18 अक्टूबर 2026
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रावण दहन की लकड़ियां घर लाना टोना-टोटका है, कलह-रोग का कारण: महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव

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रावण दहन की लकड़ियां घर लाना टोना-टोटका है, कलह-रोग का कारण: महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव

सारांश

हरिद्वार के महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने दशहरे पर साफ कहा — रावण दहन की लकड़ियां घर ले जाना टोना-टोटका है, इससे कलह और रोग आता है। रावण के पुतले का दहन आत्म-शुद्धि का प्रतीक है, न कि भौतिक लाभ का साधन। ज्ञानी रावण का पतन इस बात का प्रमाण है कि ज्ञान और नैतिकता साथ न हों तो श्रेष्ठता भी विनाश का कारण बनती है।

मुख्य बातें

महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने हरिद्वार में 18 अक्टूबर 2026 को रावण दहन की लकड़ियां घर ले जाने को टोना-टोटका बताया।
उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति से घर में कलह, रोग और नकारात्मकता आती है, शांति नहीं।
रावण दहन का उद्देश्य आत्म-शुद्धि का संकल्प लेना है — यह प्रतीकात्मक परंपरा है।
रावण को 10 कलाओं का अवतार और ब्रह्म ज्ञानी बताया, लेकिन माता सीता के हरण के कारण उसे खलनायक माना गया।
संदेश यह है कि ज्ञान और नैतिकता का साथ न हो, तो सबसे शक्तिशाली व्यक्ति भी समाज में निंदनीय बन जाता है।

हरिद्वार में महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने 18 अक्टूबर 2026 को दशहरे के अवसर पर रावण दहन से जुड़ी प्रचलित मान्यताओं को लेकर लोगों को सचेत किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि रावण के पुतले की लकड़ियां घर ले जाना टोना-टोटका है और इससे घर में सुख-शांति की बजाय कलह, रोग और नकारात्मकता का वातावरण बनता है। उनके अनुसार, रावण दहन का वास्तविक उद्देश्य आत्म-शुद्धि का संकल्प लेना है, न कि कोई भौतिक लाभ उठाना।

क्या है टोना-टोटके की वास्तविकता

महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने कहा, 'इस प्रकार के त्योहारों में कुछ लोकोक्तियों के आधार पर लोग रावण दहन के बाद पुतले की लकड़ियां उठाकर घर ले जाते हैं — यह टोना-टोटका है।' उन्होंने आगाह किया कि इस प्रवृत्ति से घर में शांति नहीं आती, बल्कि 'कलह का वातावरण, रोग, कष्ट और नकारात्मक माहौल' बनता है।

उनके अनुसार पुतला दहन का एकमात्र उद्देश्य प्रतीकात्मक है — यह संकल्प कि हमारे अंदर की विकृतियां नष्ट हों और जीवन में स्वच्छता बनी रहे। उन्होंने कहा, 'अग्नि से ज्यादा स्वच्छ करने वाली कोई चीज नहीं है।'

रावण दहन का सामाजिक संदेश

महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने रावण दहन को एक व्यापक सामाजिक संदेश से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह परंपरा समाज को यह बताती है कि 'कोई कितना भी बलवान, शक्तिशाली, धनी या राजा क्यों न हो, यदि वह एक भी गलती करता है, तो समाज उसे कठोर दंड देता है।'

उन्होंने कहा कि रावण के सम्पूर्ण जीवनकाल में माता सीता का हरण एकमात्र ऐसी घटना थी जिसने उसे खलनायक बना दिया। इसी एक अवगुण के कारण हमारे महापुरुषों ने उसे माफ नहीं किया और आज तक हर वर्ष उसके पुतले का दहन किया जाता है।

रावण की विद्वत्ता और उसका पतन

गौरतलब है कि महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने रावण के ज्ञान और सामर्थ्य को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि रावण 'ब्रह्म ज्ञानी' था — जैसे राम 12 कलाओं के और कृष्ण 16 कलाओं के अवतार थे, वैसे ही रावण 10 कलाओं का अवतार था।

उनका कहना था कि इतने ज्ञान और सामर्थ्य के बावजूद माता सीता का हरण करना रावण की सबसे बड़ी भूल थी। यही कारण है कि महापुरुषों ने उसे किसी भी परिस्थिति में क्षमा नहीं किया। यह प्रसंग इस सत्य को रेखांकित करता है कि ज्ञान और नैतिकता का साथ न हो, तो श्रेष्ठता भी पतन का कारण बन जाती है।

आम जनता के लिए संदेश

महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने समाज को यह संदेश दिया कि हमारी परंपराओं में जो अच्छाई है, उसे अपनाएं और जो अंधविश्वास है, उससे बचें। उन्होंने कहा कि 'जो भी अच्छा काम करेगा, उसका हमेशा स्वागत और पूजन किया जाएगा, और जो समाज को खंडित करेगा, उसे कोई स्थान नहीं मिलेगा।'

यह संदेश ऐसे समय में आया है जब दशहरे के उत्सव पर अनेक स्थानों पर रावण दहन से जुड़े भ्रामक अंधविश्वास प्रचलित हैं। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि त्योहारों की असली भावना को समझना जरूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे मूल धार्मिक संदेश को विकृत कर रहे हैं। विडंबना यह है कि रावण — जिसे ज्ञान और शक्ति का प्रतीक माना जाता है — उसके पुतले से 'लाभ' लेने की चाहत उसी अंधविश्वास की पराकाष्ठा है जिसे यह परंपरा नकारती है। धार्मिक नेताओं की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे लोगों को रिवाज की आड़ में पनप रहे पाखंड से मुक्त करें।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रावण दहन के बाद लकड़ियां घर ले जाना क्यों गलत माना जाता है?
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव के अनुसार यह टोना-टोटका है जो घर में कलह, रोग और नकारात्मकता लाता है। यह लोकोक्तियों पर आधारित भ्रामक प्रथा है जिसका शास्त्रीय आधार नहीं है।
रावण दहन का असली उद्देश्य क्या है?
रावण दहन का वास्तविक उद्देश्य प्रतीकात्मक आत्म-शुद्धि है — यह संकल्प लेना कि हमारे अंदर की विकृतियां नष्ट हों। महामंडलेश्वर के अनुसार, अग्नि से बड़ा शुद्धिकारक कोई नहीं, और यह परंपरा उसी भाव से की जाती है।
रावण को खलनायक क्यों माना जाता है, जबकि वह ज्ञानी था?
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने बताया कि रावण 10 कलाओं का अवतार और ब्रह्म ज्ञानी था, लेकिन माता सीता के हरण ने उसे खलनायक बना दिया। यह एकमात्र घटना उसके सम्पूर्ण ज्ञान और बल पर भारी पड़ गई।
दशहरे की परंपरा समाज को क्या संदेश देती है?
यह परंपरा संदेश देती है कि कोई भी व्यक्ति — चाहे कितना भी बलशाली या धनी हो — यदि एक गलती करता है, तो समाज उसे कठोर दंड देता है। अच्छे कार्यों की सदा पूजा होती है और बुराई को कोई स्थान नहीं मिलता।
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव कौन हैं?
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव हरिद्वार स्थित एक प्रतिष्ठित धार्मिक संत हैं जो हिंदू धर्म, परंपराओं और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचार रखने के लिए जाने जाते हैं। उनके वक्तव्य धार्मिक समुदायों में व्यापक चर्चा का विषय बनते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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