11 जुलाई 2026
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शिमला के बोथवेल में भूस्खलन: कई घर खतरे में, प्रशासन की निष्क्रियता पर भड़के निवासी

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शिमला के बोथवेल में भूस्खलन: कई घर खतरे में, प्रशासन की निष्क्रियता पर भड़के निवासी

सारांश

शिमला के बोथवेल में 11 जुलाई की तड़के भूस्खलन ने कई घरों को खतरे में डाल दिया — और यह पहली बार नहीं है। 28 जून 2025 को भी यहीं तबाही मची थी। इस बार भी प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि निवासी नगर निगम द्वारा अनुमत खुदाई को इसकी वजह बता रहे हैं।

मुख्य बातें

शिमला के बोथवेल इलाके में 11 जुलाई 2026 की तड़के रात 3-4 बजे भीषण भूस्खलन हुआ।
अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं, लेकिन कई मकान खतरे की जद में हैं।
स्थानीय निवासी पूनम चटक सहित अन्य लोगों ने बताया कि पुलिस केवल 5 मिनट रुककर चली गई।
पार्षद, विधायक और महापौर ने बार-बार फोन करने के बावजूद कॉल नहीं उठाई।
निवासियों का आरोप — नगर निगम द्वारा अनुमत निजी निर्माण परियोजना की पहाड़ी खुदाई ज़िम्मेदार।
इससे पहले 28 जून 2025 को भी इसी स्थान पर बड़ा भूस्खलन हो चुका है।

शिमला के संजौली कॉलेज के निकट बोथवेल इलाके में 11 जुलाई 2026 की तड़के रात 3 से 4 बजे के बीच भीषण भूस्खलन हुआ, जिसने क्षेत्र के कई मकानों को खतरे की जद में ला दिया। स्थानीय निवासियों के अनुसार चट्टानें और मिट्टी लगातार खिसक रही हैं तथा अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, परंतु दहशत का माहौल बना हुआ है।

मुख्य घटनाक्रम

स्थानीय निवासी पूनम चटक ने बताया कि भूस्खलन सुबह करीब 3 से 4 बजे के बीच शुरू हुआ। उन्होंने कहा, 'लगातार चट्टानें गिर रही हैं, मिट्टी खिसक रही है और भूस्खलन अभी भी जारी है। यहाँ बने सभी घर खतरे में हैं।' एक अन्य निवासी ने भी पुष्टि की कि पहाड़ी से अचानक पत्थर और मिट्टी गिरनी शुरू हुई, जिससे कई परिवारों में भय व्याप्त हो गया।

प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सवाल

निवासियों का आरोप है कि घटना की सूचना देने के बावजूद पुलिस मौके पर केवल पाँच मिनट रुककर चली गई और जिला प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी अब तक नहीं पहुँचा। स्थानीय लोगों ने पार्षद, विधायक और महापौर सहित जनप्रतिनिधियों को बार-बार फोन किया, लेकिन किसी ने कॉल नहीं उठाई। निवासियों ने जिला प्रशासन से तत्काल राहत, सुरक्षा उपाय और बड़े हादसे की रोकथाम की माँग की है।

निर्माण गतिविधि पर आरोप

निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम ने इलाके में एक निजी निर्माण परियोजना को अनुमति दी थी, जिसके तहत पहाड़ी की बड़े पैमाने पर खुदाई की गई। आलोचकों का कहना है कि यह अनियंत्रित निर्माण गतिविधि भूस्खलन की संवेदनशीलता को बढ़ाने में सहायक रही है।

पूर्व घटना से तुलना

गौरतलब है कि 28 जून 2025 को भी इसी स्थान पर बड़ा भूस्खलन हो चुका है, जब भारी मलबा और चट्टानें रिहायशी मकानों पर गिरी थीं और कई महिलाएँ व बच्चे मलबे में फँस गए थे। यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश में मानसून के कारण भूस्खलन की घटनाएँ पहले से ही बढ़ी हुई हैं। निवासियों को आशंका है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और विकट हो सकती है।

आगे क्या होगा

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल भू-तकनीकी सर्वेक्षण, प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने और संबंधित निर्माण परियोजना की जाँच कराने की माँग की है। यह देखना होगा कि प्रशासन इस बार कितनी तेज़ी से प्रतिक्रिया देता है — क्योंकि पिछली बार की देरी पहले ही सवालों के घेरे में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सवाल उठता है कि आपदा-प्रबंधन की मशीनरी केवल कागज़ों पर है या ज़मीन पर भी। नगर निगम द्वारा संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में निर्माण की अनुमति देना और फिर हादसे के बाद जनप्रतिनिधियों का फोन न उठाना — यह जवाबदेही की गंभीर कमी को उजागर करता है। शिमला जैसे पहाड़ी शहर में, जहाँ भूगर्भीय संवेदनशीलता पहले से ज्ञात है, ऐसी बार-बार की घटनाएँ बताती हैं कि नीति और क्रियान्वयन के बीच की खाई अभी भी नहीं पाटी गई है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिमला के बोथवेल में भूस्खलन कब और कहाँ हुआ?
यह भूस्खलन 11 जुलाई 2026 की तड़के रात 3 से 4 बजे के बीच शिमला के संजौली कॉलेज के पास स्थित बोथवेल इलाके में हुआ। चट्टानें और मिट्टी खिसकने से कई मकान खतरे में आ गए।
क्या भूस्खलन में कोई हताहत हुआ?
निवासियों के अनुसार अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। हालाँकि कई घरों पर खतरा बना हुआ है और भूस्खलन जारी रहने की बात कही जा रही है।
प्रशासन ने भूस्खलन पर क्या कार्रवाई की?
निवासियों का आरोप है कि पुलिस मौके पर केवल पाँच मिनट रुककर चली गई और जिला प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी नहीं पहुँचा। पार्षद, विधायक और महापौर ने भी फोन नहीं उठाया।
क्या इस इलाके में पहले भी भूस्खलन हो चुका है?
हाँ, 28 जून 2025 को भी इसी बोथवेल इलाके में बड़ा भूस्खलन हुआ था, जिसमें मलबा और चट्टानें रिहायशी मकानों पर गिरी थीं और महिलाएँ व बच्चे मलबे में फँस गए थे।
निवासी भूस्खलन के लिए किसे ज़िम्मेदार मान रहे हैं?
निवासियों का आरोप है कि नगर निगम ने इलाके में एक निजी निर्माण परियोजना को अनुमति दी, जिसके तहत पहाड़ी की बड़े पैमाने पर खुदाई की गई। उनका मानना है कि यही खुदाई भूस्खलन की संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार है।
राष्ट्र प्रेस
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