पद्म पुरस्कार 2026: '65 वर्षों की लेखन यात्रा को राष्ट्रीय सम्मान मिलेगा, यह कभी नहीं सोचा था' — रतिलाल बोरिसागर

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पद्म पुरस्कार 2026: '65 वर्षों की लेखन यात्रा को राष्ट्रीय सम्मान मिलेगा, यह कभी नहीं सोचा था' — रतिलाल बोरिसागर

सारांश

65 वर्षों की अनवरत साहित्य-साधना और 24 साल पाठ्यपुस्तक-निर्माण के बाद, गुजराती विद्वान रतिलाल बोरिसागर को पद्म पुरस्कार मिला — एक सम्मान जिसकी उन्होंने कभी कामना नहीं की। उनकी यह यात्रा उन तमाम क्षेत्रीय साहित्यकारों की आवाज़ है जो खामोशी से भाषा और शिक्षा की सेवा करते रहे।

मुख्य बातें

गुजराती साहित्यकार और शिक्षाविद् रतिलाल बोरिसागर को वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
बोरिसागर हाईस्कूल के छात्र-काल से 65 वर्षों से निरंतर लेखन कर रहे हैं।
उन्होंने प्राथमिक, माध्यमिक और कॉलेज स्तर पर 16 वर्ष अध्यापन किया और गुजरात राज्य स्कूल बोर्ड में 24 वर्ष गुजराती पाठ्यपुस्तकों पर कार्य किया।
पुरस्कार वितरण समारोह 25 मई को शाम 5 बजे राष्ट्रपति भवन , नई दिल्ली में आयोजित होगा।
बोरिसागर ने पद्म चयन प्रक्रिया में बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि अब अनजान लेकिन समर्पित व्यक्तित्वों को भी सम्मानित किया जा रहा है।

गुजराती साहित्यकार और शिक्षाविद् रतिलाल बोरिसागर को इस वर्ष पद्म पुरस्कार से नवाज़ा गया है — एक ऐसा सम्मान जिसकी उन्हें खुद उम्मीद नहीं थी। अहमदाबाद में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बोरिसागर ने कहा कि 65 वर्षों की अनवरत लेखन-यात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलना उनके लिए अत्यंत हर्ष का विषय है, लेकिन उन्होंने कभी पुरस्कार की अपेक्षा रखकर कलम नहीं उठाई।

65 वर्षों की अनवरत साहित्य-साधना

बोरिसागर ने बताया कि उन्होंने हाईस्कूल के छात्र-काल से ही लेखन की शुरुआत की थी और यह सिलसिला आज भी बिना रुके जारी है। उन्होंने प्राथमिक, माध्यमिक विद्यालय और कॉलेज स्तर पर कुल 16 वर्ष अध्यापन किया। इसके अतिरिक्त, गुजरात राज्य स्कूल बोर्ड में 24 वर्षों तक गुजराती साहित्य की पाठ्यपुस्तकों के निर्माण और संपादन में योगदान दिया।

पुरस्कार पर बोरिसागर की भावना

उन्होंने अपनी सृजन-दृष्टि को स्पष्ट करते हुए कहा, 'मुझे जो काम करना है, ईश्वर ने मुझे जो उपहार दिया है, उसे मैं सर्वोत्तम तरीके से वापस लौटाना चाहता हूं। मैंने कभी पुरस्कार या प्रतिफल की अपेक्षा नहीं की।' उन्होंने इस भाव को माँ के प्रेम से जोड़ा — 'मां जैसा भाव है, मां कुछ भी दे तो खुशी, न दे तो भी कोई शिकायत नहीं।'

बोरिसागर ने स्वीकार किया कि साहित्य के क्षेत्र में उन्हें अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं, किंतु पद्म पुरस्कार उनके जीवन का सबसे बड़ा राष्ट्रीय सम्मान है।

पद्म चयन प्रक्रिया पर सराहना

बोरिसागर ने हाल के वर्षों में पद्म पुरस्कार की चयन-प्रक्रिया में आए बदलाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले केवल बड़े और जाने-माने नामों को यह सम्मान मिलता था, लेकिन अब भारत सरकार उन अनजान व्यक्तित्वों को भी खोजकर सम्मानित कर रही है जो अपने क्षेत्र में तो पहचाने जाते हैं, परंतु राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान सीमित रही है। उन्होंने कहा, 'उनकी सेवा-भावना और लगन को महत्व दिया जा रहा है — इसके लिए मैं भारत सरकार को बधाई और आभार व्यक्त करता हूं।'

पुरस्कार समारोह का कार्यक्रम

बोरिसागर के अनुसार, वे 24 मई को दिल्ली के लिए रवाना होंगे और 25 मई को शाम 5 बजे राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार वितरण समारोह में भाग लेंगे।

गुजराती साहित्य और शिक्षा में योगदान

यह ऐसे समय में आया है जब गुजराती भाषा-साहित्य के संरक्षण और पाठ्यक्रम-निर्माण में दशकों से योगदान दे रहे विद्वानों की राष्ट्रीय पहचान की माँग लंबे समय से उठती रही है। गौरतलब है कि बोरिसागर ने न केवल साहित्य-सृजन किया, बल्कि अगली पीढ़ियों के लिए गुजराती भाषा की पाठ्यपुस्तकों को आकार देने में भी निर्णायक भूमिका निभाई। उनका यह सम्मान उन तमाम क्षेत्रीय साहित्यकारों के लिए प्रेरणा है जो मुख्यधारा की चकाचौंध से दूर रहकर भाषा और शिक्षा की सेवा में जुटे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यापक प्रवृत्ति की है जिसमें क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्यकार दशकों तक राष्ट्रीय पहचान से वंचित रहते हैं। गुजराती पाठ्यपुस्तकों को आकार देने वाले इस विद्वान को 65 वर्षों बाद पद्म सम्मान मिलना यह सवाल उठाता है कि ऐसे कितने और बोरिसागर अभी भी अनदेखे हैं। पद्म चयन-प्रक्रिया में पारदर्शिता और विकेंद्रीकरण का जो दावा किया जाता है, बोरिसागर जैसे नाम उसकी एक सकारात्मक मिसाल हैं — लेकिन यह भी देखना होगा कि यह बदलाव नीतिगत है या अपवाद।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रतिलाल बोरिसागर को पद्म पुरस्कार क्यों मिला?
रतिलाल बोरिसागर को गुजराती साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में 65 वर्षों के निरंतर योगदान के लिए पद्म पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। उन्होंने 16 वर्ष अध्यापन और 24 वर्ष गुजरात राज्य स्कूल बोर्ड में पाठ्यपुस्तक-निर्माण में दिए।
पद्म पुरस्कार वितरण समारोह कब और कहाँ होगा?
पद्म पुरस्कार वितरण समारोह 25 मई को शाम 5 बजे राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आयोजित होगा। बोरिसागर 24 मई को अहमदाबाद से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
रतिलाल बोरिसागर कौन हैं?
रतिलाल बोरिसागर अहमदाबाद स्थित गुजराती साहित्यकार और शिक्षाविद् हैं, जिन्होंने हाईस्कूल से लेखन शुरू किया और आज भी सक्रिय हैं। उन्होंने गुजरात राज्य स्कूल बोर्ड में 24 वर्षों तक गुजराती साहित्य की पाठ्यपुस्तकों पर कार्य किया।
बोरिसागर ने पद्म पुरस्कार चयन-प्रक्रिया पर क्या कहा?
बोरिसागर ने हाल के वर्षों में पद्म चयन-प्रक्रिया में आए बदलाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब भारत सरकार उन अनजान व्यक्तित्वों को भी खोजकर सम्मानित कर रही है जो अपने क्षेत्र में समर्पित हैं लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कम पहचाने जाते हैं।
क्या रतिलाल बोरिसागर को पहले भी कोई पुरस्कार मिला है?
हाँ, बोरिसागर के अनुसार उन्हें साहित्य के क्षेत्र में पहले भी कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं। हालाँकि, पद्म पुरस्कार उनके जीवन का पहला और सबसे बड़ा राष्ट्रीय सम्मान है।
राष्ट्र प्रेस
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