समस्तीपुर में ग्राम प्रधान ₹1.2 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, सतर्कता ब्यूरो की कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के समस्तीपुर जिले में सतर्कता जांच ब्यूरो ने बुधवार, 10 जून 2026 को एक ग्राम प्रधान को ₹1.2 लाख रुपए की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी की पहचान दलसिंहसराय थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत राज चकबहाउद्दीन के मुखिया सियाराम राय के रूप में हुई है, जो एक साथ पंचायत सचिव का पदभार भी संभाल रहे थे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला चकबहाउद्दीन गांव के निवासी मोहम्मद अजीम के पुत्र अब्दुल मन्नान की शिकायत से शुरू हुआ। मन्नान ने सतर्कता जांच ब्यूरो के पटना कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया कि मुखिया सियाराम राय ने उनकी सेवा संबंधी पद की बहाली — अर्थात निलंबन रद्द कराने — में सहायता के बदले मोटी रिश्वत की मांग की थी।
गौरतलब है कि एक ही व्यक्ति का मुखिया और पंचायत सचिव दोनों पदों पर काबिज होना प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज़ से गंभीर सवाल खड़े करता है, जिस पर अब जांच एजेंसी की नज़र है।
जांच और ट्रैप ऑपरेशन
शिकायत मिलने के बाद सतर्कता जांच ब्यूरो ने एक गोपनीय सत्यापन प्रक्रिया शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान कथित तौर पर डिजिटल और मौखिक साक्ष्य एकत्र किए गए जो रिश्वत की मांग को पुष्ट करते थे। आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर ब्यूरो ने 9 जून 2026 को पटना के सतर्कता पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की।
इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) अमरेंद्र प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल गठित किया गया। बुधवार को दलसिंहसराय के गुडरीपुल के निकट शिकायतकर्ता की कॉस्मेटिक्स की दुकान पर जाल बिछाया गया। सादे कपड़ों में तैनात सतर्कता कर्मियों ने इलाके को घेर लिया और जैसे ही सियाराम राय ने कथित तौर पर रिश्वत की पहली किस्त के रूप में ₹1.20 लाख नकद स्वीकार किए, उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पटना लाया गया। सतर्कता जांच ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि विभाग के मुख्यालय में सियाराम राय से गहन पूछताछ जारी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित भ्रष्टाचार नेटवर्क में अन्य व्यक्ति भी शामिल थे या नहीं।
कानूनी औपचारिकताएं और पूछताछ प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को मुजफ्फरपुर की विशेष सतर्कता अदालत में पेश किया जाएगा। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मामले में आगे की जांच और विभागीय कार्रवाई जारी है।
प्रशासनिक और पंचायत हलकों में हलचल
इस गिरफ्तारी ने समस्तीपुर के प्रशासनिक और पंचायत हलकों में गहन चर्चा को जन्म दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार सरकार पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार विरोधी अभियान तेज़ कर रही है। आलोचकों का कहना है कि एक ही व्यक्ति का दोहरे प्रशासनिक पदों पर काबिज होना निगरानी की कमज़ोरी को उजागर करता है।
आगे क्या होगा
सतर्कता जांच ब्यूरो के अनुसार, मामले की विभागीय जांच भी समानांतर रूप से चलाई जाएगी। विशेष सतर्कता अदालत में पेशी के बाद न्यायिक प्रक्रिया की दिशा स्पष्ट होगी। जांच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या पंचायत के अन्य मामलों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुई हैं।