22 अक्टूबर 2026
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परविंदर सिंह झोटा को श्रद्धांजलि सूची से बाहर रखने पर मनजिंदर सिंह सिरसा का भगवंत मान सरकार पर हमला

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परविंदर सिंह झोटा को श्रद्धांजलि सूची से बाहर रखने पर मनजिंदर सिंह सिरसा का भगवंत मान सरकार पर हमला

सारांश

पंजाब विधानसभा में 22 अक्टूबर की श्रद्धांजलि सूची से अकाल तख्त-मान्यता प्राप्त शहीद परविंदर सिंह झोटा का नाम हटाए जाने पर BJP नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भगवंत मान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नशा माफिया से लड़ने वालों को सरकार सम्मान देने में असमर्थ है।

मुख्य बातें

BJP नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने 21 अक्टूबर 2026 को भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोला।
पंजाब विधानसभा की 22 अक्टूबर को प्रस्तावित श्रद्धांजलि सूची में परविंदर सिंह झोटा का नाम शामिल नहीं किया गया।
श्री अकाल तख्त साहिब ने झोटा को शहीद का दर्जा दिया हुआ है।
सिरसा ने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि झोटा को नशा माफिया के खिलाफ लड़ने की 'सज़ा' दी जा रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हाल ही में पंजाब दौरे पर नशा पीड़ित परिवारों से मिले थे।

दिल्ली सरकार में मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने 21 अक्टूबर 2026 को पंजाब की भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोला। उनका आरोप है कि पंजाब विधानसभा में 22 अक्टूबर को प्रस्तावित श्रद्धांजलि सूची में परविंदर सिंह झोटा का नाम जानबूझकर नहीं जोड़ा गया, जबकि श्री अकाल तख्त साहिब ने उन्हें शहीद का दर्जा दे रखा है। सिरसा ने इसे नशा माफिया के खिलाफ लड़ने वालों के प्रति सरकारी उपेक्षा का प्रमाण बताया।

एक्स पर सिरसा का सवाल

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए सिरसा ने पूछा कि परविंदर सिंह झोटा का नाम श्रद्धांजलि सूची से क्यों हटाया गया। उन्होंने कहा, 'क्या उनकी एकमात्र गलती यह थी कि उन्होंने नशा माफिया के खिलाफ आवाज़ उठाई और पंजाब के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए संघर्ष किया?'

सिरसा ने यह भी दावा किया कि झोटा का नाम किसी कागज़ से तो हटाया जा सकता है, लेकिन पंजाब के लोगों के दिलों से नहीं मिटाया जा सकता।

आम आदमी पार्टी पर गंभीर आरोप

सिरसा ने आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके नेतृत्व पर आरोप लगाया कि जो लोग नशे के कारोबार के खिलाफ लड़ते हैं, उन्हें यह सरकार स्वीकार नहीं कर पा रही। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी कौन-सी मजबूरी है जिसके कारण सरकार एक कथित शहीद की बजाय नशा तस्करी से जुड़े तत्वों के पक्ष में खड़ी दिखती है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब में नशे के कारोबार और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से बढ़ा हुआ है।

अमित शाह की पंजाब यात्रा का संदर्भ

गौरतलब है कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब का दौरा किया था और उन परिवारों से मुलाकात की थी जिनके परिजनों की मृत्यु नशे और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ संघर्ष के दौरान हुई। BJP नेताओं ने उस यात्रा को केंद्र सरकार की संगठित अपराध और नशा माफिया के खिलाफ सख्त नीति का संकेत बताया था।

सिरसा ने इससे पहले भी दावा किया था कि केंद्र के बढ़ते दबाव के बाद पंजाब सरकार को कुछ मामलों में सीबीआई जाँच की घोषणा करनी पड़ी।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

परविंदर सिंह झोटा को श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा शहीद का दर्जा दिए जाने के बाद से यह मामला पंजाब की राजनीति में संवेदनशील हो गया है। विधानसभा की श्रद्धांजलि सूची में उनका नाम न होना BJP के लिए AAP सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा बन गया है।

BJP का आरोप है कि राज्य में नशे के कारोबार और अपराध को लेकर कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पार्टी का दावा है कि वह पंजाब को नशामुक्त बनाने और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए अभियान जारी रखेगी।

आगे क्या

22 अक्टूबर को पंजाब विधानसभा में होने वाली श्रद्धांजलि की कार्यवाही के दौरान यह मामला और तूल पकड़ सकता है। सिरसा के बयान से यह स्पष्ट है कि BJP इस मुद्दे को AAP सरकार के खिलाफ राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी जड़ें पंजाब की नशा-राजनीति के उस संवेदनशील धरातल में हैं जहाँ शहादत और राज्य की स्वीकृति दोनों विवादित हैं। अकाल तख्त जैसी धार्मिक सर्वोच्च संस्था की मान्यता और राज्य विधानसभा की उपेक्षा के बीच यह टकराव AAP सरकार के लिए सिख भावनाओं को लेकर एक नाज़ुक सवाल खड़ा करता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि BJP इस मुद्दे का इस्तेमाल न केवल AAP को घेरने के लिए, बल्कि पंजाब में अपनी धार्मिक-राजनीतिक पैठ बनाने के लिए कर रही है — अमित शाह की हालिया यात्रा उसी रणनीति का हिस्सा है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परविंदर सिंह झोटा कौन हैं और उनका नाम श्रद्धांजलि सूची में क्यों होना चाहिए?
परविंदर सिंह झोटा एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें श्री अकाल तख्त साहिब ने शहीद के रूप में मान्यता दी है। BJP के अनुसार, उन्होंने नशा माफिया के खिलाफ संघर्ष किया था और इसी कारण उन्हें पंजाब विधानसभा की आधिकारिक श्रद्धांजलि सूची में स्थान मिलना चाहिए था।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने भगवंत मान सरकार पर क्या आरोप लगाए?
सिरसा ने आरोप लगाया कि 22 अक्टूबर को पंजाब विधानसभा में प्रस्तावित श्रद्धांजलि सूची से झोटा का नाम जानबूझकर हटाया गया। उन्होंने दावा किया कि जो लोग नशे के कारोबार के खिलाफ लड़ते हैं, उन्हें मान सरकार सम्मान देने में असमर्थ है, जो नशा तस्करी से जुड़े तत्वों के साथ उसकी कथित निकटता का संकेत देता है।
क्या भगवंत मान सरकार ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भगवंत मान सरकार की ओर से इस विशेष आरोप पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमित शाह की पंजाब यात्रा का इस विवाद से क्या संबंध है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में पंजाब का दौरा किया था और नशे व गैंगस्टर नेटवर्क से पीड़ित परिवारों से मिले थे। BJP ने उस यात्रा को केंद्र की सख्त नशा-विरोधी नीति का प्रतीक बताया था, और सिरसा का ताज़ा बयान उसी राजनीतिक अभियान की अगली कड़ी माना जा रहा है।
यह मामला पंजाब की राजनीति में क्यों अहम है?
यह विवाद पंजाब में नशा-राजनीति, सिख धार्मिक भावनाओं और AAP-BJP के बीच सत्ता-संघर्ष के तीन धागों को एक साथ छूता है। अकाल तख्त द्वारा मान्यता प्राप्त शहीद की विधानसभा में उपेक्षा BJP को AAP सरकार पर धार्मिक और राजनीतिक — दोनों मोर्चों पर हमले का अवसर देती है।
राष्ट्र प्रेस
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