रांची छात्र आंदोलन: 24वें दिन चौथे दौर की वार्ता, भूख हड़ताली बोले — 'मांगें नहीं मानी तो उग्र होंगे छात्र'
सारांश
मुख्य बातें
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना 17 अगस्त 2026 को अपने 24वें दिन में प्रवेश कर गया। सोमवार को सरकार के प्रतिनिधियों और आंदोलनरत छात्रों के बीच चौथे दौर की वार्ता प्रस्तावित है, जिसे आंदोलन की दिशा तय करने वाला निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। इससे पहले हो चुके तीन दौर की बातचीत बेनतीजा रही है और छात्रों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव का आह्वान किया है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और अब तक का घटनाक्रम
पिछले 24 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डेरा डाले छात्र अपनी मांगों पर अडिग हैं। इस दौरान छात्रों ने विधानसभा का घेराव भी किया था, जहाँ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी और लाठीचार्ज की नौबत आई। सरकार और छात्रों के बीच अब तक तीन बार बातचीत हो चुकी है, लेकिन हर बार वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हुई।
यह ऐसे समय में आया है जब आंदोलन में शामिल चार छात्र पिछले 12-13 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। इनमें से दो छात्र अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि दो धरनास्थल पर ही मौजूद हैं।
भूख हड़ताली छात्रों की बिगड़ती हालत
भूख हड़ताल पर बैठे प्रेम नायक ने बताया कि उनकी भूख हड़ताल का यह 14वाँ दिन है। उन्होंने कहा, 'मेरी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। हम बैठ नहीं पा रहे हैं, चल नहीं पा रहे हैं और सो नहीं पा रहे हैं। लगता नहीं है कि हम ज़्यादा दिन बच पाएंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने वार्ता के लिए कई बार बुलाया, लेकिन हर बार गोलमोल बातें की गईं।
छात्र नेताओं की चेतावनी
छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि आज की वार्ता से उन्हें उम्मीद है कि सभी मांगें पूरी होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया, 'हम अपनी मांगों पर डटे हुए हैं। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। हम किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं।' वार्ता का संदेश उन्हें सीडीओ के माध्यम से मिला था।
प्रेम नायक ने सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, 'अभी तक आंदोलन गांधीवादी तरीके से चला है। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो छात्र आने वाले समय में उग्र हो सकते हैं और उसका परिणाम सरकार को भुगतना होगा। सरकार जनता से बड़ी नहीं हो सकती।'
20 अगस्त का घेराव और आगे की राह
छात्रों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव का आह्वान किया है। सोमवार की वार्ता के नतीजे पर ही यह तय होगा कि यह कार्यक्रम आगे बढ़ेगा या नहीं। गौरतलब है कि यह आंदोलन झारखंड की राजनीति में एक संवेदनशील मोड़ पर आया है और सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।