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रेजिनगर उपचुनाव: चुनाव चिह्न विवाद में आरएसपी ने वापस लिया उम्मीदवार, 6 अक्टूबर को मतदान

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रेजिनगर उपचुनाव: चुनाव चिह्न विवाद में आरएसपी ने वापस लिया उम्मीदवार, 6 अक्टूबर को मतदान

सारांश

बंगाल के रेजिनगर उपचुनाव में आरएसपी ने परंपरागत चुनाव चिह्न न मिलने पर मैदान छोड़ने का ऐलान किया — लेकिन नामांकन की समय-सीमा बीत चुकी है, इसलिए यह कदम प्रतीकात्मक ही रहेगा। वाम मोर्चे की अंदरूनी दरार 6 अक्टूबर के मतदान से पहले खुलकर सामने आ गई है।

मुख्य बातें

आरएसपी ने 21 सितंबर 2026 को रेजिनगर विधानसभा उपचुनाव से उम्मीदवार वापस लेने की घोषणा की।
चुनाव आयोग ने परंपरागत चिह्न 'फावड़ा और स्टोकर' के बजाय 'बाल्टी' चुनाव चिह्न आवंटित किया, जो विवाद की वजह बना।
नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 19 सितंबर को बीत चुकी है, इसलिए वापसी केवल प्रतीकात्मक है।
वाम मोर्चे का आधिकारिक उम्मीदवार सीपीआई(एम) के सईद असद अली हैं; आरएसपी के विकास चंद्र मिश्रा का नाम मतपत्र पर बना रहेगा।
रेजिनगर और नंदीग्राम में मतदान 6 अक्टूबर , मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे की घटक पार्टी रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 की रात रेजिनगर विधानसभा उपचुनाव से अपना उम्मीदवार वापस लेने की घोषणा कर दी। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग ने अंतिम क्षण में उसका परंपरागत चुनाव चिह्न बदल दिया, जो उसके लिए अस्वीकार्य था।

विवाद की जड़: चुनाव चिह्न का बदलाव

आरएसपी की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव तपन होरे ने एक आधिकारिक बयान में खुलासा किया कि नामांकन पत्रों की जांच पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने पार्टी को सूचित किया कि उसका पारंपरिक चुनाव चिह्न 'फावड़ा और स्टोकर' आवंटित करना संभव नहीं है। इसके बदले पार्टी को 'बाल्टी' चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने को कहा गया।

होरे ने कहा, 'शनिवार को नामांकन पत्रों की जांच पूरी होने के बाद आयोग ने हमें बताया कि हमारा पारंपरिक चुनाव चिह्न देना संभव नहीं है और हमें 'बाल्टी' चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ना होगा। इसके विरोध में हमने चुनाव से हटने का फैसला किया है।'

वाम मोर्चे में आंतरिक तनाव

गौरतलब है कि रेजिनगर सीट के लिए वाम मोर्चे ने आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) के सईद असद अली को मैदान में उतारा था। इसी निर्णय के विरोध में आरएसपी ने गठबंधन से बगावत करते हुए विकास चंद्र मिश्रा को अपना अलग उम्मीदवार घोषित किया था।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे की एकजुटता पहले से ही सवालों के घेरे में है। आरएसपी का यह कदम गठबंधन के भीतर सीट-बंटवारे और उम्मीदवार-चयन की आंतरिक खींचतान को सार्वजनिक कर देता है।

वापसी प्रतीकात्मक, व्यावहारिक नहीं

आरएसपी नेतृत्व की यह घोषणा व्यावहारिक दृष्टि से केवल प्रतीकात्मक है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 19 सितंबर को पहले ही समाप्त हो चुकी थी, इसलिए उम्मीदवार विकास चंद्र मिश्रा का नाम मतपत्र पर बना रहेगा।

इसका अर्थ यह है कि चुनाव के दिन मतदाताओं के सामने आरएसपी प्रत्याशी का विकल्प उपलब्ध रहेगा, भले ही पार्टी ने औपचारिक रूप से प्रचार से दूरी बना ली हो।

मतदान और मतगणना की तारीखें

रेजिनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होंगे। मतों की गिनती 9 अक्टूबर को निर्धारित है। दोनों सीटें राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जाती हैं और इन पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), वाम मोर्चे और अन्य दलों के बीच कड़ी टक्कर रहती है।

रेजिनगर में आरएसपी की इस अंदरूनी उठापटक का असर वाम वोटों के बिखराव पर पड़ सकता है, जिसका लाभ अंततः सत्तारूढ़ दल को मिल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आरएसपी का पहले ही अलग उम्मीदवार उतारना यह बताता है कि दरार पहले से थी। सबसे महत्त्वपूर्ण यह है कि जब वापसी की तिथि बीत चुकी हो तो उम्मीदवारी छोड़ने का ऐलान महज़ नाटक है — असली सवाल यह है कि इससे वाम वोट बिखरेगा और किसका फायदा होगा।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरएसपी ने रेजिनगर उपचुनाव से क्यों किनारा किया?
आरएसपी ने कहा कि चुनाव आयोग ने उसका परंपरागत चुनाव चिह्न 'फावड़ा और स्टोकर' देने से इनकार कर दिया और उसके बजाय 'बाल्टी' चिह्न आवंटित किया। इसी के विरोध में पार्टी ने उम्मीदवार वापस लेने का ऐलान किया।
क्या आरएसपी का उम्मीदवार वाकई मतदान से हट जाएगा?
नहीं, यह वापसी केवल प्रतीकात्मक है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 19 सितंबर को बीत चुकी है, इसलिए आरएसपी के उम्मीदवार विकास चंद्र मिश्रा का नाम मतपत्र पर बना रहेगा।
रेजिनगर उपचुनाव में वाम मोर्चे का आधिकारिक उम्मीदवार कौन है?
वाम मोर्चे ने रेजिनगर सीट से सीपीआई(एम) के सईद असद अली को आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। आरएसपी ने गठबंधन से अलग होकर विकास चंद्र मिश्रा को उतारा था।
रेजिनगर उपचुनाव की तारीख क्या है?
रेजिनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होगा। मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है।
इस विवाद का वाम मोर्चे पर क्या असर पड़ेगा?
आरएसपी की बगावत से रेजिनगर में वाम वोट बिखर सकते हैं, जिसका सीधा फायदा सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को मिल सकता है। यह घटना बंगाल में वाम घटक दलों के बीच समन्वय की कमज़ोरी को भी उजागर करती है।
राष्ट्र प्रेस
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