सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल भर्ती पर शिवसेना (UBT) का हमला, केंद्र पर लोकतंत्र कुचलने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से जबरन हटाकर अस्पताल में भर्ती कराए जाने पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है। पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का सीधा आरोप लगाया। वांगचुक NEET परीक्षा पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर अनशन पर बैठे थे।
वांगचुक की गिरफ्तारी और अस्पताल में भर्ती
अनशन के 20वें दिन, शनिवार की आधी रात के बाद, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाकर वांगचुक को हिरासत में लिया और अस्पताल में भर्ती करा दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई जब संसद का सत्र अगले दिन सोमवार से आरंभ होने वाला था। 'सामना' के संपादकीय में लिखा गया कि 'किसी आतंकवादी को घेरने की तरह एक गांधीवादी कार्यकर्ता की गिरफ्तारी के लिए कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाना ही सरकार के डरपोकपन को साबित करता है।'
शिवसेना का तीखा संपादकीय हमला
शिवसेना (UBT) ने 'सामना' में लिखा कि पिछले दो दिनों में सरकार ने जो कदम उठाए हैं, वे 'लोकतंत्र का रेप और उसकी हत्या' के समान हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार 'भ्रष्टाचारियों और व्यभिचारियों को संरक्षण देना चाहती है और इसके खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को जेल में डालना चाहती है।' संपादकीय में यह भी कहा गया कि 'लोकसभा अध्यक्ष ने अंधेरे में ही शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के गुट को मान्यता दे दी।'
अन्य घटनाक्रम और प्रतिक्रियाएँ
शिवसेना ने बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसके अलावा, भाजपा समर्थक एक महिला ने कार्यकर्ताओं पर स्याही फेंकी। पार्टी के अनुसार, वांगचुक को अनशन स्थल से हटाए जाने के बाद सरकार के खिलाफ जनता में गुस्सा बढ़ रहा है।
ICU से वांगचुक का संदेश
अस्पताल के ICU से वांगचुक ने हाथ से लिखकर एक संदेश भेजा — 'यह आज़ादी का दूसरा आंदोलन है। भयमुक्त भारत, अन्यायमुक्त भारत!' शिवसेना ने इस संदेश को 'बेहद महत्वपूर्ण' बताया और कहा कि यह आंदोलन और तेज होगा। गौरतलब है कि वांगचुक पहले भी लद्दाख के अधिकारों को लेकर लंबे अनशन कर चुके हैं और उनकी जन-अपील व्यापक मानी जाती है।
आगे क्या
वांगचुक के समर्थकों का कहना है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। संसद सत्र के दौरान विपक्षी दल इस मुद्दे को सदन में उठाने की तैयारी में हैं। NEET पेपर लीक प्रकरण और उससे जुड़े राजनीतिक दबाव को देखते हुए यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की आशंका है।