रेजिनगर उपचुनाव: चुनाव चिह्न विवाद में आरएसपी ने वापस लिया उम्मीदवार, 6 अक्टूबर को मतदान
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे की घटक पार्टी रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 की रात रेजिनगर विधानसभा उपचुनाव से अपना उम्मीदवार वापस लेने की घोषणा कर दी। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग ने अंतिम क्षण में उसका परंपरागत चुनाव चिह्न बदल दिया, जो उसके लिए अस्वीकार्य था।
विवाद की जड़: चुनाव चिह्न का बदलाव
आरएसपी की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव तपन होरे ने एक आधिकारिक बयान में खुलासा किया कि नामांकन पत्रों की जांच पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने पार्टी को सूचित किया कि उसका पारंपरिक चुनाव चिह्न 'फावड़ा और स्टोकर' आवंटित करना संभव नहीं है। इसके बदले पार्टी को 'बाल्टी' चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने को कहा गया।
होरे ने कहा, 'शनिवार को नामांकन पत्रों की जांच पूरी होने के बाद आयोग ने हमें बताया कि हमारा पारंपरिक चुनाव चिह्न देना संभव नहीं है और हमें 'बाल्टी' चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ना होगा। इसके विरोध में हमने चुनाव से हटने का फैसला किया है।'
वाम मोर्चे में आंतरिक तनाव
गौरतलब है कि रेजिनगर सीट के लिए वाम मोर्चे ने आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) के सईद असद अली को मैदान में उतारा था। इसी निर्णय के विरोध में आरएसपी ने गठबंधन से बगावत करते हुए विकास चंद्र मिश्रा को अपना अलग उम्मीदवार घोषित किया था।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे की एकजुटता पहले से ही सवालों के घेरे में है। आरएसपी का यह कदम गठबंधन के भीतर सीट-बंटवारे और उम्मीदवार-चयन की आंतरिक खींचतान को सार्वजनिक कर देता है।
वापसी प्रतीकात्मक, व्यावहारिक नहीं
आरएसपी नेतृत्व की यह घोषणा व्यावहारिक दृष्टि से केवल प्रतीकात्मक है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 19 सितंबर को पहले ही समाप्त हो चुकी थी, इसलिए उम्मीदवार विकास चंद्र मिश्रा का नाम मतपत्र पर बना रहेगा।
इसका अर्थ यह है कि चुनाव के दिन मतदाताओं के सामने आरएसपी प्रत्याशी का विकल्प उपलब्ध रहेगा, भले ही पार्टी ने औपचारिक रूप से प्रचार से दूरी बना ली हो।
मतदान और मतगणना की तारीखें
रेजिनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होंगे। मतों की गिनती 9 अक्टूबर को निर्धारित है। दोनों सीटें राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जाती हैं और इन पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), वाम मोर्चे और अन्य दलों के बीच कड़ी टक्कर रहती है।
रेजिनगर में आरएसपी की इस अंदरूनी उठापटक का असर वाम वोटों के बिखराव पर पड़ सकता है, जिसका लाभ अंततः सत्तारूढ़ दल को मिल सकता है।