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रामगढ़ में वज्रपात का कहर: मां-बेटी समेत तीन की मौत, दो घायल — पतरातू के दो गांव प्रभावित

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रामगढ़ में वज्रपात का कहर: मां-बेटी समेत तीन की मौत, दो घायल — पतरातू के दो गांव प्रभावित

सारांश

झारखंड के रामगढ़ में रविवार को वज्रपात ने दो परिवारों को तोड़ दिया — सांकुल गांव में मां-बेटी और पलानी गांव में एक महिला की मौत हुई। मानसून आने के बाद से राज्य में वज्रपात से 35 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, और खेतों में काम करने वाले ग्रामीण सबसे ज़्यादा असुरक्षित हैं।

मुख्य बातें

रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र में 2 अगस्त को वज्रपात से तीन लोगों की मौत , दो घायल।
सांकुल गांव में मां रेखा देवी और बेटी रोशनी कुमारी की मौत; पति भीखू राम का परिवार उजड़ा।
पलानी गांव में सुलेखा देवी की मौत; सुनीता देवी और कंचन कुमारी घायल, सदर अस्पताल रामगढ़ में भर्ती।
झारखंड में 11 जून को मानसून आगमन के बाद से वज्रपात में 35 से अधिक मौतें , 100 से ज़्यादा घायल ।
प्रशासन ने खराब मौसम में खुले स्थानों और खेतों में न जाने की अपील की।

झारखंड के रामगढ़ जिले में रविवार, 2 अगस्त को तेज बारिश के बीच पतरातू थाना क्षेत्र के दो अलग-अलग गांवों में वज्रपात की घटनाओं में मां-बेटी समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक महिला और एक बालिका घायल हो गईं। सभी पीड़ित उस समय खेतों में काम कर रहे थे जब आकाशीय बिजली गिरी।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, पहली घटना सांकुल गांव में हुई, जहां खेत में काम कर रहीं रेखा देवी और उनकी बेटी रोशनी कुमारी वज्रपात की चपेट में आ गईं। स्थानीय लोगों ने दोनों को पतरातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतका रेखा देवी के पति का नाम भीखू राम बताया गया है।

दूसरी घटना पलानी गांव में हुई, जहां सुलेखा देवी, सुनीता देवी और कंचन कुमारी एक साथ वज्रपात की चपेट में आईं। तीनों को 108 एंबुलेंस के ज़रिए पतरातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां सुलेखा देवी को मृत घोषित किया गया। सुनीता देवी और कंचन कुमारी को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल, रामगढ़ रेफर कर दिया गया। मृतका सुलेखा देवी के पति का नाम सुरेंद्र उरांव बताया गया है।

घायलों की स्थिति

घायल सुनीता देवी और कंचन कुमारी की हालत पर चिकित्सकों की निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार दोनों को समय पर अस्पताल पहुंचाए जाने से उनकी जान बचाई जा सकी।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, खेतों और पेड़ों के नीचे जाने से बचें और मौसम विभाग की सलाह का पालन करें। रविवार को रामगढ़ जिले के कई इलाकों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात की घटनाएं दर्ज की गईं।

झारखंड में मानसून और वज्रपात का खतरा

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में इस वर्ष 11 जून को मानसून के आगमन के बाद से वज्रपात की घटनाओं में 35 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं। गौरतलब है कि झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून के दौरान खेतों में काम करने वाले किसान और मज़दूर वज्रपात के सबसे अधिक शिकार होते हैं, क्योंकि खुले मैदान में आश्रय की कमी उन्हें असुरक्षित बना देती है। आने वाले दिनों में भी मौसम विभाग ने राज्य में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो ग्रामीण इलाकों में किसानों के लिए वज्रपात-सुरक्षा ढांचा — जैसे खेतों के पास आश्रय स्थल, रियल-टाइम मौसम अलर्ट और सामुदायिक जागरूकता — कब तक सिर्फ कागज़ों पर रहेगा। अपील जारी करना पर्याप्त नहीं है; राज्य सरकार को वज्रपात को आपदा प्रबंधन की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर रखना होगा।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामगढ़ में वज्रपात से कितने लोगों की मौत हुई और कब?
2 अगस्त को झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र में वज्रपात से तीन लोगों की मौत हुई — सांकुल गांव में मां-बेटी (रेखा देवी और रोशनी कुमारी) और पलानी गांव में सुलेखा देवी। दो अन्य — सुनीता देवी और कंचन कुमारी — घायल हुईं।
वज्रपात में मारे गए लोग कौन थे?
मृतकों में सांकुल गांव की रेखा देवी और उनकी बेटी रोशनी कुमारी, तथा पलानी गांव की सुलेखा देवी शामिल हैं। रेखा देवी के पति भीखू राम और सुलेखा देवी के पति सुरेंद्र उरांव हैं।
घायलों का इलाज कहां हो रहा है?
घायल सुनीता देवी और कंचन कुमारी को पतरातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद सदर अस्पताल, रामगढ़ रेफर किया गया है। दोनों की हालत पर चिकित्सकों की निगरानी जारी है।
झारखंड में इस मानसून सीज़न में वज्रपात से कितनी मौतें हो चुकी हैं?
11 जून को मानसून के आगमन के बाद से झारखंड में वज्रपात की घटनाओं में 35 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं।
वज्रपात से बचाव के लिए प्रशासन ने क्या सलाह दी है?
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, खेतों और पेड़ों के नीचे न जाएं और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें।
राष्ट्र प्रेस
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