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सावन के तीसरे सोमवार पर बागनाथ-बैजनाथ में जलाभिषेक, संत निरंजन महाराज के सानिध्य में 12 साल का संकल्प

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सावन के तीसरे सोमवार पर बागनाथ-बैजनाथ में जलाभिषेक, संत निरंजन महाराज के सानिध्य में 12 साल का संकल्प

सारांश

बागेश्वर में संत निरंजन महाराज के सानिध्य में 12 साल के संकल्प की कांवड़ यात्रा सावन के तीसरे सोमवार को अपने चरम पर है। 73 से 80 श्रद्धालु सरयू नदी से जल उठाकर 22 किलोमीटर पैदल चलते हुए बागनाथ, बैजनाथ और चक्रेश्वर महादेव में जलाभिषेक करेंगे।

मुख्य बातें

बागेश्वर में सावन के तीसरे सोमवार पर संत निरंजन महाराज के सानिध्य में कांवड़ यात्रा निकाली गई।
2018 से शुरू हुई इस यात्रा में 12 साल तक प्रतिवर्ष जलाभिषेक का संकल्प लिया गया है।
इस बार 73 से 80 श्रद्धालु मार्कंडेय घाट से सरयू जल लेकर 22 किलोमीटर पैदल यात्रा पर निकले।
क्रम: पहले बागनाथ , फिर बैजनाथ , और सोमवार प्रातः 4 बजे चक्रेश्वर महादेव में जलाभिषेक व रुद्राभिषेक।
शाम को भजन संध्या और भंडारे का आयोजन; प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा-स्वास्थ्य के पुख्ता इंतज़ाम किए।

कुमाऊं की काशी कहे जाने वाले बागेश्वर में सावन की कांवड़ यात्रा के साथ पूरा क्षेत्र शिवभक्ति में डूब गया है। गरुड़ से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मार्कंडेय घाट पर सरयू नदी से पवित्र जल ग्रहण किया और चक्रेश्वर महादेव मंदिर तक 22 किलोमीटर की पैदल यात्रा आरंभ की। संत निरंजन महाराज के सानिध्य में निकली इस यात्रा में 'हर हर महादेव' के जयघोष के साथ भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

12 साल का अटूट संकल्प

यात्रा में शामिल एक कांवड़िये ने बताया, 'हमारे महाराज निरंजन के सानिध्य में यह 12 सालों का संकल्प है। हम 12 साल तक सरयू नदी से जल लेकर चक्रेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करेंगे।' उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष सावन के तीसरे सोमवार को जल चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है। इस बार यात्रा में करीब 73 से 80 श्रद्धालु शामिल हैं।

गौरतलब है कि इस कांवड़ यात्रा की शुरुआत 2018 में हुई थी और तब से यह सिलसिला अनवरत जारी है। यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक आस्था का प्रतीक बन चुकी है।

मुख्य घटनाक्रम और पूजा कार्यक्रम

एक कांवड़िये ने कार्यक्रम का विवरण देते हुए बताया, 'पहले हम बाबा बागनाथ में जल चढ़ाएंगे। उसके बाद बैजनाथ में शिवजी के मंदिर में जल अर्पित होगा। सोमवार की प्रातः 4 बजे चक्रेश्वर महादेव में जलाभिषेक किया जाएगा, जहाँ रुद्राभिषेक भी होगा।' शाम के समय भजन संध्या और भंडारे का भी आयोजन है।

एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि चक्रेश्वर मंदिर गोमती नदी और घाटी के बीच स्थित है, जो इस पूरे मार्ग को आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष बनाता है।

श्रद्धालुओं का उत्साह और स्थानीय स्वागत

यात्रा में ढोल-नगाड़ों और भजन मंडलियों की गूंज के साथ कांवड़ियों का जत्था आगे बढ़ रहा था। रास्ते भर स्थानीय निवासियों ने श्रद्धालुओं का भावपूर्ण स्वागत किया और उन्हें जलपान कराया। यह दृश्य बागेश्वर की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है।

प्रशासन की तैयारियाँ

जिला प्रशासन ने 22 किलोमीटर के यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के पुख्ता इंतज़ाम किए हैं। सावन के तीसरे सोमवार को भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। आने वाले सोमवार को बागनाथ, बैजनाथ और चक्रेश्वर महादेव — तीनों धामों में जलाभिषेक के साथ यह यात्रा अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँचेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंपरा और सामुदायिक संकल्प एक साथ चलते हैं। 12 साल का यह अनुष्ठान-संकल्प दर्शाता है कि तीर्थ-पर्यटन के व्यावसायिक शोर के बीच भी ग्रामीण श्रद्धालुओं की निजी आस्था अपनी लय में जीवित है। हालाँकि, 22 किलोमीटर के पैदल मार्ग पर बढ़ती भीड़ और सीमित स्वास्थ्य संसाधन एक प्रशासनिक चुनौती भी हैं जिस पर ध्यान देना ज़रूरी है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बागेश्वर में संत निरंजन महाराज की कांवड़ यात्रा क्या है?
यह संत निरंजन महाराज के सानिध्य में 2018 से शुरू हुई एक वार्षिक कांवड़ यात्रा है, जिसमें 12 साल तक प्रतिवर्ष सावन के तीसरे सोमवार को सरयू नदी से जल लेकर बागनाथ, बैजनाथ और चक्रेश्वर महादेव में जलाभिषेक करने का संकल्प लिया गया है।
इस बार जलाभिषेक का कार्यक्रम क्या है?
शाम को पहले बागनाथ, फिर बैजनाथ में जलाभिषेक होगा। सोमवार प्रातः 4 बजे चक्रेश्वर महादेव में रुद्राभिषेक सहित जलाभिषेक किया जाएगा। शाम को भजन संध्या और भंडारे का भी आयोजन है।
कांवड़ यात्रा का मार्ग कितना लंबा है और जल कहाँ से लिया जाता है?
श्रद्धालु मार्कंडेय घाट पर सरयू नदी से पवित्र जल ग्रहण करते हैं और वहाँ से चक्रेश्वर महादेव मंदिर तक 22 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं।
इस यात्रा में कितने श्रद्धालु शामिल हैं?
इस वर्ष गरुड़ से आए करीब 73 से 80 श्रद्धालु इस कांवड़ यात्रा में शामिल हैं। यात्रा में ढोल-नगाड़े और भजन मंडलियाँ भी साथ चल रही हैं।
चक्रेश्वर महादेव मंदिर कहाँ स्थित है?
चक्रेश्वर महादेव मंदिर गोमती नदी और पहाड़ी घाटी के बीच स्थित है। यह बागेश्वर जिले का एक प्रमुख शिव तीर्थ है जहाँ सावन के सोमवार को विशेष पूजा-अनुष्ठान होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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