शिवसेना की मांग: 'कॉकरोच जनता पार्टी' के उदय की एनआईए जांच हो, राहुल गांधी की भूमिका भी जाँचे
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने शुक्रवार, 22 मई को मुंबई में मांग की कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को डिजिटल व्यंग्य संगठन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के अचानक उभार की जांच करनी चाहिए। उनका कहना है कि इंस्टाग्राम पर 1.5 करोड़ फॉलोअर्स हासिल करने वाले इस संगठन के पीछे देश में अशांति फैलाने की कोई सुनियोजित कोशिश हो सकती है।
मुख्य आरोप और मांग
हेगड़े ने कहा कि एनआईए को यह पता लगाना चाहिए कि एक व्यंग्य पेज को इतनी तेज़ी से 1.5 करोड़ फॉलोअर्स कैसे मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसके पीछे भारत में अराजकता फैलाने की कोई सोची-समझी रणनीति है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की इसमें संभावित भूमिका की भी जांच होनी चाहिए — चाहे वे इसमें शामिल हों या न हों।
सीजेपी का उदय: पृष्ठभूमि
यह विवाद 15 मई को एक अदालती सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणियों के बाद उपजे विवाद के बीच सामने आया, जिसके बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' नामक यह व्यंग्य आंदोलन तेज़ी से वायरल हो गया। गौरतलब है कि सीजेपी केवल इंस्टाग्राम और एक्स जैसे डिजिटल माध्यमों पर सक्रिय है और इसका कोई औपचारिक राजनीतिक ढाँचा नहीं है।
बांग्लादेश-नेपाल से तुलना
हेगड़े ने बांग्लादेश और नेपाल में जेन-ज़ी (युवा पीढ़ी) के नेतृत्व में हुए विद्रोह का हवाला देते हुए कहा कि एनआईए जांच यह स्पष्ट करेगी कि भारत में भी इसी तरह की अशांति फैलाने की कोशिश हो रही है या नहीं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सीजेपी के इंस्टाग्राम और एक्स अकाउंट का संचालन कर रहा था, उसकी पहचान और उद्देश्य की भी जांच होनी चाहिए।
गाय तस्करी पर मकोका: शिवसेना का स्वागत
इसी प्रेस वार्ता में हेगड़े ने महाराष्ट्र में गाय तस्करों के खिलाफ 'महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम' (मकोका) लागू किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि 'गाय हमारी माता है और इस जानवर की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।' उन्होंने बताया कि राज्य की सीमाओं पर चेक पोस्ट लगाए जाएंगे और सीमा सुरक्षा बल से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा जाएगा।
आगे क्या
फिलहाल एनआईए की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। शिवसेना की यह मांग ऐसे समय में आई है जब सोशल मीडिया पर राजनीतिक व्यंग्य और डिजिटल आंदोलनों को लेकर बहस तेज़ हो रही है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार और एनआईए इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं।