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मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण: 'सेवाभाव और समर्पण हमारी अमूल्य पूंजी', PM ने एक्स पर साझा किया सुभाषितम संदेश

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मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण: 'सेवाभाव और समर्पण हमारी अमूल्य पूंजी', PM ने एक्स पर साझा किया सुभाषितम संदेश

सारांश

केंद्र में 12 वर्षों के नेतृत्व के अवसर पर PM मोदी ने एक्स पर सुभाषितम संदेश साझा किया — 'सेवाभाव और समर्पण हमारी अमूल्य पूंजी।' संस्कृत श्लोक के साथ उन्होंने 'सबका साथ, सबका विकास' की भावना को दोहराया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में प्रतिबद्धता जताई।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2025 को केंद्र सरकार में 12 वर्ष पूर्ण होने पर एक्स पर विशेष सुभाषितम संदेश साझा किया।
संदेश में 'सेवाभाव और समर्पण' को राष्ट्र निर्माण की 'अमूल्य पूंजी' बताया गया।
मोदी ने संस्कृत श्लोक 'आर्यकर्मणि रज्यन्ते…' साझा किया, जिसका भाव श्रेष्ठ कर्म और लोककल्याण से है।
8 जून और 5 जून को भी प्रकृति-संरक्षण की थीम पर संस्कृत सुभाषित साझा किए गए थे।
'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र को 12 वर्षों की उपलब्धियों का आधार बताया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2025 को केंद्र सरकार में अपने नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशवासियों के साथ एक विशेष 'सुभाषितम' संदेश साझा किया। इस संदेश में उन्होंने राष्ट्र-प्रथम की भावना और जन-सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया। मोदी ने स्पष्ट किया कि 'सबका साथ, सबका विकास' के मूल मंत्र से प्रेरित एक दशक से अधिक के सतत प्रयासों ने भारत को एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है।

मुख्य संदेश: सेवाभाव और समर्पण

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण और सेवाभाव हमारी अमूल्य पूंजी रही है। बीते 12 वर्षों में सबका साथ, सबका विकास की भावना से प्रेरित निरंतर प्रयासों से ही आज हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की ओर अग्रसर हैं।' यह संदेश ऐसे समय में आया है जब सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में विभिन्न विकास योजनाओं को गति दे रही है।

संस्कृत सुभाषित और उसका अर्थ

मोदी ने अपने संदेश के साथ एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया — 'आर्यकर्मणि रज्यन्ते भूतिकर्माणि कुर्वते। हितं च नाभ्यसूयन्ति स वै पण्डित उच्यते॥' इस श्लोक का भाव है कि जो व्यक्ति सदैव श्रेष्ठ एवं सदाचारपूर्ण कार्यों में लगा रहता है, लोककल्याण में संलग्न रहता है और दूसरों के हितकारी वचनों का सम्मान करता है — वही वास्तव में बुद्धिमान कहलाता है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नियमित रूप से संस्कृत सुभाषितों के माध्यम से अपनी शासन-दृष्टि और सांस्कृतिक मूल्यों को जनता के समक्ष रखते रहे हैं।

पूर्व के सुभाषित संदेश: प्रकृति और पर्यावरण की थीम

8 जून को भी मोदी ने एक्स पर प्रकृति के साथ संतुलन की थीम पर सुभाषित साझा किया था। उन्होंने लिखा था कि प्रकृति के साथ संतुलन बिठाकर समस्त जीवों का कल्याण हो — यही भारतीय संस्कृति की मूल भावना है। इस अवसर पर उन्होंने श्लोक 'यावच्चतस्रः प्रदिशश्चक्षुर्यावत् समश्नुते…' साझा किया, जिसका भाव चारों दिशाओं में प्रकृति के साथ पूर्ण सामंजस्य में जीवन और पर्यावरण-संरक्षण से है।

इससे पहले 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भी मोदी ने 'मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः। माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥' श्लोक साझा किया था। इस श्लोक का भाव है कि वायु कल्याणकारी रूप से प्रवाहित हो, नदियाँ जीवनदायिनी जल दें और औषधियाँ समस्त जीवों के लिए आरोग्य का कारण बनें।

12 वर्षों का सफर: पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। तब से लेकर अब तक वे लगातार तीन कार्यकालों में सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। यह 12 वर्षों की अवधि भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। सुभाषितम संदेशों की यह श्रृंखला मोदी की उस छवि को पुष्ट करती है जिसमें वे शासन को सांस्कृतिक और दार्शनिक मूल्यों से जोड़ते हैं।

आगे की दिशा

12 वर्षों की इस यात्रा के बाद सरकार का ध्यान आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और पर्यावरण-अनुकूल विकास पर केंद्रित है। मोदी के सुभाषितम संदेश इस बात के संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में भी सेवाभाव, सांस्कृतिक जागरूकता और समग्र विकास की थीम उनकी शासन-शैली के केंद्र में रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

सबका विकास' का नारा कहाँ तक ज़मीन पर उतरा — रोज़गार, असमानता और सामाजिक समरसता के मानकों पर। दार्शनिक संदेश प्रेरक हैं, लेकिन नीतिगत जवाबदेही का विकल्प नहीं बन सकते। असली सवाल यह है कि 12 वर्षों की इस यात्रा में 'आत्मनिर्भर भारत' का सपना आम नागरिक के जीवन में कितना मूर्त हुआ।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी का सुभाषितम संदेश क्या है और उन्होंने इसे क्यों साझा किया?
9 जून 2025 को केंद्र सरकार में 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर PM मोदी ने एक्स पर 'सुभाषितम' संदेश साझा किया, जिसमें 'सेवाभाव और समर्पण' को राष्ट्र निर्माण की अमूल्य पूंजी बताया। इसके साथ उन्होंने एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया जो श्रेष्ठ कर्म और लोककल्याण का संदेश देता है।
मोदी ने किस संस्कृत श्लोक को साझा किया और उसका अर्थ क्या है?
मोदी ने 'आर्यकर्मणि रज्यन्ते भूतिकर्माणि कुर्वते। हितं च नाभ्यसूयन्ति स वै पण्डित उच्यते॥' श्लोक साझा किया। इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति श्रेष्ठ कर्मों में लगा रहता है, लोककल्याण करता है और दूसरों के हित का सम्मान करता है — वही सच्चा बुद्धिमान है।
मोदी सरकार के 12 वर्ष कब पूरे हुए?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इस प्रकार जून 2025 में उनके नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण हुए। वे लगातार तीन कार्यकालों से केंद्र सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं।
मोदी के हालिया सुभाषित संदेशों की थीम क्या रही है?
जून 2025 में मोदी ने तीन सुभाषित संदेश साझा किए — 5 जून को पर्यावरण संरक्षण, 8 जून को प्रकृति के साथ संतुलन और 9 जून को राष्ट्र निर्माण में सेवाभाव की थीम पर। तीनों संदेशों में संस्कृत श्लोकों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को रेखांकित किया गया।
'सबका साथ, सबका विकास' का मंत्र मोदी की नीतियों से कैसे जुड़ा है?
'सबका साथ, सबका विकास' 2014 से मोदी सरकार का मूल नीति-मंत्र रहा है, जिसके तहत समावेशी विकास, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाएँ चलाई गई हैं। 12 वर्षों के अवसर पर जारी सुभाषितम संदेश में भी इसी मंत्र को उपलब्धियों का आधार बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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