2 अक्टूबर 2026
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शामली धर्मांतरण विवाद: आयुष मलिक ने वीडियो जारी कर पिता देवराज के आरोप नकारे, दंगा भड़काने का लगाया इल्ज़ाम

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शामली धर्मांतरण विवाद: आयुष मलिक ने वीडियो जारी कर पिता देवराज के आरोप नकारे, दंगा भड़काने का लगाया इल्ज़ाम

सारांश

शामली धर्मांतरण विवाद में अब बेटे ने ही पिता पर पलटवार किया है। आयुष मलिक ने वीडियो जारी कर अपहरण के आरोप नकारे और पिता देवराज पर शहरों में दंगा भड़काने की कोशिश का गंभीर इल्ज़ाम लगाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही आयुष को स्वतंत्र नागरिक घोषित कर चुका है।

मुख्य बातें

आयुष मलिक ने 2 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर 1 मिनट 15 सेकंड का वीडियो जारी कर पिता देवराज मलिक के अपहरण आरोपों को खारिज किया।
आयुष ने अपने पिता पर शामली और आसपास के शहरों में दंगा भड़काने की कोशिश का गंभीर आरोप लगाया।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय पहले ही आदेश दे चुका है कि आयुष वयस्क है और उसे किसी भी धर्म को अपनाने की स्वतंत्रता है।
देवराज मलिक ने सुल्तान कारी और मुफ्ती अब्दुल्लाह, दारुल उलूम देवबंद पर बेटे का पुनः धर्मांतरण कराने का मामला दर्ज कराया है, जिसमें पुलिस जाँच जारी है।
इससे पहले चांदनी कुरैशी और उनके परिजन जबरन धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

उत्तर प्रदेश के शामली जनपद में चर्चित धर्मांतरण प्रकरण में 2 अक्टूबर 2026 को एक नया और अहम मोड़ आया, जब दवा व्यवसायी देवराज मलिक के पुत्र आयुष मलिक ने सोशल मीडिया पर 1 मिनट 15 सेकंड का एक वीडियो जारी करते हुए अपने पिता के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इतना ही नहीं, आयुष ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पिता की बातें शामली और आसपास के शहरों में सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश है।

मामले की पृष्ठभूमि

दयानंदनगर निवासी दवा व्यवसायी देवराज मलिक ने पहले चांदनी कुरैशी नामक युवती और उसके परिजनों पर अपने बेटे को प्रेमजाल में फँसाकर जबरन धर्मांतरण कराने का मामला दर्ज कराया था। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने चांदनी, उनके पिता और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

कुछ समय बाद आयुष मलिक के सनातन धर्म में वापस लौटने और माता-पिता के साथ पूजा-पाठ करते हुए वीडियो में दिखाई देने की खबरें भी सामने आई थीं। यह मामला तब और उलझ गया जब आयुष ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दावा किया कि उनके पिता ने उन्हें जबरन घर में बंधक बना रखा है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का आदेश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि आयुष मलिक एक वयस्क नागरिक है और उसे स्वतंत्र रूप से रहने, आने-जाने तथा किसी भी धर्म को अपनाने का संवैधानिक अधिकार है। न्यायालय के इस आदेश के बाद से आयुष अपने पारिवारिक घर नहीं लौटे।

हाईकोर्ट के आदेश के पश्चात देवराज मलिक ने सुल्तान कारी और मुफ्ती अब्दुल्लाह, दारुल उलूम देवबंद के विरुद्ध नया मुकदमा दर्ज कराया। उनका आरोप था कि इन दोनों ने मिलकर उनके बेटे का पुनः धर्मांतरण करवाया और वे इस कथित षड्यंत्र में शामिल हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी।

आयुष का वीडियो और उनके आरोप

आयुष मलिक ने अपने वीडियो में कहा कि पाँच-छह दिन पहले उन्होंने अपनी माँ से बात की थी और पूछा था कि यह विवाद कहाँ से आ गया। उन्होंने अपने पिता पर सीधे आरोप लगाया — 'जिस तरह की बात बाबूजी उठा रहे हैं, यह तो शामली और अलग-अलग शहरों में भी दंगे करवाने की बात है।'

आयुष ने यह भी कहा कि वे बिल्कुल ठीक और खुश हैं। संपत्ति-विवाद की किसी भी अटकल को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया — 'प्रॉपर्टी कल भी उनकी थी, आज भी उनकी है, इस बात से वो बिल्कुल बेफिक्र रहें।'

मामले का सामाजिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ी हुई है। शामली जैसे जनपद, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित है, में सांप्रदायिक समीकरण अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। गौरतलब है कि इस प्रकरण में एक ही परिवार के सदस्य आपस में परस्पर विरोधी बयान दे रहे हैं, जो मामले की जटिलता को और बढ़ा देता है।

आगे क्या होगा

फिलहाल सुल्तान कारी और मुफ्ती अब्दुल्लाह के खिलाफ दर्ज मामले में पुलिस जाँच जारी है। आयुष मलिक के वीडियो के सामने आने के बाद यह देखना होगा कि पुलिस और न्यायिक तंत्र इस नई परिस्थिति में क्या कदम उठाते हैं। इस पूरे प्रकरण में कई पक्षों के दावे अभी भी जाँच के दायरे में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी मुकदमों की शृंखला थमने का नाम नहीं ले रही। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जहाँ सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीतिक उपयोगिता पहले से सिद्ध हो चुकी है, वहाँ इस तरह के मामलों को व्यक्तिगत अधिकारों के दायरे में देखे जाने की ज़रूरत है, न कि सामूहिक पहचान की लड़ाई के रूप में। प्रशासन और न्यायतंत्र दोनों की ज़िम्मेदारी है कि वे इस मामले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संवैधानिक ढाँचे में ही सुलझाएँ।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शामली धर्मांतरण प्रकरण क्या है?
यह उत्तर प्रदेश के शामली जनपद का एक विवादास्पद मामला है, जिसमें दवा व्यवसायी देवराज मलिक ने चांदनी कुरैशी और उनके परिजनों पर अपने बेटे आयुष का जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया था। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया, लेकिन बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष को स्वतंत्र वयस्क घोषित किया।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या आदेश दिया?
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि आयुष मलिक एक वयस्क नागरिक है और उसे किसी भी धर्म को अपनाने, कहीं भी रहने तथा स्वतंत्र रूप से आने-जाने का संवैधानिक अधिकार है। इस आदेश के बाद आयुष अपने पारिवारिक घर नहीं लौटे।
देवराज मलिक ने सुल्तान कारी और मुफ्ती अब्दुल्लाह पर क्या आरोप लगाए हैं?
देवराज मलिक ने आरोप लगाया है कि सुल्तान कारी और मुफ्ती अब्दुल्लाह, दारुल उलूम देवबंद ने मिलकर उनके बेटे आयुष का पुनः धर्मांतरण कराया और वे इस कथित षड्यंत्र में शामिल हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
आयुष मलिक ने अपने वीडियो में क्या कहा?
आयुष मलिक ने वीडियो में अपने पिता के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे बिल्कुल ठीक और खुश हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके पिता की बातें शामली और अन्य शहरों में दंगा भड़काने की कोशिश हैं, और संपत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं है।
इस मामले में अब आगे क्या होने की संभावना है?
सुल्तान कारी और मुफ्ती अब्दुल्लाह के खिलाफ दर्ज मामले में पुलिस जाँच जारी है। आयुष के वीडियो सामने आने के बाद यह देखना होगा कि पुलिस और न्यायतंत्र इस नई स्थिति में क्या कदम उठाते हैं, क्योंकि कई पक्षों के दावे अभी भी जाँच के दायरे में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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