क्या सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल विध्वंस के स्मरण के लिए है या एक हजार साल की यात्रा के लिए? पीएम मोदी
सारांश
Key Takeaways
- सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का महत्व एक हजार साल की यात्रा के उत्सव में है।
- यह पर्व हमारी संस्कृति और पहचान का प्रतीक है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ के इतिहास को विजय और पुनर्निमाण का बताया।
- सोमनाथ मंदिर की ध्वजा आज भी हिंदुस्तान की शक्ति का प्रतीक है।
- यह पर्व हमारे पूर्वजों के बलिदान को स्मरण कराने वाला है।
सोमनाथ, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनियाभर के श्रद्धालुओं को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज सोमनाथ मंदिर की स्वाभिमान यात्रा के एक हजार साल पूरे हो रहे हैं। साथ ही 1951 में हुए इसके पुनर्निर्माण के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल एक हजार साल पहले के विध्वंस की याद के लिए नहीं है, बल्कि यह हजार साल की यात्रा का उत्सव है। यह हमारे भारत के अस्तित्व और अभिमान का पर्व भी है।
गुजरात के सोमनाथ मंदिर के सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निमाण का है। यह हमारे पूर्वजों के पराक्रम, त्याग और बलिदान का इतिहास है। आक्रांता आते रहे, लेकिन हर युग में सोमनाथ फिर से स्थापित होता रहा है, ऐसा उदाहरण दुनिया के इतिहास में मिलना मुश्किल है।
उन्होंने कहा, "एक हजार साल पहले इसी स्थान पर हमारे पूर्वजों ने अपनी जान की बाजी लगा दी थी। अपनी आस्था, अपने विश्वास और भगवान शिव के लिए उन्होंने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। हजार साल पहले वे आक्रांता यह सोचते थे कि उन्होंने हमें जीत लिया है, लेकिन आज एक हजार साल बाद भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहरा रही ध्वजा पूरी सृष्टि को बता रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति और सामर्थ्य क्या है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "जब गजनी से लेकर औरंगजेब तक तमाम आक्रांता सोमनाथ पर हमला कर रहे थे, तो उन्हें लगा कि उनकी तलवारें सनातन सोमनाथ को जीत रही हैं। वे मजहबी कट्टरपंथी यह नहीं समझ पाए कि जिस सोमनाथ को वे नष्ट करना चाहते हैं, उसके नाम में ही सोम अर्थात् 'अमृत' जड़ा हुआ है। इसमें हलाहल को पीकर भी अमर रहने का विचार जुड़ा है। उसके भीतर सदाशिव महादेव के रूप में वह चैतन्य शक्ति है जो कल्याणकारी भी है और प्रचंड तांडव: शिव: शक्ति का स्रोत भी है।"
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ में विराजमान महादेव का एक नाम मृत्युंजय भी है, जिसने मृत्यु को भी जीत लिया है। सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं है। यह इतिहास विजय और पुनर्निर्माण का है।
उन्होंने कहा कि यह समयचक्र है, सोमनाथ को ध्वस्त करने की मंशा लेकर आए मजहबी आक्रांता आज इतिहास के कुछ पन्नों में सिमट कर रह गए हैं और सोमनाथ मंदिर उसी विशाल समुद्र के किनारे गगनचुंबी धर्मध्वजा को थामे खड़ा है।