महुआ मोइत्रा को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने नदिया सर्किट हाउस सर्कुलर बदला, एक दिन की पूर्व सूचना पर ठहरने का अधिकार
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका का निपटारा करते हुए पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के प्रशासन को निर्देश दिया कि वह यात्रा से केवल एक दिन पहले सूचना मिलने पर भी उन्हें कृष्णानगर सर्किट हाउस में ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराए। अदालत ने 1 सितंबर 2026 को जारी उस सर्कुलर को बदल दिया जिसमें सांसदों और विधायकों के लिए तीन से चार दिन पहले सूचना देना अनिवार्य किया गया था।
विवाद की पृष्ठभूमि
महुआ मोइत्रा ने अगस्त 2026 में कृष्णानगर सर्किट हाउस से देर रात निकाले जाने की शिकायत लेकर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था। इसके तुरंत बाद 1 सितंबर 2026 को नदिया जिला प्रशासन ने एक सर्कुलर जारी कर जिले के जनप्रतिनिधियों के लिए अग्रिम सूचना की समयसीमा तीन से चार दिन कर दी। मोइत्रा ने इसे अपने खिलाफ़ की गई जानबूझकर की कार्रवाई बताते हुए इसे अदालत में चुनौती दी।
याचिका में मोइत्रा ने यह भी आरोप लगाया कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के अंतर्गत मई 2026 से 18 विकास परियोजनाएँ लंबित हैं और जिला प्रशासन उनके क्रियान्वयन में सहयोग नहीं कर रहा है।
अदालत में दोनों पक्षों के तर्क
मोइत्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष कहा कि यह सर्कुलर विशेष रूप से उनकी मुवक्किल — जो एक TMC सांसद हैं — को निशाना बनाकर तैयार किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि अतीत में मोइत्रा अत्यंत कम सूचना पर भी वहाँ ठहरती रही हैं।
प्रतिवादी अधिकारियों की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उस समय सर्किट हाउस में मरम्मत का कार्य चल रहा था और प्रशासन ने उन्हें वैकल्पिक आवास की पेशकश भी की थी।
सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ और निर्देश
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि तीन से चार दिन पहले सूचना देने की शर्त 'बदले की भावना से लगाई गई' प्रतीत होती है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि एक निर्वाचित लोकसभा प्रतिनिधि के रूप में मोइत्रा को अपने निर्वाचन क्षेत्र में सरकारी सुविधाओं पर प्राथमिकता का अधिकार है।
अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार का यह तर्क भी अस्वीकार कर दिया कि आवास केवल 'उपलब्धता के आधार पर' दिया जाना चाहिए। निर्देश में कहा गया कि मोइत्रा यात्रा से एक दिन पहले प्रशासन को सूचित करेंगी, जिसके बाद प्रोटोकॉल के अनुसार उनके लिए ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
MPLADS परियोजनाओं पर निर्देश
अदालत ने MPLADS के तहत लंबित 18 परियोजनाओं के मामले में जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि वह इस शिकायत की जाँच कर उचित कदम उठाए। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि यदि मोइत्रा इस समाधान से संतुष्ट नहीं होती हैं तो वे संबंधित उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा सकती हैं।
आगे क्या
यह निर्णय राजनीतिक रूप से संवेदनशील है क्योंकि यह केंद्र और राज्य प्रशासन के बीच निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की सीमाओं पर एक महत्त्वपूर्ण नज़ीर स्थापित करता है। आने वाले दिनों में जिला प्रशासन द्वारा लंबित परियोजनाओं पर उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।