टीएमसी में बहुमत का फैसला चुनाव आयोग करेगा: भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने शनिवार, 4 जुलाई को नई दिल्ली में कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर किस गुट के पास बहुमत है, यह तय करने का एकमात्र अधिकार चुनाव आयोग के पास है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेताओं के बीच हुई झड़प के बाद केंद्र सरकार ने वहाँ सुरक्षाबल तैनात किए हैं, जिसके बाद यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।
टीएमसी विवाद पर भाजपा का रुख
हुसैन ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह टीएमसी का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा, 'किसके साथ कितने विधायक हैं, कितने नेता हैं, कितने सांसद हैं, कितने ब्लॉक स्तर के अधिकारी हैं — इन सभी मुद्दों पर फैसला लेने का पूरा अधिकार चुनाव आयोग के पास है। इस पर हम किसी भी प्रकार की टिप्पणी नहीं कर सकते।'
उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी का एक वर्ग दावा कर रहा है कि उनके पास सर्वाधिक विधायक और सांसद हैं — ऐसे में वही असली टीएमसी होगी। भाजपा ने इस आंतरिक विवाद से खुद को अलग रखने की बात कही।
पश्चिम बंगाल में सुरक्षाबलों की तैनाती
टीएमसी नेताओं के बीच झड़प के बाद केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में सुरक्षाबल भेजे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर दो गुटों के बीच विधायकों और जनप्रतिनिधियों के समर्थन को लेकर खींचतान जारी है। गौरतलब है कि इस तरह के आंतरिक विभाजन के मामलों में चुनाव आयोग ही पार्टी के असली प्रतीक और नाम पर अंतिम निर्णय देने का संवैधानिक अधिकार रखता है।
पंजाब कांग्रेस पर तीखी टिप्पणी
हुसैन ने पंजाब की राजनीतिक स्थिति पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार, पंजाब में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की स्थिति बेहद खराब है — पार्टी कई गुटों में बिखर चुकी है। उन्होंने कहा कि राजा वारिंग का अलग गुट है, चन्नी का अलग गुट है, और अन्य नेताओं के भी अपने-अपने खेमे हैं। उनके शब्दों में, 'कांग्रेस टुकड़े-टुकड़े में बंट गई है।'
भारत-पाकिस्तान संवाद पर कड़ा संदेश
भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की माँग पर हुसैन ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जो लोग दोनों देशों के बीच संवाद की पैरवी कर रहे हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान एक आतंकवाद-समर्थक देश है। उनके अनुसार, 'अगर पाकिस्तान आतंकवाद से तौबा करता है और उसे खत्म करता है, तभी दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधर सकते हैं। एक तरफ खून बहाना और दूसरी तरफ बातचीत की पेशकश करना — यह संभव नहीं है।'
आगे क्या होगा
टीएमसी के आंतरिक विवाद में चुनाव आयोग की भूमिका अब केंद्रीय हो गई है। पश्चिम बंगाल में सुरक्षाबलों की मौजूदगी और पार्टी के भीतर गुटबाजी को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर नज़र रखे हुए हैं कि आयोग इस मामले में कब और कैसे हस्तक्षेप करता है।