निर्मला सीतारमण ने मेघालय में पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी ऑर्गेनिक मसाला प्रोसेसिंग यूनिट का उद्घाटन किया
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 19 जून 2026 को मेघालय के री-भोई जिले के भोइरिमबोंग में पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी ऑर्गेनिक मसाला प्रोसेसिंग यूनिट का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा और सिक्किम के मुख्यमंत्री पी.एस. तमांग गोले भी उपस्थित रहे।
यूनिट की पहचान और संरचना
यह प्रोसेसिंग यूनिट ईस्टर्न री-भोई ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीसी) के अंतर्गत स्थापित की गई है — यह किसानों की अपनी कंपनी है। इसे केंद्र सरकार की योजना 'मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन' (एमओवीसीडी-एनईआर) के तहत प्रोत्साहित किया गया है। यह नॉर्थ-ईस्ट की पहली ऑर्गेनिक सर्टिफाइड मसाला प्रोसेसिंग यूनिट भी है।
यूनिट 'नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन' (एनपीओपी) और ईयू ऑर्गेनिक स्टैंडर्ड्स के तहत प्रमाणित है, जो इसे प्रीमियम घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक सीधी पहुँच प्रदान करती है।
क्षमता और बुनियादी ढाँचा
वित्त मंत्री सीतारमण के अनुसार, यह यूनिट प्रतिवर्ष 10,000 मीट्रिक टन से अधिक ऑर्गेनिक मसालों — जिनमें अदरक, हल्दी, काली मिर्च और मिर्च शामिल हैं — की प्रोसेसिंग करने में सक्षम है। एफपीसी ने कलेक्शन और एग्रीगेशन सेंटर, प्रोसेसिंग सुविधाएँ, कोल्ड स्टोरेज, वर्मीकम्पोस्ट यूनिट, हायरिंग सेंटर और परिवहन सुविधाएँ जैसा व्यापक बुनियादी ढाँचा तैयार किया है।
किसानों और क्षेत्र पर असर
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस प्रोसेसिंग सुविधा से मेघालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लगभग 5,500 ऑर्गेनिक किसानों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे ऑर्गेनिक उपज में वैल्यू एडिशन बेहतर होगी, आधुनिक स्टोरेज के ज़रिए कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी और एग्रीगेशन व गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली मज़बूत होगी। गौरतलब है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधे जुड़ाव से बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है।
बयान में यह भी कहा गया है कि प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में स्थानीय रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और पूर्वोत्तर से सर्टिफाइड ऑर्गेनिक उत्पादों के निर्यात को बल मिलेगा।
भारत-ईयू एफटीए और निर्यात संभावनाएँ
स्पाइसेस बोर्ड इंडिया के अनुसार, भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से भारतीय मसालों के निर्यात के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। बेहतर बाज़ार पहुँच, नियामक सहयोग और व्यापारिक निश्चितता से निर्यातकों, किसानों और एमएसएमई को फायदा होने की संभावना है। यूरोपीय संघ भारतीय मसालों के लिए सबसे मूल्यवान और कड़े मानकों वाले बाज़ारों में से एक बना हुआ है, जहाँ प्रीमियम निर्यात में उसकी बड़ी हिस्सेदारी है।
आगे की राह
यह यूनिट पूर्वोत्तर में ऑर्गेनिक खेती के लिए एक महत्त्वपूर्ण संस्थागत आधार बनने की दिशा में अग्रसर है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि-आधारित निर्यात को प्राथमिकता दे रही है और क्षेत्र के किसानों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने के प्रयास तेज़ हो रहे हैं।