डॉ. मेधा कुलकर्णी को लगातार दूसरे वर्ष 'संसद रत्न पुरस्कार', महाराष्ट्र के 5 सांसद सम्मानित
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद प्रोफेसर डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी को संसद में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए लगातार दूसरे वर्ष प्रतिष्ठित 'संसद रत्न पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है। 24 मई 2026 को की गई इस घोषणा के साथ, महाराष्ट्र से कुल 5 सांसद इस बार इस पुरस्कार के लिए चुने गए हैं। यह पुरस्कार प्राइम पॉइंट फाउंडेशन द्वारा प्रतिवर्ष लोकसभा और राज्यसभा में अनुकरणीय प्रदर्शन करने वाले सांसदों को दिया जाता है।
पुरस्कार विजेता और चयन प्रक्रिया
इस वर्ष महाराष्ट्र से सम्मानित होने वाले सांसदों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हेमंत सावरा और स्मिता वाघ, तथा शिवसेना के डॉ. श्रीकांत शिंदे और नरेश म्हस्के भी शामिल हैं। प्राइम पॉइंट फाउंडेशन सांसदों की उपस्थिति, प्रश्नकाल में भागीदारी, बहसों में हस्तक्षेप और जन-केंद्रित मुद्दों को उठाने के आधार पर यह मूल्यांकन करता है।
डॉ. मेधा कुलकर्णी की संसदीय सक्रियता
राज्यसभा में अपने पहले ही कार्यकाल में डॉ. मेधा कुलकर्णी ने रेल सेवाएँ, महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ग्रामीण विकास, शिक्षा, सामाजिक न्याय और कॉरपोरेट जिहाद जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लगातार उठाया है। उन्होंने विशेष सत्रों, शून्यकाल, प्रश्नकाल और विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर बहसों में सक्रिय भागीदारी की है।
हाल ही में समाप्त हुए संसद सत्र में उन्होंने महिला सुरक्षा, बीमा संरक्षण, वर्षा जल संचयन, आधार प्रमाणीकरण, आरटीई प्रवेश प्रक्रिया और कृषि भूमि से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से सदन के समक्ष रखा। गौरतलब है कि यह लगातार दूसरा वर्ष है जब उनकी संसदीय सक्रियता को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।
डॉ. कुलकर्णी की प्रतिक्रिया
पुरस्कार की घोषणा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. मेधा कुलकर्णी ने कहा, 'लगातार दूसरे वर्ष संसद रत्न पुरस्कार प्राप्त करना मेरे लिए सम्मान और जिम्मेदारी दोनों है। यह सम्मान केवल मेरा नहीं है, बल्कि संसद में जनता की आकांक्षाओं का प्रभावी प्रतिनिधित्व करने के लिए किए गए सच्चे प्रयासों को श्रद्धांजलि है।' उन्होंने आगे कहा कि 'लोकतंत्र में, एक जन प्रतिनिधि की सच्ची पहचान उसकी प्रतिबद्धता और कार्य में निहित होती है। यह जनता के आशीर्वाद और विश्वास का प्रतिबिंब है।'
महाराष्ट्र और पुणे के लिए गौरव
यह उपलब्धि महाराष्ट्र और विशेष रूप से पुणे के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है। यह ऐसे समय में आई है जब संसदीय जवाबदेही और सांसदों की सक्रियता को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ है। डॉ. कुलकर्णी ने स्पष्ट किया कि वे दृढ़ विश्वास और समर्पण के साथ जनहित के मुद्दों को उठाना जारी रखेंगी।