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पेट्रोल-डीजल 9 दिनों में तीसरी बार महंगा: उमंग सिंघार बोले, सरकार के पास आर्थिक संकट का कोई हल नहीं

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पेट्रोल-डीजल 9 दिनों में तीसरी बार महंगा: उमंग सिंघार बोले, सरकार के पास आर्थिक संकट का कोई हल नहीं

सारांश

9 दिनों में तीन बार पेट्रोल-डीजल महंगा — और सरकार का जवाब है 'ईंधन बचाओ'। मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे आम आदमी की रसोई पर सीधा हमला बताया। पश्चिम एशिया युद्ध की आँच अब हर घर तक पहुँच रही है।

मुख्य बातें

पेट्रोल और डीजल की कीमतें 9 दिनों में तीसरी बार बढ़ाई गईं — पहले ₹3 , फिर 90 पैसे , अब ₹1 से कम की वृद्धि।
मध्य प्रदेश नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसके पास आर्थिक संकट का कोई ठोस समाधान नहीं है।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
सिंघार ने चेतावनी दी कि डीजल महंगा होने से सब्ज़ियाँ, राशन, दूध और दवाइयाँ सभी महंगी होंगी।
विपक्षी दल ईंधन पर कर-कटौती और मूल्य राहत की माँग कर रहे हैं; सरकार की ओर से अब तक कोई घोषणा नहीं।

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 23 मई 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में महज 9 दिनों के भीतर तीसरी बार बढ़ोतरी की गई। सिंघार का आरोप है कि सरकार आर्थिक संकट का समाधान खोजने की बजाय जनता को 'ईंधन बचाओ' का उपदेश दे रही है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से घरेलू ईंधन दरें लगातार ऊपर जा रही हैं।

कितनी बार और कितनी बढ़ी कीमतें

ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, पहले चरण में पेट्रोल और डीजल दोनों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। दूसरे चरण में 90 पैसे प्रति लीटर और तीसरे चरण में ₹1 से कम की वृद्धि की गई है। इस प्रकार बीते 10 दिनों में ईंधन दरों में कुल उल्लेखनीय इज़ाफा हो चुका है, जिससे आम उपभोक्ता पर सीधा बोझ पड़ रहा है।

सिंघार का सरकार पर हमला

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, 'पेट्रोल-डीजल फिर महंगा हो गया है — सिर्फ नौ दिनों में तीसरी बार कीमतें बढ़ा दी गईं। प्रधानमंत्री विदेश दौरों और इवेंट राजनीति में व्यस्त हैं और देश की जनता रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए संघर्ष कर रही है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब दुनिया के कई देश टैक्स घटाकर जनता को राहत दे रहे हैं, तब भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार लगातार आम आदमी की जेब पर बोझ डाल रही है।

आम जनता पर असर

सिंघार ने महंगाई की श्रृंखला प्रतिक्रिया को रेखांकित करते हुए कहा कि डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी, और उसके बाद सब्ज़ियाँ, राशन, दूध और दवाइयाँ — सब कुछ महंगा होगा। उनके अनुसार, 'आने वाले दिनों में भाजपा सरकार की नीतियों का सीधा असर हर घर की रसोई पर पड़ने वाला है।' विशेषज्ञों के एक वर्ग का भी मानना है कि ईंधन मूल्य वृद्धि खुदरा मुद्रास्फीति को और उकसा सकती है।

विपक्ष की माँग और आगे की राह

सिंघार ने कहा कि 'महंगाई अब सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं, जनता के धैर्य और मजबूरी की परीक्षा बन चुकी है।' विपक्षी दल सरकार से ईंधन पर करों में कटौती और मूल्य नियंत्रण तंत्र की माँग कर रहे हैं। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के लंबे खिंचने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे घरेलू ईंधन दरों पर दबाव बना रहेगा। सरकार की ओर से अब तक कोई राहत पैकेज या कर-कटौती का संकेत नहीं दिया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब भारत सरकार वह बोझ सीधे उपभोक्ता पर डाल रही है। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क राजस्व को प्राथमिकता दे रही है या आम आदमी की क्रय शक्ति को — और इस सवाल का जवाब अगले कुछ हफ्तों की खुदरा मुद्रास्फीति के आँकड़ों में साफ दिखेगा। विपक्ष का हमला राजनीतिक है, लेकिन ट्रांसपोर्ट-से-रसोई तक महंगाई की श्रृंखला का तर्क आर्थिक रूप से ठोस है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

9 दिनों में पेट्रोल-डीजल कितनी बार और कितना महंगा हुआ?
बीते 9-10 दिनों में तीन बार कीमतें बढ़ाई गईं — पहले ₹3 प्रति लीटर, फिर 90 पैसे, और तीसरी बार ₹1 से कम की वृद्धि हुई। इस तरह कुल मिलाकर उपभोक्ताओं पर प्रति लीटर उल्लेखनीय अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
उमंग सिंघार ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार आर्थिक संकट का समाधान खोजने की बजाय जनता को 'ईंधन बचाओ' का उपदेश दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जब दुनिया के कई देश टैक्स घटाकर राहत दे रहे हैं, तब भारत में आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ाया जा रहा है।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
सिंघार के अनुसार डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी, जिससे सब्ज़ियाँ, राशन, दूध और दवाइयाँ सभी महंगी होंगी। इस तरह ईंधन मूल्य वृद्धि का असर हर घर की रसोई तक पहुँचता है।
पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर भारत के घरेलू ईंधन दरों पर पड़ रहा है। सरकार ने अब तक उत्पाद शुल्क में कटौती जैसी कोई राहत नहीं दी है।
विपक्ष की सरकार से क्या माँग है?
विपक्षी दल, जिनमें मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख है, ईंधन पर करों में कटौती और मूल्य नियंत्रण तंत्र लागू करने की माँग कर रहे हैं। सरकार की ओर से अब तक किसी राहत पैकेज या कर-कटौती का कोई संकेत नहीं दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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