19 अक्टूबर 2026
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बालुरघाट में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा का अनावरण, सुकांत मजूमदार ने दी श्रद्धांजलि

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बालुरघाट में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा का अनावरण, सुकांत मजूमदार ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

बालुरघाट के बीजेपी मोड़ पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा स्थापित की गई। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने दुर्गा पूजा की अष्टमी-नवमी के शुभ संयोग पर यह अनावरण किया और 'एक देश, एक विधान, एक निशान' की विरासत को याद किया।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री व बालुरघाट सांसद सुकांत मजूमदार ने 19 अक्टूबर 2026 को बालुरघाट के बीजेपी मोड़ पर डॉ.
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा का अनावरण किया।
समारोह दुर्गा पूजा की अष्टमी और नवमी तिथियों के संयोग पर आयोजित हुआ।
मुखर्जी को पश्चिम बंगाल का निर्माता बताया और 'एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे' के नारे को याद किया।
बड़ी संख्या में BJP कार्यकर्ताओं ने 'डॉ.
श्यामा प्रसाद मुखर्जी अमर रहें' के नारे लगाए।
प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उपस्थित नेताओं ने डॉ.
मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी।

केंद्रीय मंत्री और बालुरघाट से सांसद सुकांत मजूमदार ने 19 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल के बालुरघाट स्थित बीजेपी मोड़ पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने 'एक देश, एक कानून' की अवधारणा में डॉ. मुखर्जी के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। समारोह में बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता और स्थानीय समर्थक उपस्थित रहे।

समारोह का आयोजन

यह प्रतिमा अनावरण ऐसे शुभ अवसर पर हुआ जब दुर्गा पूजा की अष्टमी और नवमी दोनों तिथियाँ एक ही दिन पड़ रही थीं। पूरे परिसर को फूलों और गुब्बारों से सजाया गया था। उपस्थित नेताओं ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। भाजपा कार्यकर्ताओं ने 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अमर रहें' के नारे लगाकर समारोह को उत्साहपूर्ण बनाया।

सुकांत मजूमदार के उद्गार

प्रतिमा अनावरण के बाद सुकांत मजूमदार ने कहा, 'बालुरघाट के बीजेपी मोड़ इलाके में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्य मूर्ति की स्थापना हुई है। यह स्थापना एक पुण्य दिन पर हुई है, जिस दिन दुर्गा पूजा की अष्टमी और नवमी दोनों तिथियाँ हैं। आज पूरे जोश के साथ डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा स्थापित की गई है।'

उन्होंने यह भी कहा, 'हम मानते हैं कि पश्चिम बंगाल के निर्माता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी हैं, जिन्होंने 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान, नहीं चलेंगे' का नारा दिया था। उनकी प्रतिमा स्थापित कर हम पश्चिम बंगाल के निर्माण में उनके योगदान को थोड़ा सम्मान दे पाए हैं। इसके लिए हम खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं।'

डॉ. मुखर्जी का वैचारिक योगदान

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। मजूमदार के अनुसार, 'एक देश, एक विधान, एक निशान' का उनका विचार आज 'एक राष्ट्र, एक कानून' की अवधारणा की नींव है। गौरतलब है कि डॉ. मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में से एक थे और उन्हें BJP की वैचारिक परंपरा में एक आधारभूत व्यक्तित्व माना जाता है।

मजूमदार ने कहा कि बंगाल के लोगों को डॉ. मुखर्जी का यह बलिदान कभी नहीं भूलना चाहिए। यह अनावरण समारोह पश्चिम बंगाल में BJP के संगठनात्मक सक्रियता का भी प्रतीक है, जहाँ पार्टी ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के स्मरण के ज़रिए अपनी वैचारिक जड़ों को जनता तक पहुँचाने का प्रयास करती रही है।

आगे क्या

यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम बंगाल में BJP अपनी उपस्थिति को और मज़बूत करने के लिए सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रतीकों का सहारा ले रही है। प्रतिमा स्थापना जैसे कार्यक्रम पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने और जनता के बीच संगठन की सक्रियता दिखाने का माध्यम बनते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक विधान' की विरासत को अनुच्छेद 370 के निरसन और समान नागरिक संहिता की बहस से जोड़ना, BJP की उस कोशिश को दर्शाता है कि वह अपनी नीतियों को ऐतिहासिक वैधता दे। हालाँकि, पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वर्चस्व के बीच इस तरह के प्रतीकात्मक आयोजन ज़मीनी समीकरण कितना बदल पाते हैं, यह देखना होगा।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कौन थे?
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक著名 भारतीय राजनेता, विद्वान और भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में से एक थे। उन्होंने 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे' का नारा देकर कश्मीर में अनुच्छेद 370 के विरोध में आंदोलन किया था।
बालुरघाट में प्रतिमा का अनावरण किसने किया?
केंद्रीय मंत्री और बालुरघाट से सांसद सुकांत मजूमदार ने 19 अक्टूबर 2026 को बालुरघाट के बीजेपी मोड़ पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा का अनावरण किया।
प्रतिमा अनावरण का दिन विशेष क्यों था?
सांसद सुकांत मजूमदार के अनुसार, यह प्रतिमा अनावरण ऐसे दिन हुआ जब दुर्गा पूजा की अष्टमी और नवमी दोनों तिथियाँ एक साथ पड़ रही थीं, जिसे उन्होंने शुभ और पुण्य अवसर बताया।
सुकांत मजूमदार ने डॉ. मुखर्जी के किस योगदान को याद किया?
मजूमदार ने कहा कि डॉ. मुखर्जी को पश्चिम बंगाल का निर्माता माना जाता है और उनका 'एक देश, एक विधान, एक निशान' का विचार आज 'एक राष्ट्र, एक कानून' की अवधारणा की नींव है।
इस समारोह में कौन-कौन उपस्थित था?
समारोह में केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार के साथ बड़ी संख्या में BJP कार्यकर्ता और स्थानीय समर्थक उपस्थित रहे। कार्यकर्ताओं ने 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अमर रहें' के नारे लगाए और नेताओं ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
राष्ट्र प्रेस
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