मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आरआईडीएफ परियोजनाओं की समीक्षा, बढ़ सकती है बॉरोइंग पावर

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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आरआईडीएफ परियोजनाओं की समीक्षा, बढ़ सकती है बॉरोइंग पावर

सारांश

उत्तरी प्रदेश में नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित आरआईडीएफ परियोजनाओं की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने संतोषजनक प्रगति की बात कही और आवश्यकतानुसार बॉरोइंग पावर बढ़ाने की संभावना जताई।

Key Takeaways

  • आरआईडीएफ परियोजनाओं की समीक्षा महत्वपूर्ण है।
  • मुख्य सचिव ने बॉरोइंग पावर बढ़ाने की बात की।
  • पशु चिकित्सालय परियोजना पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • नाबार्ड और विभागों के बीच सहयोग पर जोर दिया गया।
  • ग्रामीण विकास के लिए 3100 करोड़ रुपए तक की धनराशि का लक्ष्य।

लखनऊ, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण अवसंरचना विकास को तेज़ी देने के लिए नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) परियोजनाओं की समीक्षा हेतु सोमवार को हाई पावर कमेटी की पाँचवीं बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने की, जिसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत चल रही परियोजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन किया गया।

मुख्य सचिव ने चौथी समीक्षा बैठक के बाद परियोजनाओं में हुई प्रगति को संतोषजनक बताते हुए कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो चालू वित्तीय वर्ष के लिए राज्य की बॉरोइंग पावर बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने नाबार्ड और कार्यदायी विभागों के बीच बेहतर सहयोग पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि परियोजना स्वीकृति, प्रतिपूर्ति दावे, और परियोजना पूर्णता प्रमाणपत्र (पीसीआर) को समय पर नाबार्ड को भेजा जाए, ताकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में कोई देरी न हो। बैठक में पशुपालन विभाग द्वारा आरआईडीएफ के तहत प्रस्तावित पशु चिकित्सालय परियोजना के मॉडल प्रस्ताव की भी समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि इस प्रस्ताव को जल्द से जल्द तैयार कर नाबार्ड को स्वीकृति के लिए भेजा जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सुविधाओं को मजबूती प्रदान की जा सके। इसके अलावा ‘प्रोजेक्ट येट टू बी ग्राउंडेड’ (पीवाईजी) और ‘स्लो मूविंग प्रोजेक्ट्स’ (एसएमपी) की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने सम्बन्धित विभागों को निर्देश दिया कि इन परियोजनाओं का विस्तृत विवरण नाबार्ड को उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनकी प्रगति का नियमित रूप से अवलोकन किया जा सके। उन्होंने सभी विभागों और नाबार्ड को आपसी तालमेल बढ़ाकर विभिन्न कार्यबिंदुओं पर संयुक्त रूप से कार्य करने की सलाह दी। बैठक से पूर्व, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज कुमार ने जानकारी दी कि चालू वित्तीय वर्ष में आरआईडीएफ-XXXI के तहत विभिन्न विभागों की कुल 2419 करोड़ रुपए की नई परियोजनाएं अब तक स्वीकृत की जा चुकी हैं।

वहीं, 2700 करोड़ रुपए के वितरण लक्ष्य के मुकाबले विभिन्न कार्यदायी विभागों को अब तक 2713 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार को चालू वित्तीय वर्ष के लिए 31 मार्च 2026 तक 3100 करोड़ रुपए तक की धनराशि वितरित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस धनराशि का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास हेतु किया जाएगा, जिससे कृषि, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

Point of View

NationPress
17/03/2026

Frequently Asked Questions

आरआईडीएफ क्या है?
आरआईडीएफ, ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि, नाबार्ड द्वारा संचालित एक वित्तीय योजना है जो ग्रामीण विकास परियोजनाओं को वित्त पोषण प्रदान करती है।
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने क्या कहा?
मुख्य सचिव ने परियोजनाओं की प्रगति को संतोषजनक बताते हुए आवश्यकतानुसार बॉरोइंग पावर बढ़ाने की संभावना व्यक्त की।
बैठक में किन परियोजनाओं की समीक्षा की गई?
बैठक में आरआईडीएफ के तहत चल रही विभिन्न परियोजनाओं, विशेष रूप से पशु चिकित्सालय परियोजना की समीक्षा की गई।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक कौन हैं?
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक का नाम पंकज कुमार है।
इस वर्ष कितना धनराशि वितरित किया जाएगा?
राज्य सरकार को इस वित्तीय वर्ष में 3100 करोड़ रुपए तक की धनराशि वितरित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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