नवरात्रि विशेष: माँ शाकुम्भरी देवी का अद्भुत धाम, जहाँ गिरा माँ सती का शीश

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नवरात्रि विशेष: माँ शाकुम्भरी देवी का अद्भुत धाम, जहाँ गिरा माँ सती का शीश

सारांश

नवरात्रि का पर्व 19 मार्च से आरंभ हो रहा है। सहारनपुर में स्थित माँ शाकुम्भरी देवी का मंदिर अन्न की देवी के रूप में पूजित है। यहाँ माँ सती का शीश गिरा था, और यह स्थान भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है।

Key Takeaways

  • सहारनपुर में माँ शाकुम्भरी देवी का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है।
  • नवरात्रि का पर्व 19 मार्च से आरंभ हो रहा है।
  • यहाँ माँ सती का शीश गिरा था, जो भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है।
  • मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ है।
  • यहाँ आने वाले भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

सहारनपुर, १७ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नौ दिनों तक चलने वाला देवी आराधना का पर्व नवरात्रि १९ मार्च से आरंभ हो रहा है। इस दौरान भारतभर में श्रद्धालु माँ के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं। देश और विदेश में माता के कई मंदिर हैं, जो भक्ति-शक्ति के साथ अद्भुत कथाएँ सुनाते हैं। एक ऐसा ही दिव्य धाम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित है, जो ५१ शक्तिपीठों में से एक है।

सहारनपुर में माँ शाकुम्भरी देवी का मंदिर है। यहाँ माँ सती का शीश गिरा था, और वह अन्न की देवी के रूप में भक्तों का कल्याण करती हैं। यह मंदिर शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में बेहट तहसील के जसमौर गांव के निकट स्थित है। यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ है। भक्तों का विश्वास है कि माँ शाकुम्भरी स्वयं उनकी रक्षा करती हैं और पूर्ण श्रद्धा से दर्शन करने वाले की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, यह आस्था का धाम है, जहाँ माँ स्वयं भक्तों की रक्षा करती हैं। माँ शाकुम्भरी देवी मंदिर शक्ति, भक्ति और माँ की करुणा का अलौकिक स्थान है।

मान्यताओं के अनुसार, माँ ने कठिन समय में सृष्टि का पालन कर जगत को जीवन प्रदान किया था, इसलिए यहाँ आने वाला हर भक्त पूर्ण विश्वास और गहरी श्रद्धा के साथ माँ के चरणों में नमन करता है। प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से घिरा यह स्थान मन को शांति, आस्था और नई शक्ति से भर देता है।

धार्मिक कथा के अनुसार, जब दानव शुंभ-निशुंभ, महिषासुर और रक्तबीज ने देवताओं पर आक्रमण किया, तो देवता छिपते-छिपते शिवालिक पहाड़ियों पर पहुँच गए। नारद मुनि के सुझाव पर देवताओं ने माँ से सहायता मांगी। इसी दौरान भूरादेव अपने पाँच साथियों के साथ माँ की शरण में आए और युद्ध में शामिल होने की आज्ञा मांगी। माँ ने वरदान दिया और युद्ध आरंभ हुआ। रक्तबीज नामक राक्षस का विशेष गुण था कि उसकी खून की एक बूंद जमीन पर गिरने से नया राक्षस उत्पन्न हो जाता था। माँ ने विकराल रूप धारण किया और चक्र से राक्षसों का संहार किया।

माँ काली ने खप्पर से रक्तबीज का सिर काटकर उसका रक्त पी लिया, जिससे नए राक्षस उत्पन्न नहीं हो सके। युद्ध के अंत में शुंभ-निशुंभ ने भूरादेव पर बाण चलाए और वे गिर पड़े। युद्ध समाप्त होने पर माँ ने भूरादेव को जीवित किया और वरदान मांगने को कहा। भूरादेव ने माँ के चरणों की सेवा मांगी। माँ ने वरदान दिया कि जो भी मेरे दर्शन करेगा, उसे पहले भूरादेव के दर्शन करने होंगे, तभी यात्रा पूरी होगी। इसलिए मंदिर में सबसे पहले भूरादेव के दर्शन होते हैं।

भूरादेव का मंदिर मुख्य मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूर है। मंदिर के पास एक बरसाती नदी का रास्ता है, जो सूखा रहता है और केवल बारिश में पानी से भरता है। नवरात्रि के दौरान यहाँ विशाल मेला लगता है। श्रद्धालु दर्शन के लिए बड़ी संख्या में यहाँ पहुँचते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, शाकुम्भरी देवी का नाम दुर्गमासुर वध से जुड़ा है। जब दुर्गमासुर ने वेदों पर कब्जा कर अकाल फैलाया, तो देवी ने अपने नेत्रों से जल बहाया। उस जल से धाराएं निकलीं और वनस्पतियां हरी-भरी हो गईं। सौ नेत्रों से दया की दृष्टि डालने के कारण उन्हें शताक्षी कहा गया। अकाल में उन्होंने अपने शरीर से शाक-सब्जियां उत्पन्न कर पृथ्वी का पालन किया, इसलिए उनका नाम शाकुम्भरी पड़ा। मंदिर में मुख्य प्रतिमा के दाईं ओर भीमा और भ्रामरी तथा बाईं ओर शताक्षी या शीतला देवी विराजमान हैं।

मान्यता है कि शाकुम्भरी देवी की उपासना करने वाले घरों में हमेशा अन्न और शाक से भंडार भरा रहता है। यह धाम अन्नपूर्णा के रूप में भी पूजा जाता है।

यहाँ पहुँचने के लिए सहारनपुर रेलवे स्टेशन या बेहट बस स्टैंड से बस या निजी वाहन से जा सकते हैं। हवाई यात्रा के लिए नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून या दिल्ली है।

Point of View

यह कहना उचित है कि माँ शाकुम्भरी देवी का मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सांस्कृतिक धरोहर का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ आने वाले भक्तों की श्रद्धा और विश्वास इस स्थान की महत्ता को और बढ़ाते हैं।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

माँ शाकुम्भरी का मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित है।
नवरात्रि कब से शुरू हो रहा है?
नवरात्रि का पर्व 19 मार्च से शुरू हो रहा है।
इस मंदिर की विशेषता क्या है?
यहाँ माँ सती का शीश गिरा था और इसे अन्न की देवी के रूप में पूजा जाता है।
इस धाम तक कैसे पहुँचा जा सकता है?
सहारनपुर रेलवे स्टेशन या बेहट बस स्टैंड से बस या निजी वाहन द्वारा पहुँच सकते हैं।
यहाँ मेला कब लगता है?
नवरात्रि के दौरान यहाँ विशाल मेला लगता है।
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