केरल CM सतीशन ने केलकर नियुक्ति का बचाव किया, गुरुवायूर मंदिर विवाद को बताया राजनीतिक
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सोमवार, 25 मई को पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू. केलकर को अपना सचिव नियुक्त किए जाने का पुरज़ोर बचाव किया और गुरुवायूर श्री कृष्ण मंदिर में उनकी रविवार की यात्रा को लेकर उठे विवाद को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया। कोच्चि में एक विशेष कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में सतीशन ने कहा कि इस नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद पूरी तरह अनावश्यक है।
नियुक्ति को लेकर सतीशन का तर्क
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केलकर केरल संवर्ग के एक अखिल भारतीय सेवा अधिकारी हैं और उनका सेवा रिकॉर्ड उत्कृष्ट है। उन्होंने कहा कि चुनाव समाप्त होने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी की भूमिका भी स्वतः समाप्त हो जाती है और उचित मंजूरी के बाद उन्हें कहीं भी तैनात किया जा सकता है।
सतीशन ने कहा, "मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति राज्य अधिकारियों के एक पैनल द्वारा की जाती है। चुनाव खत्म होने के बाद उस अधिकारी का कार्यकाल भी समाप्त हो जाता है। केलकर की नियुक्ति तब हुई, जब यह सूचना मिली कि उन्हें किसी अन्य जगह तैनात किया जा सकता है।"
विपक्ष पर पलटवार
सतीशन ने आलोचकों को याद दिलाया कि केलकर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पद पर नियुक्त करने वाली सरकार खुद सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार थी। उन्होंने सवाल उठाया, "जब सीईओ की नियुक्ति हुई थी, तब हम विपक्ष में थे और बीजेपी भी विपक्ष में थी। क्या उस समय किसी ने उनके खिलाफ कोई शिकायत की थी?"
उन्होंने पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी नलिनी नेटो का उदाहरण भी दिया, जो बाद में गृह सचिव और मुख्य सचिव बनीं और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के कार्यालय में भी कार्यरत रहीं। दूसरे राज्यों से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में 'विशेष गहन पुनरीक्षण' प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर विवाद हुआ था, लेकिन केरल में ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई।
गुरुवायूर मंदिर विवाद पर सफाई
गुरुवायूर श्री कृष्ण मंदिर में रविवार को मुख्यमंत्री की यात्रा को लेकर उठे सवालों पर सतीशन ने उन रिपोर्टों को सिरे से नकार दिया जिनमें दावा किया गया था कि उन्हें विशेष सुविधा दी गई थी। उन्होंने कहा कि उनके साथ केवल एक सुरक्षा गार्ड था और उन्होंने दर्शन के लिए सामान्य टिकट खरीदकर अन्य श्रद्धालुओं के साथ कतार में खड़े होकर दर्शन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा, "मैंने मंदिर के अधिकारियों से कहा कि मुझे किसी भी तरह की विशेष सुविधा नहीं चाहिए। मैंने किसी भी श्रद्धालु को पीछे नहीं छोड़ा।"
अस्थायी फेरबदल का संदर्भ
सतीशन ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों का यह मौजूदा फेरबदल केवल अस्थायी प्रकृति का है, क्योंकि कई मंत्री इस समय एक से अधिक विभागों का कार्यभार संभाल रहे हैं। केलकर को एक सक्षम और मजबूत कार्य अनुभव वाला अधिकारी बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी नियुक्ति पर की जा रही आलोचना लगभग हास्यास्पद है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि विपक्ष इस मुद्दे को कितना आगे खींचता है।