तक कुल 17 बार पैरोल या फरलो मिल चुकी है।
अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज और पत्रकार के पुत्र अंशुल छत्रपति ने फरलो का विरोध किया।
राम रहीम दुष्कर्म मामले में 20 वर्ष और रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की 21 दिन की फरलो बुधवार, 16 सितंबर को समाप्त हो गई और वह शाम करीब 4:55 बजे IST रोहतक स्थित सुनारिया जेल वापस लौट गए। वर्ष 2017 से सजा काट रहे राम रहीम को अब तक कुल 17 बार पैरोल या फरलो मिल चुकी है, और 2026 में यह उनकी तीसरी अस्थायी रिहाई थी।

फरलो का घटनाक्रम

राम रहीम को 25 अगस्त को 21 दिनों की फरलो प्रदान की गई थी। इस अवधि के दौरान वह सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहे, जहाँ अनुयायियों की आवाजाही और धार्मिक गतिविधियाँ जारी रहीं। सुरक्षा कारणों को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने उनकी वापसी का समय और यात्रा कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया। पुलिस और प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी और उन्हें सुरक्षा घेरे में गुप्त रूप से सुनारिया जेल पहुँचाया गया।

2026 में पैरोल और फरलो का सिलसिला

इससे पहले 2026 में राम रहीम को जनवरी में 40 दिनों की पैरोल और मई में 30 दिनों की पैरोल मिल चुकी थी। गौरतलब है कि 2017 से अब तक उन्हें 17 बार अस्थायी रिहाई का लाभ मिल चुका है। राम रहीम दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 20 वर्ष की सजा और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं।

विरोध और आपत्तियाँ

इस बार की फरलो का भी कई संगठनों और व्यक्तियों ने विरोध किया। सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त ने इस पर आपत्ति जताते हुए बंदी सिख कैदियों की रिहाई का मुद्दा उठाया। अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने सवाल किया कि लंबे समय से जेलों में बंद सिख कैदियों की रिहाई लंबित है, जबकि राम रहीम को बार-बार अस्थायी रिहाई का लाभ दिया जा रहा है।

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के पुत्र अंशुल छत्रपति ने भी इस फैसले का विरोध किया और कहा कि बार-बार अस्थायी रिहाई मिलने से पीड़ित परिवारों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है।

राजनीतिक विवाद

राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो दिए जाने को लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि हर बार अस्थायी रिहाई के फैसले में पारदर्शिता की कमी रहती है और इसके समय को लेकर विवाद खड़ा होता है। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायिक प्रक्रिया और दोषियों को मिलने वाली छूट पर राष्ट्रीय बहस तेज़ है।

आगे की स्थिति

फरलो समाप्त होने के बाद राम रहीम पुनः सुनारिया जेल में अपनी सजा काट रहे हैं। अकाल तख्त और पीड़ित परिवारों की आपत्तियों के मद्देनज़र आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव बना रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब पीड़ित परिवार और अकाल तख्त जैसी संस्थाएँ खुलकर आपत्ति जता रही हों। यह विरोधाभास और गहरा हो जाता है जब बंदी सिख कैदियों की दशकों पुरानी रिहाई के मामले लंबित हों, जबकि दोहरी उम्रकैद की सजा पाए एक दोषी को नियमित अंतराल पर बाहर आने का अवसर मिलता रहे। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर 'कब लौटे' तक सीमित रहती है, लेकिन असली सवाल यह है कि फरलो और पैरोल देने की कसौटी क्या है और उसकी निगरानी कौन करता है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम रहीम की फरलो क्या होती है और इस बार कब से कब तक थी?
फरलो एक अस्थायी रिहाई होती है जो कैदियों को निर्धारित शर्तों पर जेल से बाहर रहने की अनुमति देती है। इस बार राम रहीम को 25 अगस्त से 21 दिनों की फरलो दी गई थी, जो 16 सितंबर को समाप्त हुई।
राम रहीम को अब तक कितनी बार पैरोल या फरलो मिल चुकी है?
2017 से सजा काटने के बाद से राम रहीम को कुल 17 बार पैरोल या फरलो मिल चुकी है। 2026 में यह उनकी तीसरी अस्थायी रिहाई थी — जनवरी में 40 दिन, मई में 30 दिन और अब 21 दिन की फरलो।
राम रहीम किन मामलों में सजा काट रहे हैं?
राम रहीम दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 20 वर्ष की सजा और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं। वह 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं।
अकाल तख्त ने राम रहीम की फरलो पर आपत्ति क्यों जताई?
अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने सवाल उठाया कि लंबे समय से जेलों में बंद सिख कैदियों की रिहाई लंबित है, जबकि राम रहीम को बार-बार अस्थायी रिहाई का लाभ दिया जा रहा है। इसे वे न्यायिक असमानता का उदाहरण मानते हैं।
पीड़ित परिवार की इस फरलो पर क्या प्रतिक्रिया रही?
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के पुत्र अंशुल छत्रपति ने फरलो का विरोध करते हुए कहा कि बार-बार अस्थायी रिहाई मिलने से पीड़ित परिवारों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उन्होंने इस प्रक्रिया पर पारदर्शिता की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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