शिमला में राम मंदिर हॉल में निकाह समारोह को लेकर हिंदू संगठनों का विरोध बढ़ा

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शिमला में राम मंदिर हॉल में निकाह समारोह को लेकर हिंदू संगठनों का विरोध बढ़ा

सारांश

शिमला के राम मंदिर परिसर में प्रस्तावित निकाह समारोह को लेकर हिंदू संगठनों ने खुलकर विरोध किया है। क्या यह धार्मिक सहिष्णुता का मामला है, या यह एक नई विवाद की शुरुआत?

Key Takeaways

  • शिमला में निकाह समारोह पर विवाद गहरा हुआ है।
  • हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
  • मंदिर प्रशासन ने सभी धर्मों का सम्मान करने की बात की है।
  • यह मामला धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक बनता जा रहा है।
  • समारोह में शामिल दूल्हा-दुल्हन मुस्लिम हैं।

शिमला, ७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शिमला के राम मंदिर परिसर में स्थित एक हॉल में प्रस्तावित ‘निकाह’ समारोह को लेकर विरोध का माहौल बन गया है। कई हिंदू संगठनों ने इस पर कड़ा एतराज जताया है।

हिंदू संगठनों ने इस मुद्दे को अनुचित बताया है और चेतावनी दी है कि यदि कार्यक्रम योजना के अनुसार हुआ, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे।

यह मामला औपचारिक रूप से मंदिर प्रबंधन के समक्ष भी उठाया गया है। हिंदू संगठनों ने प्रबंध समिति सूद सभा के सामने अपना विरोध दर्ज कराया है। मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों के बयानों के बाद स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।

शिमला के ईदगाह कॉलोनी के निवासी मोहम्मद नासिर अपनी बेटी का निकाह राम मंदिर हॉल में आयोजित करना चाहते थे। इस प्रस्ताव का हिंदू संघर्ष समिति ने कड़ा विरोध किया है और खुलकर इसका एतराज किया है।

हिंदू संघर्ष समिति का कहना है कि मंदिर परिसर में किसी मुस्लिम परिवार को शादी की अनुमति देना स्वीकार्य नहीं है। यदि समारोह रद्द नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

समिति के नेता मदन ठाकुर ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि वे प्रतीकात्मक विरोध करेंगे, जिसमें ‘मुंडन’ (सिर मुंडवाना) और प्रदर्शन शामिल हो सकते हैं।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत में ठाकुर ने कहा, "यह हिंदुओं की भावनाओं को भड़काने की सोची-समझी कोशिश है। कुछ लोग थोड़े पैसे के लिए इसमें शामिल हैं। अगर भाईचारे की बात है, तो हमें भी मस्जिदों में हनुमान चालीसा और जागरण करने की अनुमति मिलनी चाहिए।"

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 'हिंदू विरोधी' गतिविधियां नहीं रोकी गईं, तो ११ अप्रैल को उसी स्थान पर विरोध मार्च निकाला जाएगा और प्रतिभागी मुंडन करेंगे।

इस विवाद के बीच सूद सभा ने अलग रुख अपनाया है। समिति के प्रमुख राजीव सूद ने कहा कि संगठन सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान करता है और इस स्थान पर पहले भी ऐसे कार्यक्रम हो चुके हैं।

राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए राजीव सूद ने कहा, "मंदिर परिसर में किसी भी हालत में मांस, मछली और शराब का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है। हिंदुओं की भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। संघर्ष समिति ने ज्ञापन दिया है, जिसके बाद आज एक बैठक बुलाई गई है ताकि आगे का फैसला लिया जा सके। दूल्हा-दुल्हन दोनों मुस्लिम हैं और शादी मंदिर के अंदर नहीं, बल्कि उसके बड़े परिसर के एक हॉल में हो रही है।"

उन्होंने यह भी कहा कि भारत का संविधान और सूद सभा के नियम धर्म के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देते। उन्होंने बताया कि आपसी विचार-विमर्श के बाद इस मामले पर जल्द ही अंतिम फैसला घोषित किया जाएगा।

Point of View

लेकिन इसके साथ ही यह विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच बढ़ते तनाव को भी दर्शाता है। सभी पक्षों को एक-दूसरे के भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
NationPress
13/04/2026

Frequently Asked Questions

राम मंदिर हॉल में प्रस्तावित निकाह समारोह के बारे में क्या जानकारी है?
यह समारोह एक मुस्लिम परिवार द्वारा प्रस्तावित किया गया है, जिसे कई हिंदू संगठनों ने विरोध किया है।
हिंदू संगठनों का इस पर क्या रुख है?
हिंदू संगठनों ने इसे अनुचित बताते हुए विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
क्या इस समारोह में कोई अन्य धार्मिक समूह शामिल है?
इस समारोह में केवल मुस्लिम दूल्हा-दुल्हन शामिल हैं।
क्या मंदिर प्रशासन ने इस मामले पर कोई बयान दिया है?
हाँ, मंदिर प्रशासन ने कहा है कि सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
क्या यह मामला कानूनी विवाद बन सकता है?
यह मामला धार्मिक सहिष्णुता के मुद्दे पर कानूनी विवाद का विषय बन सकता है।
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