स्मित मच्छार को भारत रत्न देने की मांग, मुंबई में जुटे समर्थक; दिल्ली के कालकाजी मंदिर में हुई प्रार्थना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने 174 से अधिक यात्रियों की जान बचाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना पाई है। 1 अक्टूबर 2026 को मुंबई में उनके परिजन, मित्र और प्रशंसक एकजुट हुए और उनके लिए देश के सर्वोच्च सम्मान की माँग उठाई, वहीं नई दिल्ली के कालकाजी मंदिर में उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए पूजा-अर्चना की गई।
मुंबई में उमड़ा समर्थन
मुंबई में कैप्टन मच्छार के चाहने वालों ने उनकी तस्वीर लेकर 'भारत माता की जय' के नारे लगाए और सरकार से उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए जाने की माँग की। उनके मित्र की माँ रश्मि मोदी ने कहा, 'हम उन्हें 20 साल से जानते हैं। वह बहुत ही अच्छा लड़का है... देश का सर्वोच्च सम्मान उन्हें दिया जाना चाहिए।' उन्होंने बताया कि वे मच्छार के परिवार से मिलने आई थीं और इस घटना की खबर सुनकर शुरू में घबरा गई थीं, लेकिन अब राहत महसूस कर रही हैं।
नीरजा भनोट से की तुलना
एक पड़ोसी ने कहा कि जिस प्रकार नीरजा भनोट ने अपने समय में लगभग 200 से 250 लोगों की जान बचाई थी, उसी तरह 'हमारी बिल्डिंग के स्मित मच्छार ने भी सबकी जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली।' एक अन्य समर्थक ने कहा, '174 लोगों की जान बचाना गर्व की बात है। उन्होंने भारत का नाम पूरे विश्व में रोशन किया है। हम चाहते हैं कि वह जल्द से जल्द स्वस्थ हों।'
सहयात्रियों और दोस्तों की प्रतिक्रिया
कैप्टन मच्छार की एक मित्र ने कहा कि उन्होंने पूरी सूझ-बूझ से काम लिया। उनके अनुसार, 'उन्हें पता था कि यात्रियों की जान दांव पर लगी है। इसलिए उन्होंने वही किया जिसमें वे माहिर हैं।' गौरतलब है कि घटना के दौरान कैप्टन मच्छार ने सह-पायलट से संघर्ष करते हुए, खून बहने के बावजूद, कॉकपिट का दरवाजा खोला और 174 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित किया।
कालकाजी मंदिर में प्रार्थना
दिल्ली के कालकाजी मंदिर में स्थानीय निवासियों ने कैप्टन मच्छार के शीघ्र स्वास्थ्य-लाभ के लिए माँ कालका से आशीर्वाद माँगा। एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों की जान बचाई।'
BJP नेता ने की प्रशंसा
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता विक्रम बिधूड़ी ने कहा कि 'स्मित मच्छार ने विश्व को बताया है कि भारत हमेशा से मानवता का संदेश देने वाला देश है।' उन्होंने बताया कि वे भी कालकाजी मंदिर में कैप्टन के जल्द स्वस्थ होने की कामना के लिए आए थे। यह ऐसे समय में आया है जब पायलट की बहादुरी की कहानी पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है, और उनके सम्मान को लेकर सामाजिक माँग तेज़ होती दिख रही है।