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झालावाड़ में वेश्यावृत्ति रैकेट का भंडाफोड़: 6 नाबालिग बच्चियाँ बचाई गईं, 5 गिरफ्तार

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झालावाड़ में वेश्यावृत्ति रैकेट का भंडाफोड़: 6 नाबालिग बच्चियाँ बचाई गईं, 5 गिरफ्तार

सारांश

राजस्थान के झालावाड़ जिले में पुलिस ने पारंपरिक बस्तियों की आड़ में चल रहे देह व्यापार रैकेट का भंडाफोड़ किया। 100 से अधिक जवानों और एसआईटी की गुप्त कार्रवाई में 6 नाबालिग लड़कियाँ बचाई गईं, 5 गिरफ्तार। गंभीर बात यह है कि आरोपियों में पीड़िताओं की माताएँ भी शामिल हैं।

मुख्य बातें

राजस्थान पुलिस ने झालावाड़ के भवानीमंडी में देह व्यापार रैकेट का भंडाफोड़ कर 12 से 17 वर्ष की 6 नाबालिग लड़कियाँ बचाईं।
5 आरोपी गिरफ्तार ; इनमें कुछ पीड़िताओं की माताएँ और कथित बिचौलिए शामिल।
मेडिकल बोर्ड ने 5 बच्चियों के बार-बार यौन शोषण की पुष्टि की; 2 लड़कियाँ एसटीआई से पीड़ित पाई गईं।
7 अक्टूबर को गुप्त शिकायत के बाद जाँच शुरू; एसआईटी का नेतृत्व प्रोबेशनरी आईपीएस आयुष श्रोत्रिय ने किया।
फोरेंसिक जाँच में चार मामलों में मिश्रित पुरुष डीएनए की पुष्टि; एफएसएल ने 24 घंटे में रिपोर्ट सौंपी।
पोक्सो एक्ट और इम्मोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज; सभी बच्चियाँ बालिका आश्रय गृह में भेजी गईं।

राजस्थान पुलिस ने 7 नवंबर 2026 को झालावाड़ जिले के भवानीमंडी इलाके में पारंपरिक बस्तियों (डेरों) की आड़ में संचालित एक देह व्यापार रैकेट का भंडाफोड़ किया और 12 से 17 वर्ष की छह नाबालिग लड़कियों को बचाया। इस मामले में पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कुछ पीड़िताओं की माताएँ और कथित बिचौलिए शामिल हैं। मेडिकल बोर्ड की जाँच में पाँच बच्चियों के साथ बार-बार यौन शोषण की पुष्टि हुई है, जबकि दो लड़कियाँ यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) से पीड़ित पाई गई हैं।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

एसपी अमित बुढानिया के अनुसार, 7 अक्टूबर को एक गुप्त शिकायत मिलने के बाद जाँच शुरू की गई थी। प्रारंभिक जाँच से सामने आया कि भवानीमंडी की बस्तियों में रहने वाले परिवार पारंपरिक रीति-रिवाजों की आड़ में अपनी नाबालिग बेटियों को देह व्यापार के लिए बाध्य कर रहे थे। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें परिवार के सदस्यों द्वारा ही अपनी बच्चियों की तस्करी करने की बात सामने आई है।

विशेष जाँच दल और गुप्त ऑपरेशन

रैकेट की गहराई को भाँपते हुए पुलिस ने प्रोबेशनरी आईपीएस अधिकारी आयुष श्रोत्रिय के नेतृत्व में एक विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी के दो सदस्यों को गुप्त रूप से बस्तियों में तैनात किया गया। कथित तौर पर इस ऑपरेशन के दौरान देह व्यापार रैकेट से जुड़े लेन-देन के डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए गए।

इन सबूतों के आधार पर पुलिस ने 15 टीमों में 100 से अधिक जवानों को तैनात किया और बस्तियों में एक साथ छापेमारी की, जिसमें छह नाबालिग लड़कियाँ बचाई गईं।

फोरेंसिक साक्ष्य और मेडिकल निष्कर्ष

फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम ने मौके से आपत्तिजनक सामग्री जब्त की और 24 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप दी। फोरेंसिक विश्लेषण में चार मामलों की रिपोर्टों में मिश्रित पुरुष डीएनए की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जो जाँच के लिए अहम साक्ष्य माना जा रहा है। गौरतलब है कि इस त्वरित फोरेंसिक प्रतिक्रिया ने आरोप-पत्र को मज़बूत आधार दिया है।

कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारियाँ

पुलिस ने 'इम्मोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट' की धाराओं 3, 4 और 5 तथा 'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस' (पोक्सो) एक्ट की धाराओं 5/6, 11/12 और 17 के तहत मामला दर्ज किया है। पाँचों आरोपियों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर रखा गया है और उनसे पूछताछ जारी है।

पीड़िताओं का पुनर्वास और आगे की जाँच

बचाई गई सभी छह बच्चियों को सुरक्षा और देखभाल के लिए एक बालिका आश्रय गृह में भेज दिया गया है। जाँचकर्ता इस रैकेट के पूरे दायरे का पता लगाने और उन अन्य लोगों की पहचान करने में जुटे हैं जो नाबालिग लड़कियों के शोषण और तस्करी में शामिल हो सकते हैं। यह मामला राजस्थान में बाल तस्करी-रोधी तंत्र और पारंपरिक समुदायों में बालिका संरक्षण की व्यापक चुनौती को एक बार फिर सामने लाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी संरचनात्मक हस्तक्षेप की कमी बनी हुई है। गिरफ्तारियाँ ज़रूरी हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या बचाई गई बच्चियों को दीर्घकालिक पुनर्वास, शिक्षा और मनोवैज्ञानिक सहायता मिलेगी — या वे महज़ एक और बंद फाइल बन जाएँगी। रैकेट के 'पूरे दायरे' की जाँच का दावा तब तक अधूरा है जब तक ग्राहकों की पहचान और उन पर कार्रवाई सार्वजनिक नहीं होती।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झालावाड़ वेश्यावृत्ति रैकेट मामले में क्या हुआ?
राजस्थान पुलिस ने झालावाड़ जिले के भवानीमंडी इलाके में पारंपरिक बस्तियों की आड़ में चल रहे देह व्यापार रैकेट का भंडाफोड़ किया और 12 से 17 वर्ष की छह नाबालिग लड़कियों को बचाया। पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कुछ पीड़िताओं की माताएँ भी शामिल हैं।
इस मामले में कितनी और कौन-कौन सी धाराएँ लगाई गई हैं?
पुलिस ने 'इम्मोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट' की धाराओं 3, 4 और 5 तथा पोक्सो एक्ट की धाराओं 5/6, 11/12 और 17 के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएँ बच्चों के यौन शोषण और देह व्यापार के गंभीर मामलों में लागू होती हैं।
एसआईटी ने किस तरह से इस रैकेट का पर्दाफाश किया?
प्रोबेशनरी आईपीएस अधिकारी आयुष श्रोत्रिय के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने दो सदस्यों को गुप्त रूप से बस्तियों में तैनात किया और डिजिटल साक्ष्य जुटाए। इसके बाद 15 टीमों में 100 से अधिक जवानों के साथ एक साथ छापेमारी की गई।
बचाई गई बच्चियों को अब कहाँ रखा गया है?
सभी छह नाबालिग बच्चियों को सुरक्षा और पुनर्वास के लिए एक बालिका आश्रय गृह में भेज दिया गया है। उनकी मेडिकल जाँच की जा चुकी है और आगे की देखभाल की व्यवस्था की जा रही है।
क्या इस रैकेट में और लोग शामिल हो सकते हैं?
पुलिस के अनुसार जाँच अभी जारी है और पाँचों आरोपी तीन दिन की रिमांड पर हैं। अधिकारी रैकेट के पूरे दायरे और उन अन्य लोगों की पहचान करने में जुटे हैं जो इस शोषण और तस्करी में शामिल हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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