संत मलूकदास पर स्मारक डाक टिकट जारी, सिंधिया बोले— संतों ने भारत की आत्मा को दिशा दी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में संत मलूकदास की स्मृति में आयोजित 'संत समागम' कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार के डाक विभाग की ओर से एक विशेष स्मारक डाक टिकट का विमोचन किया। यह टिकट संत मलूकदास की भक्ति, ज्ञान, करुणा और जन-कल्याण की परंपरा को राष्ट्रीय स्मृति में संजोने का प्रयास है।
समारोह का संदर्भ और महत्त्व
यह स्मारक डाक टिकट श्रीराम कथा के उद्घाटन अवसर पर जारी किया गया, जिसे सिंधिया ने एक 'विशेष संयोग' बताया। उन्होंने कहा कि जिस संत का मन सदैव भगवान राम की भक्ति में लीन रहता था, उनकी याद में राम कथा के शुभारंभ पर यह टिकट जारी होना अत्यंत अर्थपूर्ण है।
कार्यक्रम में महात्मा स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य महाराज, मलूक पीठ सेवा संस्थान न्यास के पदाधिकारी और देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे।
संत मलूकदास की विरासत
सिंधिया ने बताया कि संत मलूकदास भगवान राम के परम भक्त थे, परंतु उनकी भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं थी। उन्होंने राम के चरित्र को अपने जीवन का दर्शन बनाया और उसे जन-जन तक पहुँचाया। वे भगवान राम को कर्तव्य, त्याग, सत्य, करुणा, न्याय और जन-कल्याण के प्रतीक के रूप में देखते थे।
गौरतलब है कि संत मलूकदास मध्यकालीन भारत के प्रमुख संत-कवियों में गिने जाते हैं, जिनकी रचनाएँ आज भी प्रासंगिक मानी जाती हैं। उनके उपदेशों ने पीढ़ियों को जीवन का सही मार्ग दिखाया है।
सरकार का सांस्कृतिक-विकास का दृष्टिकोण
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज भारत गहरे सांस्कृतिक आत्मविश्वास के साथ आर्थिक विकास की राह पर है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल लोक जैसे आध्यात्मिक व सांस्कृतिक धरोहर स्थलों के संरक्षण का उल्लेख किया।
सिंधिया के अनुसार, भारत के लिए विकास और संस्कृति एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'भारत अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भी आधुनिक बन सकता है।'
विकसित भारत 2047 और मानव-केंद्रित विकास
सिंधिया ने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास तभी सार्थक होगा जब उसके केंद्र में मनुष्य हो। उन्होंने करुणा, आर्थिक अवसर, तकनीक का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता, शिक्षा के माध्यम से चरित्र-निर्माण और समाज-कल्याण को विकास की आत्मा बताया।
डाक टिकट का राष्ट्रीय संदेश
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डाक विभाग द्वारा जारी यह स्मारक टिकट संत मलूकदास की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्मृति का अंग बनाने का एक सशक्त माध्यम है। यह आने वाली पीढ़ियों को उनकी भक्ति, ज्ञान और मानवता के संदेश से जोड़ने का काम भी करेगा। इस पहल से भारत की संत-परंपरा को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।