2 अगस्त 2026
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समस्तीपुर में ग्राम प्रधान ₹1.2 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, सतर्कता ब्यूरो की कार्रवाई

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समस्तीपुर में ग्राम प्रधान ₹1.2 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, सतर्कता ब्यूरो की कार्रवाई

सारांश

बिहार में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत सतर्कता जांच ब्यूरो ने समस्तीपुर के ग्राम प्रधान सियाराम राय को ₹1.2 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा। मुखिया पर आरोप है कि उन्होंने एक कर्मचारी का निलंबन रद्द कराने के बदले नकदी मांगी थी।

मुख्य बातें

सतर्कता जांच ब्यूरो ने 10 जून 2026 को समस्तीपुर के ग्राम प्रधान सियाराम राय को ₹1.2 लाख रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।
आरोपी ने शिकायतकर्ता अब्दुल मन्नान का निलंबन रद्द कराने के बदले रिश्वत मांगी थी।
डीएसपी अमरेंद्र प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में दलसिंहसराय के गुडरीपुल के पास ट्रैप ऑपरेशन चलाया गया।
एफआईआर 9 जून 2026 को पटना के सतर्कता पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई।
आरोपी को मुजफ्फरपुर की विशेष सतर्कता अदालत में पेश किया जाएगा; जांच जारी है।

बिहार के समस्तीपुर जिले में सतर्कता जांच ब्यूरो ने बुधवार, 10 जून 2026 को एक ग्राम प्रधान को ₹1.2 लाख रुपए की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी की पहचान दलसिंहसराय थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत राज चकबहाउद्दीन के मुखिया सियाराम राय के रूप में हुई है, जो एक साथ पंचायत सचिव का पदभार भी संभाल रहे थे।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला चकबहाउद्दीन गांव के निवासी मोहम्मद अजीम के पुत्र अब्दुल मन्नान की शिकायत से शुरू हुआ। मन्नान ने सतर्कता जांच ब्यूरो के पटना कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया कि मुखिया सियाराम राय ने उनकी सेवा संबंधी पद की बहाली — अर्थात निलंबन रद्द कराने — में सहायता के बदले मोटी रिश्वत की मांग की थी।

गौरतलब है कि एक ही व्यक्ति का मुखिया और पंचायत सचिव दोनों पदों पर काबिज होना प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज़ से गंभीर सवाल खड़े करता है, जिस पर अब जांच एजेंसी की नज़र है।

जांच और ट्रैप ऑपरेशन

शिकायत मिलने के बाद सतर्कता जांच ब्यूरो ने एक गोपनीय सत्यापन प्रक्रिया शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान कथित तौर पर डिजिटल और मौखिक साक्ष्य एकत्र किए गए जो रिश्वत की मांग को पुष्ट करते थे। आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर ब्यूरो ने 9 जून 2026 को पटना के सतर्कता पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की।

इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) अमरेंद्र प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल गठित किया गया। बुधवार को दलसिंहसराय के गुडरीपुल के निकट शिकायतकर्ता की कॉस्मेटिक्स की दुकान पर जाल बिछाया गया। सादे कपड़ों में तैनात सतर्कता कर्मियों ने इलाके को घेर लिया और जैसे ही सियाराम राय ने कथित तौर पर रिश्वत की पहली किस्त के रूप में ₹1.20 लाख नकद स्वीकार किए, उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी के बाद की कार्रवाई

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पटना लाया गया। सतर्कता जांच ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि विभाग के मुख्यालय में सियाराम राय से गहन पूछताछ जारी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित भ्रष्टाचार नेटवर्क में अन्य व्यक्ति भी शामिल थे या नहीं।

कानूनी औपचारिकताएं और पूछताछ प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को मुजफ्फरपुर की विशेष सतर्कता अदालत में पेश किया जाएगा। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मामले में आगे की जांच और विभागीय कार्रवाई जारी है।

प्रशासनिक और पंचायत हलकों में हलचल

इस गिरफ्तारी ने समस्तीपुर के प्रशासनिक और पंचायत हलकों में गहन चर्चा को जन्म दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार सरकार पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार विरोधी अभियान तेज़ कर रही है। आलोचकों का कहना है कि एक ही व्यक्ति का दोहरे प्रशासनिक पदों पर काबिज होना निगरानी की कमज़ोरी को उजागर करता है।

आगे क्या होगा

सतर्कता जांच ब्यूरो के अनुसार, मामले की विभागीय जांच भी समानांतर रूप से चलाई जाएगी। विशेष सतर्कता अदालत में पेशी के बाद न्यायिक प्रक्रिया की दिशा स्पष्ट होगी। जांच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या पंचायत के अन्य मामलों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे निगरानी और जवाबदेही का तंत्र कमज़ोर पड़ जाता है। सतर्कता ब्यूरो की सक्रियता सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसे दोहरे पदभार की अनुमति कैसे दी गई। बिहार में पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार की यह कोई पहली घटना नहीं है — जब तक प्रणालीगत सुधार नहीं होते, ट्रैप ऑपरेशन लक्षण का इलाज करते रहेंगे, बीमारी का नहीं।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समस्तीपुर में किस ग्राम प्रधान को गिरफ्तार किया गया और क्यों?
राज चकबहाउद्दीन ग्राम पंचायत के मुखिया सियाराम राय को 10 जून 2026 को सतर्कता जांच ब्यूरो ने ₹1.2 लाख रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता अब्दुल मन्नान का निलंबन रद्द कराने के बदले यह रकम मांगी थी।
सतर्कता जांच ब्यूरो ने यह कार्रवाई कैसे की?
अब्दुल मन्नान की लिखित शिकायत के बाद ब्यूरो ने गोपनीय सत्यापन किया और 9 जून 2026 को एफआईआर दर्ज की। डीएसपी अमरेंद्र प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में दलसिंहसराय के गुडरीपुल के पास ट्रैप ऑपरेशन चलाया गया, जहाँ सादे कपड़ों में तैनात टीम ने रिश्वत स्वीकार करते ही आरोपी को दबोच लिया।
आरोपी सियाराम राय को आगे कहाँ पेश किया जाएगा?
कानूनी औपचारिकताएं और पूछताछ पूरी होने के बाद सियाराम राय को मुजफ्फरपुर की विशेष सतर्कता अदालत में पेश किया जाएगा। फिलहाल उनसे पटना में सतर्कता ब्यूरो मुख्यालय में पूछताछ जारी है।
क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं?
सतर्कता जांच ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, यह पता लगाने के लिए गहन पूछताछ चल रही है कि कथित भ्रष्टाचार नेटवर्क में अन्य व्यक्ति भी शामिल थे या नहीं। मामले में आगे की जांच और विभागीय कार्रवाई जारी है।
सियाराम राय एक साथ मुखिया और पंचायत सचिव कैसे थे?
अधिकारियों के अनुसार सियाराम राय ग्राम पंचायत राज चकबहाउद्दीन के मुखिया होने के साथ-साथ पंचायत सचिव का पदभार भी संभाल रहे थे। इस दोहरी भूमिका ने प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं, जिसकी जांच एजेंसी अब पड़ताल कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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