सबरीमाला सोने की चोरी के मामले में दो नए आरोपियों को मिली जमानत

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सबरीमाला सोने की चोरी के मामले में दो नए आरोपियों को मिली जमानत

सारांश

कोल्लम की निचली अदालत ने सबरीमाला सोना चोरी मामले में दो आरोपियों, पंकज भंडारी और गोवर्धन, को जमानत दी है। यह निर्णय अभियोजन पक्ष की ओर से समय पर आरोपपत्र दाखिल न करने के कारण लिया गया।

Key Takeaways

  • सबरीमाला सोना चोरी मामले में दो और आरोपियों को जमानत मिली।
  • जमानत का कारण अभियोजन पक्ष की देरी है।
  • कुल जमानत प्राप्त करने वाले आरोपियों की संख्या दस हो गई है।
  • जांच की प्रक्रिया में खामियों पर सवाल उठ रहे हैं।
  • गोवर्धन का कहना है कि उन्हें किसी धोखाधड़ी की जानकारी नहीं थी।

कोल्लम, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सबरीमाला सोना चोरी मामले में गुरुवार को कोल्लम की निचली अदालत ने दो और आरोपियों, पंकज भंडारी और गोवर्धन, को जमानत दी।

अभियोजन पक्ष द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोपपत्र दाखिल न कर पाने के कारण उन्हें वैधानिक जमानत दी गई।

कोल्लम सतर्कता न्यायालय ने उनकी रिहाई की अनुमति देते हुए कहा कि अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने में कोई प्रगति न होने के बावजूद अनिवार्य 90 दिन की रिमांड अवधि समाप्त हो गई थी।

इस मामले में जमानत पाने वाले आरोपियों की कुल संख्या अब दस हो गई है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि इनमें से आठ लोगों को कानूनी आधार पर रिहा किया गया है, जो प्रक्रियागत खामियों को उजागर करता है। इन खामियों के कारण मंदिर के सोने की कथित हेराफेरी से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल मामले में अभियोजन पक्ष की कार्यवाही धीमी रही है।

कर्नाटक के बेल्लारी निवासी आभूषण व्यापारी गोवर्धन ने केरल उच्च न्यायालय द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था।

हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने उस समय हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। गोवर्धन ने अपनी याचिका में कहा था कि वे भगवान अय्यप्पा के परम भक्त हैं और इस चोरी में उनकी कोई संलिप्तता नहीं है।

उन्हें चोरी का सोना खरीदने के आरोप में विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा गिरफ्तार किया गया था।

जांचकर्ताओं को दिए अपने बयान में, गोवर्धन ने स्वीकार किया कि उसने मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को कई किस्तों में 1.5 करोड़ रुपए का भुगतान किया था।

उसने दावा किया कि यह भुगतान सबरीमाला से संबंधित कार्यों के लिए किया गया था और उसे किसी भी धोखाधड़ी के इरादे की जानकारी नहीं थी।

उसने वित्तीय लेन-देन को प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज भी प्रस्तुत किए और कहा कि सोने की खरीद सद्भावना से और व्यक्तिगत जान-पहचान के कारण की गई थी।

हालांकि, एसआईटी ने इससे विपरीत रुख अपनाते हुए कहा कि गोवर्धन को पूरी तरह से पता था कि सोना सबरीमाला मंदिर का था और देवस्वम की संपत्ति थी।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर धन के गबन में सहायता की, जिससे धोखाधड़ी को बढ़ावा मिला।

भंडारी चेन्नई स्थित स्मार्ट क्रिएशन्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं, जिन पर सबरीमाला मंदिर से सोने के गबन का आरोप है।

आरोपपत्र दाखिल करने में देरी से अब जांच की गति और प्रभावशीलता पर व्यापक सवाल उठ रहे हैं।

Point of View

अभियोजन पक्ष की कार्यवाही में देरी से जांच की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं। यह सभी की जिम्मेदारी है कि न्याय की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
NationPress
20/03/2026

Frequently Asked Questions

सबरीमाला सोना चोरी मामला क्या है?
यह मामला सबरीमाला मंदिर के सोने की चोरी से संबंधित है, जिसमें कई आरोपी शामिल हैं।
पंकज भंडारी और गोवर्धन को कब जमानत मिली?
उन्हें 19 मार्च को कोल्लम की निचली अदालत से जमानत मिली।
जमानत मिलने का मुख्य कारण क्या था?
अभियोजन पक्ष द्वारा समय पर आरोपपत्र दाखिल न करने के कारण उन्हें जमानत दी गई।
इस मामले में कुल कितने आरोपियों को जमानत मिली है?
इस मामले में जमानत पाने वाले आरोपियों की कुल संख्या अब दस हो गई है।
क्या गोवर्धन ने चोरी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की थी?
गोवर्धन ने कहा कि वे चोरी में संलिप्त नहीं हैं और यह भुगतान सद्भावना से किया गया था।
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