सोनम वांगचुक की अपील पर कांग्रेस का पलटवार: सुरेंद्र राजपूत बोले — छात्र विनम्र हैं, दूसरों को समझाएं
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने 28 जुलाई को लखनऊ में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें वांगचुक ने अपने समर्थकों से जश्न के दौरान विनम्रता और संयम बरतने की अपील की थी। राजपूत ने स्पष्ट कहा कि छात्र पहले से ही विनम्र हैं और वांगचुक को उन लोगों के बारे में बोलना चाहिए जिन्होंने वास्तव में कठोरता दिखाई।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह बयान उस समय आया जब सोशल मीडिया पर एक जश्न से जुड़ी वीडियो वायरल हो रही थी। सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों से अपील की थी कि 'जीत में भी विनम्रता होनी चाहिए' और सफलता कभी भी दूसरों की गरिमा की कीमत पर नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि हर जीत के साथ जिम्मेदारी भी आती है।
राजपूत की प्रतिक्रिया
राजपूत ने कहा, 'बच्चों की विजय में विनम्रता होती है। कांग्रेस पार्टी हमेशा से विनम्रता के साथ विजय मनाने के पक्ष में रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों ने तो दिल्ली पुलिस से भी हाथ मिलाकर विदा ली थी। उनके अनुसार, कठोरता छात्रों ने नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिखाई।
बिहार सरकार और छात्र मामला
बिहार सरकार द्वारा छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने के फैसले पर राजपूत ने कहा कि बिहार पुलिस ने छात्रों के साथ जिस तरह का बर्ताव किया, वह किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बर्खास्त करने की माँग की।
अन्य मुद्दों पर राजपूत का रुख
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) नेता वारिस पठान के 'वंदे मातरम बिल' संबंधी बयान पर राजपूत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और AIMIM दोनों राष्ट्र-विरोधी ताकतों के रूप में सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान सभी धर्मों का है और एक पार्टी का हिंदुओं की तथा दूसरे का मुसलमानों की पार्टी होने की सोच संविधान के विरुद्ध है।
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और संसद परिसर के बाहर उनके स्वागत पर राजपूत ने कहा कि यह छात्रों को चिढ़ाने वाला कदम है और BJP की छात्रों के भविष्य के प्रति कोई सकारात्मक सोच नहीं है। कंगना रनौत के बयान पर उन्होंने कहा कि उनके बयान को गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं है और उन्होंने कंगना को 'नकारात्मक मानसिकता' वाला बताया।
आगे क्या
यह बयानबाज़ी ऐसे समय में हो रही है जब छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति में केंद्र में हैं। राजनीतिक दलों की इस पर प्रतिक्रियाएँ आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।