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राम मंदिर दान में घपला: हुसैन दलवई का BJP सरकार पर सीधा हमला, SIT जांच पर उठाए सवाल

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राम मंदिर दान में घपला: हुसैन दलवई का BJP सरकार पर सीधा हमला, SIT जांच पर उठाए सवाल

सारांश

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने राम मंदिर दान मामले में केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला — कहा, यह ₹80 लाख नहीं बल्कि सालों का जमा पैसा और सोना है। साथ ही मुंबई के दो हादसों, जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे और इंडी गठबंधन की यूपी रणनीति पर भी मुखर रहे।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि राम मंदिर दान घोटाले में केंद्र सरकार 'पूरी तरह एक्सपोज' हो चुकी है।
एसआईटी को जांच के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय मिला; दलवई ने ₹2 करोड़ की जमीन खरीद और सोने के हिसाब पर सवाल उठाए।
साकीनाका में 60 वर्षीय की मैनहोल में मौत और चेंबूर में 11 वर्षीय बच्चे की पेड़ गिरने से मौत पर प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की माँग का समर्थन किया; भारत-पाकिस्तान-बांग्लादेश-श्रीलंका के क्षेत्रीय फेडरेशन की वकालत की।
इंडी गठबंधन के जरिए उत्तर प्रदेश चुनाव लड़ने का भरोसा जताया, भाजपा की वापसी को नकारा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद हुसैन दलवई ने 2 जुलाई को मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए राम मंदिर दान घोटाले की एसआईटी जांच, मुंबई के दो हालिया हादसों, जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे और भारत-पाकिस्तान संबंधों सहित कई अहम मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा। दलवई ने आरोप लगाया कि रामलला के नाम पर भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और इस मामले में केवल उत्तर प्रदेश सरकार नहीं, बल्कि केंद्र सरकार भी पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।

राम मंदिर दान घोटाला: दलवई के गंभीर आरोप

राम मंदिर दान मामले की जांच कर रही एसआईटी को 15 दिन का अतिरिक्त समय मिलने पर दलवई ने कहा कि यह मामला महज 80 लाख रुपये तक सीमित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्षों में जमा हुआ सोना कहाँ गया और ₹2 करोड़ में खरीदी गई ज़मीनों का हिसाब क्या है। दलवई ने कहा, 'रामलला के नाम से भी घपले होने लगे — कमाल की बात है। झूठापन इस देश में फैलाने की कोशिश हो रही है और ये सब उसी के सबूत हैं।' आलोचकों का कहना है कि एसआईटी को बार-बार समय विस्तार मिलना जांच की गति पर सवाल खड़े करता है।

मुंबई हादसे: मैनहोल और स्कूल बस त्रासदी

साकीनाका में 60 वर्षीय बुजुर्ग की मैनहोल में गिरकर मौत पर दलवई ने प्रशासनिक विफलता को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि नीचे के इंजीनियर ऊपरी अधिकारियों को सही जानकारी नहीं देते और ठेकेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं होती — यह रिश्वतखोरी की जड़ें गहरी होने का संकेत है। उन्होंने संबंधित इंजीनियर को तत्काल निलंबित कर जांच कराने की मांग की। चेंबूर में 11 वर्षीय बच्चे की स्कूल बस पर पेड़ गिरने से हुई मौत पर दलवई ने कहा कि पेड़ों की नियमित छंटाई और मजबूती की जांच न होना प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है। उन्होंने कहा, 'मुंबई अब मौत का इलाका बन गई है।'

जम्मू-कश्मीर, भागवत और पाकिस्तान पर रुख

जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की माँग पर दलवई ने कहा कि वहाँ के लोगों के अधिकार सीमित करना बिल्कुल गलत है और उन्हें स्वायत्तता मिलनी चाहिए। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उस टिप्पणी पर — कि विभाजन के बाद भारत आए लोग शरणार्थी नहीं बल्कि 'वॉरियर्स' हैं — दलवई ने कहा कि नाम से ज़्यादा जरूरी है उनके साथ अच्छा व्यवहार। भारत-पाकिस्तान संबंधों पर उन्होंने कहा कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका को मिलाकर एक क्षेत्रीय फेडरेशन बनाना ज़रूरी है, जिसका नेतृत्व स्वाभाविक रूप से भारत के पास होगा।

BJP नेतृत्व और इंडी गठबंधन पर टिप्पणी

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन पर की गई टिप्पणी पर दलवई ने कहा कि नवीन को इसलिए चुना गया है क्योंकि वे अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों पर काम करते हैं और उनके पास स्वतंत्र निर्णय की कोई गुंजाइश नहीं है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में इंडी गठबंधन की सीट बंटवारे पर चल रही चर्चाओं को दलवई ने स्वाभाविक बताया और दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की वापसी का सवाल ही नहीं उठता।

आगे क्या

राम मंदिर दान मामले में एसआईटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है। मुंबई के दोनों हादसों के बाद नागरिक प्रशासन पर दबाव बढ़ेगा कि वह बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा जाँच के लिए ठोस कदम उठाए। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले इंडी गठबंधन में सीट बंटवारे की बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुँचने वाली है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विपक्ष को यह सवाल उठाने का मौका देता है कि जांच स्वतंत्र है या नियंत्रित। मुंबई के दोनों हादसे — मैनहोल और स्कूल बस — एक ही प्रशासनिक विफलता की दो परतें हैं, जिन पर राजनीतिक बयानबाजी तो होती है लेकिन जवाबदेही तय नहीं होती। दलवई का क्षेत्रीय फेडरेशन का सुझाव मुख्यधारा की कवरेज में दब जाता है, जबकि यह भारत की विदेश नीति पर एक वैकल्पिक दृष्टिकोण है जिस पर गंभीर बहस होनी चाहिए।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुसैन दलवई ने राम मंदिर दान घोटाले में क्या आरोप लगाए?
दलवई ने कहा कि यह मामला केवल ₹80 लाख तक सीमित नहीं है — वर्षों में जमा हुए सोने और ₹2 करोड़ में खरीदी गई जमीनों का हिसाब माँगा। उन्होंने केंद्र सरकार को भी इस घोटाले में बराबर का जिम्मेदार ठहराया।
राम मंदिर दान मामले की SIT जांच कहाँ तक पहुँची है?
एसआईटी को जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। जांच का विस्तृत दायरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है और रिपोर्ट आने पर राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना है।
साकीनाका मैनहोल हादसे पर दलवई की क्या माँग है?
दलवई ने संबंधित इंजीनियर को तत्काल निलंबित कर जांच कराने की माँग की। उन्होंने कहा कि प्रशासन में ऊपर से नीचे तक रिश्वतखोरी फैली है, जिससे जवाबदेही खत्म हो गई है।
जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे पर दलवई का क्या रुख है?
दलवई ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की माँग का पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वहाँ के लोगों के अधिकार सीमित करना गलत है और उन्हें स्वायत्तता मिलनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश चुनाव में इंडी गठबंधन की रणनीति क्या होगी?
दलवई ने कहा कि सीट बंटवारे पर बातचीत जारी है और थोड़ी-बहुत बहस स्वाभाविक है। उन्होंने दावा किया कि इंडी गठबंधन मिलकर चुनाव लड़ेगा और उत्तर प्रदेश में भाजपा की वापसी संभव नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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