7 अगस्त 2026
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राजद पुनर्गठन: रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी को दी सलाह, वरिष्ठ व समर्पित कार्यकर्ताओं को मिले प्राथमिकता

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राजद पुनर्गठन: रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी को दी सलाह, वरिष्ठ व समर्पित कार्यकर्ताओं को मिले प्राथमिकता

सारांश

बांकीपुर उपचुनाव में हार और आंतरिक कलह के बाद राजद ने अपनी सभी संगठनात्मक इकाइयाँ भंग कर दीं। सिंगापुर से रोहिणी आचार्य ने इस फैसले का स्वागत करते हुए तेजस्वी यादव से माँग की कि पुनर्गठन में जमीनी व वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को तरजीह मिले — यह राजद के लिए आत्ममंथन का अहम मोड़ है।

मुख्य बातें

राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने 7 अगस्त 2026 को राज्य से पंचायत स्तर तक की सभी संगठनात्मक इकाइयाँ और प्रकोष्ठ भंग किए।
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर इस निर्णय का स्वागत करते हुए तेजस्वी यादव से वरिष्ठ व समर्पित कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की अपील की।
यह फेरबदल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में राजद की हार और पार्टी के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेदों के बाद हुआ।
वरिष्ठ प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी उपचुनाव से पहले BJP में शामिल हो गए थे।
विधायक भाई वीरेंद्र और प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव के बीच सार्वजनिक विवाद ने आंतरिक कलह की अटकलों को बल दिया।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में 7 अगस्त 2026 को संगठनात्मक उथल-पुथल के बीच पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी और सिंगापुर-निवासी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए पार्टी की सभी इकाइयों के विघटन के निर्णय का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव से आग्रह किया कि नई समितियों के गठन में वरिष्ठ नेताओं, समर्पित कार्यकर्ताओं और प्रतिबद्ध समर्थकों को प्राथमिकता दी जाए।

मुख्य घटनाक्रम

गुरुवार, 7 अगस्त को राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने राज्य स्तर से लेकर जिला, ब्लॉक और पंचायत समितियों तक की समस्त संगठनात्मक इकाइयों और सभी पार्टी प्रकोष्ठों को भंग करने की औपचारिक घोषणा की। माना जा रहा है कि यह कदम कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के निर्देश पर उठाया गया है। अब पार्टी नई समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।

रोहिणी आचार्य की अपील

रोहिणी आचार्य ने अपनी पोस्ट में कहा कि सभी संगठनात्मक इकाइयों और प्रकोष्ठों को भंग करने का यह निर्णय बहुत पहले ही ले लिया जाना चाहिए था। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि राजद को केवल संस्थापक लालू प्रसाद यादव द्वारा स्थापित आदर्शों और संगठनात्मक सिद्धांतों का पालन करके ही मज़बूत किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि पुनर्गठित संगठन में उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को अवसर मिलना चाहिए जिन्होंने वर्षों तक निष्ठा और समर्पण के साथ पार्टी की सेवा की है। संगठन की गहरी समझ रखने वाले जमीनी स्तर के नेताओं को शामिल करने पर भी उन्होंने विशेष बल दिया।

पृष्ठभूमि: बांकीपुर हार और आंतरिक कलह

यह संगठनात्मक फेरबदल हाल ही में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में राजद की हार के तुरंत बाद आया है। उस हार के बाद से पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों के संकेत सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे थे। राजद विधायक भाई वीरेंद्र और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव के बीच सार्वजनिक बहस ने आंतरिक कलह की अटकलों को और हवा दी।

गौरतलब है कि उपचुनाव से पहले पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए थे — जो राजद के लिए एक बड़ा झटका माना गया।

आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं पर असर

रोहिणी आचार्य ने याद दिलाया कि लालू प्रसाद यादव ने हमेशा समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए काम किया है और पार्टी कार्यकर्ताओं को सदैव महत्व दिया है। इस पुनर्गठन से उन कार्यकर्ताओं में उम्मीद जगी है जो लंबे समय से पार्टी संगठन में उचित स्थान की प्रतीक्षा कर रहे थे।

आगे क्या होगा

पार्टी द्वारा शीघ्र ही नई समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू किए जाने की उम्मीद है। यह देखना अहम होगा कि तेजस्वी यादव रोहिणी आचार्य की सलाह को किस हद तक अमल में लाते हैं और क्या नई संरचना पार्टी के भीतर व्याप्त असंतोष को शांत कर पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या पुनर्गठन केवल वफादारों की अदला-बदली बनकर रह जाता है। बिहार विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में राजद का यह आत्ममंथन जितना देर से आया है, उतना ही महंगा भी पड़ सकता है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजद की सभी संगठनात्मक इकाइयाँ क्यों भंग की गईं?
राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने 7 अगस्त 2026 को राज्य से पंचायत स्तर तक की सभी इकाइयाँ भंग कीं, जिसे कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के निर्देश पर संगठनात्मक पुनर्गठन का हिस्सा बताया जा रहा है। यह कदम बांकीपुर उपचुनाव में हार और पार्टी के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेदों के बाद उठाया गया।
रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी यादव को क्या सलाह दी?
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर कहा कि नई समितियों में लालू प्रसाद यादव के वरिष्ठ नेताओं, समर्पित कार्यकर्ताओं और प्रतिबद्ध समर्थकों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने जमीनी स्तर के नेताओं को शामिल करने और पार्टी संस्थापक के आदर्शों का पालन करने पर भी जोर दिया।
बांकीपुर उपचुनाव में राजद की हार का पार्टी पर क्या असर पड़ा?
बांकीपुर उपचुनाव में हार के बाद राजद के भीतर आंतरिक मतभेद सार्वजनिक हो गए। विधायक भाई वीरेंद्र और प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव के बीच सार्वजनिक विवाद हुआ, और वरिष्ठ प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी चुनाव से पहले ही BJP में शामिल हो गए।
राजद के पुनर्गठन में आगे क्या होगा?
सभी इकाइयाँ भंग होने के बाद पार्टी शीघ्र ही नई समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। यह प्रक्रिया तेजस्वी यादव की अगुवाई में होगी और इसमें किन नेताओं को स्थान मिलता है, यह पार्टी की भविष्य की दिशा तय करेगा।
क्या रोहिणी आचार्य राजद की सक्रिय नेता हैं?
रोहिणी आचार्य राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी हैं और सिंगापुर में रहती हैं। वे सोशल मीडिया के ज़रिए पार्टी के मामलों पर सक्रिय रूप से टिप्पणी करती हैं और लालू परिवार की राजनीतिक आवाज़ के रूप में उभरी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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