केरल सीईओ की सीएम सचिव नियुक्ति पर सीपीआई (एम) का हमला, बोली — 'सेवा के बदले इनाम'
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) डॉ. रतन यू. केलकर को विधानसभा चुनाव समाप्त होते ही मुख्यमंत्री का सचिव नियुक्त किए जाने पर राज्य में सियासी संग्राम छिड़ गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई (एम)] ने 23 मई को एक औपचारिक प्रेस बयान जारी कर इस नियुक्ति को चुनाव आयोग की निष्पक्षता और केरल विधानसभा चुनावों की विश्वसनीयता पर सीधा प्रश्नचिह्न बताया। पार्टी ने इसे 'सेवा के बदले इनाम' की संज्ञा देते हुए कांग्रेस नेतृत्व से जवाब माँगा है।
नियुक्ति पर क्या है विवाद
सीपीआई (एम) राज्य सचिवालय ने अपने बयान में कहा कि केरल के इतिहास में पहली बार किसी मुख्य निर्वाचन अधिकारी को चुनाव समाप्त होते ही इतने अहम सरकारी पद पर नियुक्त किया गया है। पार्टी का तर्क है कि यह कदम उन आरोपों को बल देता है, जो वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग पर लगाए थे।
पार्टी के अनुसार, चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने कई निर्णय संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) के पक्ष में लिए, जो कथित तौर पर पक्षपातपूर्ण थे। इस नियुक्ति को उसी कड़ी का हिस्सा बताया जा रहा है।
मुख्य आरोप और चुनावी अनियमितताएँ
सीपीआई (एम) ने कई विशिष्ट आरोप सूचीबद्ध किए हैं। पार्टी का दावा है कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के नाम पर लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जबकि अपात्र व्यक्तियों के नाम बने रहे। इसके अलावा, पार्टी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया पहले घोषित समय-सीमा से एक सप्ताह पूर्व अचानक बंद कर दी गई।
अन्य आरोपों में पलक्कड़ सीट सहित कई स्थानों पर एलडीएफ उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटन में गड़बड़ी, ईवीएम पर चिह्न स्पष्ट न छपना, लाखों चुनाव ड्यूटी कर्मचारियों को मतदान से वंचित रखना और मतदान प्रतिशत जारी करने में देरी शामिल हैं। एक अन्य आरोप यह भी है कि राजनीतिक दलों को भेजे गए एक आधिकारिक पत्र पर चुनाव आयोग की जगह भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मुहर दिखाई दी थी।
पश्चिम बंगाल से तुलना और राहुल गांधी पर निशाना
सीपीआई (एम) ने इस विवाद की तुलना पश्चिम बंगाल में हुई इसी तरह की नियुक्तियों से की। पार्टी के अनुसार, बंगाल में चुनाव के बाद तत्कालीन मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल को मुख्य सचिव और एसआईआर प्रक्रिया संभालने वाले सुब्रत गुप्ता को मुख्यमंत्री का प्रधान सलाहकार बनाए जाने पर भी बड़ा विवाद हुआ था।
उस समय लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया था कि 'जब भाजपा और चुनाव आयोग के बीच गुप्त सौदे में चोरी बड़ी होती है, तो इनाम भी बड़ा होता है।' सीपीआई (एम) ने अब कांग्रेस और राहुल गांधी से सीधे सवाल किया है कि जब वही स्थिति केरल में बनी है — जहाँ कांग्रेस सत्ता में है — तो उनका रुख क्या है। पार्टी ने इसे कांग्रेस, BJP और चुनाव आयोग के बीच 'शर्मनाक गठजोड़' करार दिया।
सीपीआई (एम) की माँग
पार्टी ने माँग की है कि चुनाव से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक अनिवार्य 'कूलिंग ऑफ पीरियड' लागू किया जाए — एक माँग जो कांग्रेस ने स्वयं पश्चिम बंगाल मामले में उठाई थी। सीपीआई (एम) ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी कदम का पुरजोर विरोध किया जाएगा, चाहे वह किसी भी दल की सरकार क्यों न हो।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब केरल में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया जारी है और विपक्ष पहले से ही चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। गौरतलब है कि यह पहला अवसर नहीं है जब किसी राज्य में चुनाव-पश्चात अधिकारियों की नियुक्ति राष्ट्रीय बहस का विषय बनी हो। सीपीआई (एम) के इस हमले के बाद कांग्रेस का आधिकारिक जवाब और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया इस विवाद की अगली दिशा तय करेगी।