राम मंदिर ट्रस्ट भंग हो, साधु-संतों को सौंपा जाए: UP कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने 30 जुलाई को मांग की कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए और इसकी देखरेख साधु-संतों तथा शंकराचार्यों को सौंपी जाए। उन्होंने चढ़ावे में हेरफेर के आरोपों को 'अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा कि ट्रस्ट में शामिल लोगों ने भगवान राम के नाम को कलंकित किया है।
ट्रस्ट पर क्या हैं आरोप
राय के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट की स्थापना पुण्य के उद्देश्य से की गई थी, किंतु कथित तौर पर चढ़ावे के साथ छेड़छाड़ की गई। उन्होंने कहा कि जो लोग राम के नाम पर सत्ता में आए, उन्होंने बाद में भगवान राम की छवि को ही नुकसान पहुँचाने का काम किया — जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
ट्रस्ट पुनर्गठन की मांग
राय ने स्पष्ट किया कि उनकी राय में मौजूदा ट्रस्ट को भंग कर उसे शंकराचार्यों और साधु-संतों के अधीन लाया जाए, ताकि संस्था की धार्मिक शुचिता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या के स्थानीय निवासियों को ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, क्योंकि वे भगवान राम की धरोहर के वास्तविक वाहक हैं।
भदोही नामकरण पर तीखी प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर रखने की घोषणा पर राय ने कहा कि यह सरकार सत्ता में आने के बाद से केवल नाम बदलने का काम कर रही है। उन्होंने कहा, 'नाम बदलने से विकास नहीं होता — इसके लिए धरातल पर उतरना होगा।' उन्होंने विशेष रूप से कालीन उद्योग की दुर्दशा का उल्लेख किया और कहा कि भदोही की कालीन फैक्ट्रियाँ हरियाणा और अन्य राज्यों में स्थानांतरित हो चुकी हैं, जिससे स्थानीय रोज़गार पर गहरा असर पड़ा है।
हॉकी जर्सी विवाद पर राय का रुख
राय ने भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से नारंगी (ऑरेंज) किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि खेल को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए और सरकार को यह आदेश वापस लेकर जर्सी का रंग पुनः नीला करना चाहिए, क्योंकि इससे देशभर के खेलप्रेमियों की भावनाएँ जुड़ी हैं।
कांवड़ यात्रा पर समर्थन
सावन माह में कांवड़ यात्रा की परंपरा का समर्थन करते हुए राय ने कहा कि यह सदियों पुरानी आस्था की परंपरा है, जिससे किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए और इसमें भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को सम्मानित किया जाना चाहिए। आगे की राजनीतिक घटनाक्रम पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी, विशेष रूप से यह देखना होगा कि ट्रस्ट और सरकार इन माँगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।