महेश दीक्षित बने इंटेलिजेंस ब्यूरो के नए निदेशक, तपन कुमार डेका की ली जगह
सारांश
मुख्य बातें
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को 25 जून 2025 को नया प्रमुख मिल गया — वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी महेश दीक्षित को देश की प्रमुख आंतरिक खुफिया एजेंसी का निदेशक नियुक्त किया गया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं, ने इस नियुक्ति को औपचारिक मंजूरी दी। दीक्षित ने 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी तपन कुमार डेका का स्थान लिया है।
नियुक्ति का विवरण
महेश दीक्षित आंध्र प्रदेश कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। नियुक्ति से पूर्व वे इंटेलिजेंस ब्यूरो में ही स्पेशल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे और एजेंसी के सबसे अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते थे। आधिकारिक आदेश के अनुसार उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण की तारीख से दो वर्ष तक अथवा अगले आदेश तक रहेगा। इसके लिए उन्हें सेवा विस्तार भी प्रदान किया गया है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अहम भूमिका
दीक्षित के करियर का एक निर्णायक अध्याय जम्मू-कश्मीर में बीता है, जहाँ उन्होंने श्रीनगर स्थित सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो का नेतृत्व किया। उन्होंने जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में खुफिया गतिविधियों की निगरानी की। यह ऐसे समय में आया जब 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद क्षेत्र में सुरक्षा परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा था — दीक्षित ने उस संवेदनशील दौर में सुरक्षा हालात पर नज़र रखने में अहम भूमिका निभाई।
आतंकवाद-रोधी अनुभव
दीक्षित को आतंकवाद-रोधी अभियानों का व्यापक अनुभव है। उन्होंने पाकिस्तान समर्थित घुसपैठ नेटवर्क, कट्टरपंथ से जुड़ी गतिविधियों और वामपंथी उग्रवाद से उत्पन्न खतरों से निपटने में महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ निभाई हैं। आईबी में उनकी दीर्घकालिक उपस्थिति उन्हें एजेंसी की संरचना और कार्यशैली का गहरा जानकार बनाती है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो की भूमिका
इंटेलिजेंस ब्यूरो भारत की प्रमुख आंतरिक सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसी है, जो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। इसे दुनिया की सबसे पुरानी खुफिया एजेंसियों में से एक माना जाता है। देश के भीतर खुफिया सूचना संग्रह, आतंकवाद-निरोध और महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा इसकी मुख्य ज़िम्मेदारियाँ हैं।
आगे क्या
दीक्षित ऐसे समय में आईबी की कमान संभाल रहे हैं जब सीमा पार से उत्पन्न खतरे और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियाँ केंद्र सरकार की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर हैं। उनके जम्मू-कश्मीर अनुभव और आईबी के भीतर की गहरी समझ को देखते हुए, विशेषज्ञ मानते हैं कि एजेंसी की परिचालन निरंतरता बनी रहेगी।