कारगिल विजय दिवस से पहले आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने जम्मू के बलिदान स्तंभ पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने 24 जुलाई 2026 को जम्मू स्थित बलिदान स्तंभ पर पहुँचकर कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। 26 जुलाई को मनाए जाने वाले कारगिल विजय दिवस से ठीक पहले आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, शहीदों के त्याग, युवाओं की जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण पर अपने विचार रखे।
शहीदों को नमन और बलिदान स्तंभ की महत्ता
इंद्रेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच (एफएएनएस) प्रतिवर्ष कारगिल विजय दिवस पर उन सभी शहीदों को याद करता है जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि चाहे आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष हो या अन्य संकट — नागरिकों, पुलिसकर्मियों और सैनिकों का बलिदान पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
उन्होंने बलिदान स्तंभ के निर्माण के लिए सेना, सरकार और प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे स्थल देशवासियों को शहीदों के त्याग और समर्पण की निरंतर याद दिलाते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि 26 जुलाई को अधिक से अधिक संख्या में बलिदान स्तंभ पर आएँ और तिरंगा लेकर शहीदों को नमन करें।
कारगिल युद्ध और पाकिस्तान की साजिश
इंद्रेश कुमार ने कारगिल युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने सुनियोजित साजिश के तहत कारगिल क्षेत्र में भारत पर हमला किया था, किंतु भारतीय सेना, सरकार और देशवासियों ने एकजुट होकर इसका मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने स्मरण कराया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 26 जुलाई को आधिकारिक रूप से कारगिल विजय दिवस घोषित किया था, और तब से यह दिन राष्ट्रीय गर्व एवं सम्मान के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य सफलता की स्मृति नहीं है — यह देशभक्ति, साहस और बलिदान का जीवंत प्रतीक है। उनके शब्दों में, गाँवों, खेत-खलिहानों और शहरों तक यह संदेश पहुँचना चाहिए कि 'देश के लिए दिया गया कोई भी बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता।'
युवाओं से आह्वान और राष्ट्र निर्माण
इंद्रेश कुमार ने युवाओं से आग्रह किया कि वे शहीदों की गाथाओं से प्रेरणा लेकर देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएँ। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक विरोध या नकारात्मक गतिविधियों में ऊर्जा खपाने के बजाय युवाओं को रचनात्मक सोच के साथ राष्ट्र निर्माण के कार्यों में भागीदारी करनी चाहिए।
उन्होंने तिरंगे को देश की आन, बान और शान बताते हुए कहा कि यह पूरे राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोता है और विश्व को भारत की शक्ति का संदेश देता है। 'सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा', 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' जैसे भावों को देशवासियों के हृदय में सदा जीवित रहना चाहिए — यह उनका आह्वान था।
सोनम वांगचुक और राजनीतिक टिप्पणी
इंद्रेश कुमार ने एक राजनीतिक दल के नाम को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि किसी भी संगठन का नाम उसकी सोच और उद्देश्य को दर्शाता है। सोनम वांगचुक से जुड़े आंदोलन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि युवाओं और नेताओं को यह समझना होगा कि देशहित सर्वोपरि है, और कुछ लोग गलत प्रभावों में आकर ऐसे रास्तों पर चले जाते हैं जो देश व समाज के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।
भारत को विश्व गुरु बनाने का संकल्प
इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत आज विकास, शिक्षा और प्रगति के पथ पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और विश्व के अनेक देशों ने उसे सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि विकास, शिक्षा, गरीबी, भुखमरी, छुआछूत, प्रदूषण और हिंसा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रत्येक नागरिक का सकारात्मक योगदान आवश्यक है। भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने की दिशा में हर हाथ का सहयोग अपेक्षित है — यही उनका अंतिम संदेश था।