पंजाब की कानून-व्यवस्था पर रंधावा ने अमित शाह से की मुलाकात, जेल से मोबाइल संचालन को बताया राष्ट्रीय खतरा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने 3 जुलाई को स्पष्ट किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ उनकी हालिया बैठक का पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक मामलों या किसी आंतरिक नाराज़गी से कोई संबंध नहीं है। रंधावा के अनुसार, यह बैठक पूरी तरह पंजाब की बिगड़ती कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर केंद्रित थी।
मुलाकात की पृष्ठभूमि
रंधावा ने बताया कि उन्होंने 4 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र लिखा था, जिसमें पंजाब की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर चिंताएँ उठाई गई थीं। इसी पत्र के आधार पर गृह मंत्री शाह ने उन्हें मिलने का समय दिया और बैठक में पत्र के तीन-चार प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्य सुरक्षा चिंताएँ
रंधावा के पत्र में उठाए गए मुद्दों में गैंगस्टरों की बढ़ती गतिविधियाँ, राष्ट्रविरोधी तत्वों की सक्रियता, आम नागरिकों को मिल रही धमकी भरी कॉल्स और रंगदारी की घटनाएँ शामिल थीं। सबसे गंभीर मुद्दा जेलों के भीतर से 24 घंटे मोबाइल फोन संचालन का रहा। रंधावा ने कहा कि यदि बंद जेलों से आतंकवाद और गुंडागर्दी से जुड़े नेटवर्क का संचालन होता रहे, तो देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना असंभव हो जाएगा।
पाकिस्तान से हथियारों की तस्करी का मुद्दा
रंधावा ने गृह मंत्री के समक्ष यह भी रखा कि पाकिस्तान अब केवल प्रॉक्सी वॉर तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे टकराव जैसी स्थिति पैदा कर रहा है। उनके अनुसार, पाकिस्तान की ओर से लगातार एके-47 राइफलें, पिस्टल और हैंड ग्रेनेड भारत में पहुँचाए जा रहे हैं, जो सीमावर्ती राज्य पंजाब के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है।
पंजाब सरकार पर निशाना
रंधावा ने मौजूदा पंजाब राज्य सरकार को गैंगस्टर नेटवर्क पर अंकुश लगाने में पूरी तरह नाकाम बताया। उनका आरोप है कि सरकारी अधिकारी भी इस व्यवस्था में मिले हुए हैं, जिससे प्रभावी कार्रवाई संभव नहीं हो पा रही। उन्होंने आतंकवाद के दौर का हवाला देते हुए कहा कि उस समय पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों से हालात पर काबू पाया गया था — अब फिर वैसे ही संयुक्त अभियान की ज़रूरत है।
आगे की राह
रंधावा ने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब के लोग राज्य के अशांत अतीत की पुनरावृत्ति नहीं चाहते। उन्होंने केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की माँग की, ताकि गैंगस्टरवाद का स्थायी समाधान निकाला जा सके। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पंजाब में लक्षित हत्याओं और जबरन वसूली की घटनाओं में कथित तौर पर वृद्धि दर्ज की जा रही है।