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महेश दीक्षित बने इंटेलिजेंस ब्यूरो के नए निदेशक, तपन कुमार डेका की ली जगह

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महेश दीक्षित बने इंटेलिजेंस ब्यूरो के नए निदेशक, तपन कुमार डेका की ली जगह

सारांश

महेश दीक्षित ने इंटेलिजेंस ब्यूरो की कमान संभाली — 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी, जिन्होंने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में खुफिया निगरानी में अग्रणी भूमिका निभाई। कैबिनेट नियुक्ति समिति ने दो वर्षीय कार्यकाल को मंजूरी दी।

मुख्य बातें

महेश दीक्षित को 25 जून 2025 को इंटेलिजेंस ब्यूरो का नया निदेशक नियुक्त किया गया।
वे आंध्र प्रदेश कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं; इससे पहले आईबी में स्पेशल डायरेक्टर थे।
कैबिनेट नियुक्ति समिति — जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं — ने नियुक्ति को मंजूरी दी।
उनका कार्यकाल दो वर्ष या अगले आदेश तक; इसके लिए सेवा विस्तार भी दिया गया।
उन्होंने श्रीनगर में सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो का नेतृत्व किया और अनुच्छेद 370 हटने के बाद सुरक्षा निगरानी में अहम भूमिका निभाई।
वे 1988 बैच के तपन कुमार डेका का स्थान लेंगे।

इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को 25 जून 2025 को नया प्रमुख मिल गया — वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी महेश दीक्षित को देश की प्रमुख आंतरिक खुफिया एजेंसी का निदेशक नियुक्त किया गया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं, ने इस नियुक्ति को औपचारिक मंजूरी दी। दीक्षित ने 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी तपन कुमार डेका का स्थान लिया है।

नियुक्ति का विवरण

महेश दीक्षित आंध्र प्रदेश कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। नियुक्ति से पूर्व वे इंटेलिजेंस ब्यूरो में ही स्पेशल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे और एजेंसी के सबसे अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते थे। आधिकारिक आदेश के अनुसार उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण की तारीख से दो वर्ष तक अथवा अगले आदेश तक रहेगा। इसके लिए उन्हें सेवा विस्तार भी प्रदान किया गया है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अहम भूमिका

दीक्षित के करियर का एक निर्णायक अध्याय जम्मू-कश्मीर में बीता है, जहाँ उन्होंने श्रीनगर स्थित सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो का नेतृत्व किया। उन्होंने जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में खुफिया गतिविधियों की निगरानी की। यह ऐसे समय में आया जब 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद क्षेत्र में सुरक्षा परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा था — दीक्षित ने उस संवेदनशील दौर में सुरक्षा हालात पर नज़र रखने में अहम भूमिका निभाई।

आतंकवाद-रोधी अनुभव

दीक्षित को आतंकवाद-रोधी अभियानों का व्यापक अनुभव है। उन्होंने पाकिस्तान समर्थित घुसपैठ नेटवर्क, कट्टरपंथ से जुड़ी गतिविधियों और वामपंथी उग्रवाद से उत्पन्न खतरों से निपटने में महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ निभाई हैं। आईबी में उनकी दीर्घकालिक उपस्थिति उन्हें एजेंसी की संरचना और कार्यशैली का गहरा जानकार बनाती है।

इंटेलिजेंस ब्यूरो की भूमिका

इंटेलिजेंस ब्यूरो भारत की प्रमुख आंतरिक सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसी है, जो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। इसे दुनिया की सबसे पुरानी खुफिया एजेंसियों में से एक माना जाता है। देश के भीतर खुफिया सूचना संग्रह, आतंकवाद-निरोध और महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा इसकी मुख्य ज़िम्मेदारियाँ हैं।

आगे क्या

दीक्षित ऐसे समय में आईबी की कमान संभाल रहे हैं जब सीमा पार से उत्पन्न खतरे और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियाँ केंद्र सरकार की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर हैं। उनके जम्मू-कश्मीर अनुभव और आईबी के भीतर की गहरी समझ को देखते हुए, विशेषज्ञ मानते हैं कि एजेंसी की परिचालन निरंतरता बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक स्पष्ट संकेत है कि सरकार सीमापारीय और आंतरिक खतरों पर परिचालन निरंतरता को प्राथमिकता दे रही है। गौरतलब है कि आईबी प्रमुख का पद राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है और इस नियुक्ति में 'इनसाइडर' को चुनना एजेंसी की संस्थागत स्मृति को बनाए रखने की सोची-समझी रणनीति दिखती है। हालाँकि, आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि क्या आईबी में दशकों से जड़ें जमाए किसी अधिकारी के नेतृत्व में एजेंसी नई तकनीकी और साइबर खुफिया चुनौतियों के लिए पर्याप्त रूप से नवीनीकृत हो पाएगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महेश दीक्षित कौन हैं और उन्हें क्यों चुना गया?
महेश दीक्षित आंध्र प्रदेश कैडर के 1993 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं, जो नियुक्ति से पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो में ही स्पेशल डायरेक्टर के पद पर थे। उन्हें एजेंसी के भीतर और जम्मू-कश्मीर में उनके व्यापक खुफिया अनुभव के आधार पर इस पद के लिए उपयुक्त माना गया।
इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक का कार्यकाल कितना होता है?
आधिकारिक आदेश के अनुसार महेश दीक्षित का कार्यकाल पदभार ग्रहण की तारीख से दो वर्ष तक अथवा अगले आदेश तक रहेगा। इसके लिए उन्हें विशेष सेवा विस्तार भी दिया गया है।
तपन कुमार डेका कौन थे और उनका कार्यकाल कैसा रहा?
तपन कुमार डेका 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी थे, जो अब तक इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक के पद पर थे। महेश दीक्षित ने उनकी जगह पदभार संभाला है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो क्या काम करता है?
इंटेलिजेंस ब्यूरो भारत की प्रमुख आंतरिक सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसी है, जो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। इसकी मुख्य ज़िम्मेदारियों में देश के भीतर खुफिया सूचना संग्रह, आतंकवाद-निरोध और महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा शामिल है।
जम्मू-कश्मीर में महेश दीक्षित की क्या भूमिका रही है?
महेश दीक्षित ने श्रीनगर स्थित सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो का नेतृत्व किया और जम्मू, कश्मीर व लद्दाख में खुफिया गतिविधियों की निगरानी की। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद बदले सुरक्षा परिदृश्य में उनकी भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही।
राष्ट्र प्रेस
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