संभल शाही जामा मस्जिद का मुख्य द्वार गिरने की कगार पर, कमेटी ने ASI को लिखा आपातकालीन पत्र
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के संभल स्थित ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद का मुख्य प्रवेश द्वार अत्यंत जर्जर अवस्था में पहुँच गया है और कभी भी ढह सकता है — यह चेतावनी मस्जिद की प्रबंधन कमेटी ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को दी है। कमेटी ने 16 मई 2026 को मेरठ स्थित पुरातत्व विभाग के कार्यालय को रजिस्ट्री पत्र भेजकर तत्काल मरम्मत की माँग की, परंतु अब तक विभाग की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
मुख्य घटनाक्रम
शाही जामा मस्जिद कमेटी के प्रमुख जफर अली ने बताया कि मस्जिद का मुख्य द्वार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है और उसके गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है। उन्होंने कहा, 'मुख्य द्वार पूरी तरह जर्जर हो चुका है — यदि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।' इसके अतिरिक्त, मस्जिद परिसर से सटी एक दीवार पहले ही बंदरों द्वारा क्षतिग्रस्त होकर गिर चुकी है, जिससे परिसर की समग्र सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हो गई हैं।
ASI की जिम्मेदारी और कमेटी की दलील
कमेटी प्रमुख जफर अली ने स्पष्ट किया कि शाही जामा मस्जिद ASI के अधीन एक संरक्षित स्मारक है, अतः इसकी देखरेख, रख-रखाव और मरम्मत की संपूर्ण जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है। उन्होंने कहा कि कमेटी ने समय पर विभाग को लिखित रूप से सूचित किया, किंतु अब तक न कोई जवाब आया और न ही कोई कार्रवाई हुई।
हादसे की आशंका और कमेटी की चेतावनी
कमेटी ने ASI को स्पष्ट शब्दों में आगाह किया है कि यदि भविष्य में मुख्य द्वार या क्षतिग्रस्त दीवार के कारण कोई दुर्घटना होती है और जानमाल का नुकसान होता है, तो उसकी पूरी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी ASI की होगी। कमेटी ने गिरी हुई दीवार और मुख्य द्वार — दोनों की शीघ्र मरम्मत की माँग दोहराई है।
ऐतिहासिक महत्व और संदर्भ
गौरतलब है कि संभल की शाही जामा मस्जिद एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है जो ASI की संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में ASI-संरक्षित स्मारकों की रख-रखाव व्यवस्था और उनके जीर्णोद्धार को लेकर सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षित स्मारकों में समय पर निवारक रख-रखाव न होने से बड़े संरचनात्मक नुकसान का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
आगे क्या होगा
कमेटी के पत्र के बाद अब यह देखना होगा कि ASI का मेरठ कार्यालय इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है। यदि विभाग शीघ्र हस्तक्षेप नहीं करता, तो कमेटी उच्च अधिकारियों और अदालत का दरवाज़ा खटखटाने पर विचार कर सकती है।