क्या साल 2026 संभावनाओं का वर्ष है? बदलाव की आहट, दुबई से मियामी तक वैश्विक शिखर सम्मेलनों से आकार लेगा भविष्य
सारांश
Key Takeaways
- 2026 में कई महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलन होंगे।
- सम्मेलन वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालेंगे।
- पर्यावरणीय मुद्दों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
- ये सम्मेलन देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देंगे।
- 2026 संभावनाओं का वर्ष होगा।
नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 2026 को दुनिया एक ऐसे समय के रूप में देख रही है जब वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था, तकनीक और पर्यावरण से जुड़े निर्णय एक-दूसरे से गहराई से जुड़े दिखाई देंगे। नए वर्ष के पहले दिन, विश्व के सभी नेता अपने संदेशों में वैश्विक शांति, सम्मान और साझेदारी की बात कर रहे हैं। इस वर्ष कई महत्वपूर्ण बैठकें और सम्मेलन होने वाले हैं, जिन पर सबकी नजरें होंगी। कुछ प्रमुख सम्मेलनों पर ध्यान देना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये उज्जवल भविष्य का वादा करते हैं।
पहला प्रमुख शिखर सम्मेलन 3-5 फरवरी के बीच दुबई में प्रस्तावित है, जहां 'वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट 2026' में दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री और नीति-निर्माता भविष्य की सरकारों, डिजिटल गवर्नेंस और वैश्विक सहयोग पर चर्चा करेंगे। यह सम्मेलन यह संकेत करता है कि 2026 केवल प्रतिक्रियाओं का नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतियों का वर्ष बनने जा रहा है।
इसी क्रम में 19-20 फरवरी को नई दिल्ली में होने वाला 'एआई इंपैक्ट समिट' दुनिया का ध्यान कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ओर खींचेगा। यहां यह प्रश्न उठेगा कि एआई मानव जीवन, रोजगार, सुरक्षा और शासन को किस प्रकार बदल सकता है। इसके तुरंत बाद (25-27 फरवरी) दिल्ली में ही 'वर्ल्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट 2026' का उद्देश्य हरित विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के वर्ष के रूप में स्थापित करना है, जहां ऊर्जा, जलवायु और विकास के संतुलन पर वैश्विक सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।
जून में फ्रांस के ऐवियन-ले-बेंस में जी7 शिखर सम्मेलन होगा, जहां दुनिया की सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक मंदी, ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास करेंगी। यह सम्मेलन 2026 को आर्थिक दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। यह 14 से 17 जून तक आयोजित होगा।
इसके बाद 7-8 जुलाई को अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन सुरक्षा और सामरिक संतुलन के मुद्दों को सामने लाएगा। यूक्रेन युद्ध के बाद बदले वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में यह बैठक इस बात का संकेत होगी कि 2026 सैन्य और कूटनीतिक संतुलन के लिए भी एक महत्वपूर्ण वर्ष है।
नवंबर में तुर्की में प्रस्तावित सीओपी31 जलवायु सम्मेलन 2026 को पर्यावरणीय फैसलों का वर्ष बना देता है। 9-20 नवंबर तक होने वाले इस सम्मेलन में यह तय करने की कोशिश की जाएगी कि वैश्विक तापमान को नियंत्रित करने के लिए देश कितनी गंभीरता से ठोस कदम उठाने को तैयार हैं। यह सम्मेलन आने वाले दशकों की जलवायु नीति की नींव रख सकता है।
वर्ष का समापन दिसंबर (14-15) में अमेरिका के मियामी में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन से होगा, जहां विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं एक साथ बैठकर वैश्विक आर्थिक असमानता, कर्ज संकट और विकास के नए मॉडल पर चर्चा करेंगी। यह बैठक 2026 को एक ऐसे वर्ष के रूप में यादगार बना सकती है, जिसमें दुनिया ने साझा समाधान खोजने की दिशा में गंभीर प्रयास किए।
इन सभी बड़े शिखर सम्मेलनों को क्रम से देखें तो यह स्पष्ट है कि 2026 केवल बैठकों और घोषणाओं का वर्ष नहीं है, बल्कि संभावनाओं का वर्ष है, जहां दुनिया यह तय करने का प्रयास करेगी कि भविष्य टकराव का होगा या सहयोग का, संकट का होगा या समाधान का।