शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का रामभद्राचार्य पर पलटवार: 'एक मस्जिद खोई, दूसरी-तीसरी नहीं खोएंगे'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 17 जून 2026 को बरेली में कथावाचक रामभद्राचार्य के मथुरा, काशी और संभल संबंधी बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुसलमानों ने बाबरी मस्जिद के रूप में एक मस्जिद खोई है, लेकिन अब दूसरी और तीसरी मस्जिद खोना स्वीकार नहीं होगा।
रामभद्राचार्य के बयान पर प्रतिक्रिया
मौलाना बरेलवी ने कहा कि कथावाचक रामभद्राचार्य का यह कहना कि 'हम मथुरा, काशी और संभल लेकर रहेंगे' — महज एक ख्वाब और ख्याल है। उनके अनुसार, 'ख्वाब-ख्याल जमीन पर नहीं उतरते।' उन्होंने कहा, 'भारत के मुसलमानों ने सीने पर पत्थर रखकर बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि के हवाले कर दी। हमने एक मस्जिद को खोया है, अब दूसरी और तीसरी नहीं खो सकते।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब धार्मिक स्थलों को लेकर देश में बहस तेज़ है।
सिद्धार्थनगर वायरल वीडियो पर आपत्ति
एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए मौलाना बरेलवी ने कहा कि सिद्धार्थनगर में एक मुसलमान को भंडारे का खाना देने से पहले 'जय श्रीराम' के नारे लगवाए गए। उन्होंने इसे भाईचारे और कौमी एकता के विरुद्ध बताया। उनके अनुसार, 'यह नफरत को बढ़ावा देना है और मोहब्बत के पैमाने को तोड़ना है।' मौलाना ने कहा कि इस तरह के आयोजन मुसलमानों को जलील करने और रुसवा करने की कोशिश हैं, और ऐसी सोच फिरकापरस्ती और सांप्रदायिकता को बढ़ावा देती है। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे इस तरह के आयोजनों में शामिल न हों।
अन्नामलाई के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया
तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व नेता के. अन्नामलाई द्वारा उत्तर भारतीय प्रवासियों पर दिए गए बयान पर भी मौलाना बरेलवी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अपराध, अपराध होता है — चाहे वह तमिलनाडु में हो या उत्तर प्रदेश-बिहार में। उनके अनुसार, 'जो अपराधी है, चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, उसे अपराधी की श्रेणी में रखा जाना चाहिए और कानून के अनुसार सज़ा मिलनी चाहिए।' मौलाना ने आरोप लगाया कि अन्नामलाई उत्तर भारतीयों को टारगेट करके यूपी, बिहार और बंगाल के लोगों को अपराधी साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो उत्तर भारतीयों का अपमान है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि बाबरी मस्जिद विवाद के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद से धार्मिक स्थलों को लेकर देश में बयानबाज़ी का दौर जारी है। मौलाना बरेलवी का यह बयान मुस्लिम समुदाय की उस व्यापक चिंता को सामने रखता है जो धार्मिक स्थलों पर भविष्य के दावों को लेकर बनी हुई है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान — चाहे किसी भी पक्ष से आएं — सामाजिक तनाव को बढ़ाने का काम करते हैं।
आगे की स्थिति
मौलाना बरेलवी के इस बयान पर विभिन्न धार्मिक और राजनीतिक संगठनों की प्रतिक्रिया आने की संभावना है। धार्मिक स्थलों पर विवाद और सांप्रदायिक सौहार्द का मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बना रह सकता है।