पंजाब में वेयरहाउसिंग अधिकारी की मृत्यु की जांच में राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हैं: सुनील जाखड़
सारांश
Key Takeaways
- गगनदीप रंधावा की मृत्यु की जांच में राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाया गया है।
- सुनील जाखड़ ने भाजपा की ओर से न्याय की लड़ाई तेज करने की बात कही है।
- पुलिस ने अब तक महत्वपूर्ण सबूत बरामद नहीं किए हैं।
- सीबीआई जांच की मांग की जा रही है।
- भाजपा 4 अप्रैल को विरोध प्रदर्शन करेगी।
अमृतसर, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पंजाब भाजपा के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि राज्य के वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के जिला प्रबंधक गगनदीप रंधावा की मृत्यु की पुलिस जांच से यह एक बार फिर स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार इस मामले में जानबूझकर देरी और इसे कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
जाखड़ ने कहा कि भाजपा न्याय की लड़ाई को और तेज करेगी। उन्होंने रंधावा की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि पांच दिन की पुलिस हिरासत के बाद भी जांच संदेह के घेरे में है, क्योंकि पुलिस ने अभी तक मोबाइल फोन और अन्य महत्वपूर्ण सबूत प्राप्त नहीं किए हैं, जबकि पूर्व मंत्री मीडिया को साक्षात्कार देने में संलग्न थे।
उन्होंने बताया कि यदि पुलिस निष्पक्षता से जांच को लेकर गंभीर है, तो उन्हें घटना के तुरंत बाद सबूत एकत्र करने चाहिए थे। हालांकि, पुलिस ने अब तक पिस्तौल बरामद नहीं की है, और प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में शस्त्र अधिनियम की धाराएं नहीं जोड़ी गई हैं। इसी तरह, सरकारी अधिकारी को धमकी देने और आधिकारिक कर्तव्यों में बाधा डालने से संबंधित धाराएं भी शामिल नहीं की गई हैं।
जाखड़ ने कहा कि पूर्व मंत्री के पिता और निजी सहायक की अब तक गिरफ्तारी न होना सरकार की मंशा को उजागर करता है। इन सभी कारकों से यह स्पष्ट होता है कि सरकार मामले में जानबूझकर देरी कर रही है, जिसका अंतिम लक्ष्य अपने मंत्री को क्लीन चिट देना है। इसलिए, परिवार, भाजपा और पंजाब की जनता सीबीआई जांच की मांग कर रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा परिवार को न्याय दिलाने के लिए अपनी कोशिशों को और तेज करेगी और 4 अप्रैल को अमृतसर में एक विरोध प्रदर्शन करेगी। जाखड़ ने कहा कि रंधावा के साथ हुए अन्याय के लिए आरोपियों को कठोर सजा मिलनी चाहिए और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने पार्टी के सभी सांसदों और विधायकों से संपर्क करने का निर्णय लिया ताकि वे केंद्र सरकार को पत्र लिखकर सीबीआई जांच का अनुरोध कर सकें। उन्होंने मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जांच को सीबीआई को सौंपने का आग्रह भी किया।