झालावाड़ में वेश्यावृत्ति रैकेट का भंडाफोड़: 6 नाबालिग बच्चियाँ बचाई गईं, 5 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान पुलिस ने 7 नवंबर 2026 को झालावाड़ जिले के भवानीमंडी इलाके में पारंपरिक बस्तियों (डेरों) की आड़ में संचालित एक देह व्यापार रैकेट का भंडाफोड़ किया और 12 से 17 वर्ष की छह नाबालिग लड़कियों को बचाया। इस मामले में पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कुछ पीड़िताओं की माताएँ और कथित बिचौलिए शामिल हैं। मेडिकल बोर्ड की जाँच में पाँच बच्चियों के साथ बार-बार यौन शोषण की पुष्टि हुई है, जबकि दो लड़कियाँ यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) से पीड़ित पाई गई हैं।
मामले की शुरुआत कैसे हुई
एसपी अमित बुढानिया के अनुसार, 7 अक्टूबर को एक गुप्त शिकायत मिलने के बाद जाँच शुरू की गई थी। प्रारंभिक जाँच से सामने आया कि भवानीमंडी की बस्तियों में रहने वाले परिवार पारंपरिक रीति-रिवाजों की आड़ में अपनी नाबालिग बेटियों को देह व्यापार के लिए बाध्य कर रहे थे। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें परिवार के सदस्यों द्वारा ही अपनी बच्चियों की तस्करी करने की बात सामने आई है।
विशेष जाँच दल और गुप्त ऑपरेशन
रैकेट की गहराई को भाँपते हुए पुलिस ने प्रोबेशनरी आईपीएस अधिकारी आयुष श्रोत्रिय के नेतृत्व में एक विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी के दो सदस्यों को गुप्त रूप से बस्तियों में तैनात किया गया। कथित तौर पर इस ऑपरेशन के दौरान देह व्यापार रैकेट से जुड़े लेन-देन के डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए गए।
इन सबूतों के आधार पर पुलिस ने 15 टीमों में 100 से अधिक जवानों को तैनात किया और बस्तियों में एक साथ छापेमारी की, जिसमें छह नाबालिग लड़कियाँ बचाई गईं।
फोरेंसिक साक्ष्य और मेडिकल निष्कर्ष
फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम ने मौके से आपत्तिजनक सामग्री जब्त की और 24 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप दी। फोरेंसिक विश्लेषण में चार मामलों की रिपोर्टों में मिश्रित पुरुष डीएनए की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जो जाँच के लिए अहम साक्ष्य माना जा रहा है। गौरतलब है कि इस त्वरित फोरेंसिक प्रतिक्रिया ने आरोप-पत्र को मज़बूत आधार दिया है।
कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारियाँ
पुलिस ने 'इम्मोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट' की धाराओं 3, 4 और 5 तथा 'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस' (पोक्सो) एक्ट की धाराओं 5/6, 11/12 और 17 के तहत मामला दर्ज किया है। पाँचों आरोपियों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर रखा गया है और उनसे पूछताछ जारी है।
पीड़िताओं का पुनर्वास और आगे की जाँच
बचाई गई सभी छह बच्चियों को सुरक्षा और देखभाल के लिए एक बालिका आश्रय गृह में भेज दिया गया है। जाँचकर्ता इस रैकेट के पूरे दायरे का पता लगाने और उन अन्य लोगों की पहचान करने में जुटे हैं जो नाबालिग लड़कियों के शोषण और तस्करी में शामिल हो सकते हैं। यह मामला राजस्थान में बाल तस्करी-रोधी तंत्र और पारंपरिक समुदायों में बालिका संरक्षण की व्यापक चुनौती को एक बार फिर सामने लाता है।